ईरान नीति पर असहमति के कारण केंट का इस्तीफा: क्या है एफबीआई की जांच?
सारांश
Key Takeaways
- ईरान नीति पर अमेरिका में गहरी असहमति है।
- जो केंट ने सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।
- एफबीआई द्वारा जांच चल रही है।
- केंट का सैन्य करियर काफी लंबा है।
- ट्रंप ने केंट के इस्तीफे पर कड़ा रुख अपनाया है।
वाशिंगटन, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका की ईरान नीति पर आंतरिक असहमति अब साफ नजर आने लगी है। पूर्व खुफिया अधिकारी जो केंट ने सरकार की रणनीति पर गहन प्रश्न उठाते हुए अपना इस्तीफा दे दिया और कहा कि वर्तमान मार्ग "काम नहीं करेगा"। इसके बाद से ही केंट संदेह के घेरे में हैं। अमेरिकी मीडिया का दावा है कि एफबीआई उनसे संबंधित जानकारी इकट्ठा कर रही है।
मीडिया आउटलेट न्यूयॉर्क टाइम्स, सेमाफोर और सीबीएस ने इस खबर को प्रकाशित किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) 'गोपनीय जानकारी' के कथित लीक की जांच कर रही है।
सेमाफोर समाचार वेबसाइट ने सबसे पहले इस जांच का खुलासा किया। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि क्या केंट ने कुछ अनधिकृत व्यक्तियों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील तथ्य साझा किए थे। अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि लीक का दायरा क्या है और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं। इस जांच की जानकारी रखने वाले चार लोगों ने बताया कि यह प्रक्रिया महीनों से चल रही है।
केंट ने एक साक्षात्कार में पॉलिटिकल एक्टिविस्ट और टिप्पणीकार टकर कार्लसन से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका का लक्ष्य स्पष्ट नहीं है। उनके अनुसार, अमेरिका "रेजीम चेंज" अर्थात् ईरान की सरकार को बदलने के मुद्दे से दूर रह रहा है, जबकि इजरायल इस दिशा में खुलकर आगे बढ़ रहा है। केंट ने कहा कि इजरायल मौजूदा सरकार को समाप्त करना चाहता है, लेकिन उसके पास इसके बाद की योजना स्पष्ट नहीं है।
केंट ने यह भी कहा कि जब उन्हें लगा कि उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, तब उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उनके शब्दों में, “मैं इस रास्ते का हिस्सा अच्छे विवेक के साथ नहीं बन सकता।”
जो केंट का सैन्य और खुफिया करियर काफी लंबा रहा है। ग्रीन बेरेट के रूप में उन्होंने 11 बार युद्ध क्षेत्रों में तैनाती देखी और बाद में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) में भी कार्य किया। उनके निजी जीवन में भी एक बड़ी त्रासदी आई, जब उनकी पत्नी, जो अमेरिकी नौसेना में क्रिप्टोलॉजिस्ट थीं, 2019 में सीरिया में एक आत्मघाती हमले में मारी गईं। उस समय उनके दो छोटे बेटे थे।
केंट नेशनल काउंटर टेररिज्म विभाग के निदेशक थे, जहां उनका कार्य तुलसी गबार्ड की निगरानी में था। गबार्ड ने हाल ही में कहा कि यह निर्णय लेना कि ईरान अमेरिका के लिए खतरा है या नहीं, पूरी तरह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निर्भर करता है।
गबार्ड, जो पहले हवाई से कांग्रेस सदस्य रह चुकी हैं, पहले ईरान पर सैन्य कार्रवाई से संबंधित चर्चाओं की आलोचना कर चुकी हैं। हालांकि, वर्तमान हमलों पर उनका रुख अभी स्पष्ट नहीं है।
व्हाइट हाउस ने केंट के इस्तीफे पर कड़ा रुख अपनाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें “सुरक्षा के मामले में कमजोर” करार दिया और कहा कि ईरान “एक बड़ा खतरा” है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जो लोग इस खतरे को नहीं मानते, उनकी निर्णय क्षमता पर सवाल उठता है।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि ईरान के प्रति अमेरिका के भीतर रणनीतिक मतभेद गहरे होते जा रहे हैं—जहां एक ओर सख्त सैन्य रुख है, वहीं दूसरी ओर इसके परिणामों को लेकर गंभीर चिंताएं भी प्रकट हो रही हैं।