ईरान का मुस्लिम देशों के साथ युद्ध न चाहने का स्पष्ट संदेश: राष्ट्रपति पेजेश्कियान
सारांश
Key Takeaways
- ईरान मुस्लिम देशों के साथ युद्ध नहीं चाहता।
- राष्ट्रपति ने संयुक्त राज्य और इजरायल को तनाव का जिम्मेदार ठहराया।
- बातचीत के माध्यम से विवादों को सुलझाने की इच्छा।
- परमाणु हथियारों को विकसित करने का कोई इरादा नहीं।
- मध्य पूर्व में सुरक्षा ढांचे का प्रस्ताव।
तेहरान, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया है कि उनका देश मुस्लिम देशों के साथ किसी भी प्रकार का युद्ध या टकराव नहीं चाहता। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने यह बात ईद-उल-फितर और नवरोज के अवसर पर दिए गए अपने संदेश में कही। ईद-उल-फितर रमजान के महीने के समापन का प्रतीक है, जबकि नवरोज 21 मार्च को मनाया जाने वाला ईरानी नववर्ष है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने हाल के दिनों में ईरान और कुछ अरब देशों के बीच बढ़ते तनाव पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, "हम मुस्लिम देशों के साथ किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं चाहते। हम न तो संघर्ष चाहते हैं और न ही युद्ध। वे हमारे भाई हैं।" उन्होंने इन तनावों के लिए संयुक्त राज्य और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने आगे कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ सभी विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने के लिए तैयार है। इसके साथ ही, उन्होंने मध्य पूर्व में मुस्लिम देशों का एक साझा सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव दिया, ताकि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा, "हमें इस क्षेत्र में बाहरी शक्तियों की आवश्यकता नहीं है। हम मुस्लिम देशों के सहयोग से एक इस्लामिक असेंबली स्थापित कर सकते हैं, जिसके तहत हम अपनी सुरक्षा, आर्थिक, सांस्कृतिक, और राजनीतिक संबंधों को बेहतर तरीके से संचालित कर सकते हैं।"
परमाणु हथियारों के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने के दिशा में नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले ही एक धार्मिक आदेश जारी कर चुके हैं, जिसमें परमाणु हथियारों पर रोक लगाई गई है। ऐसे में कोई भी अधिकारी इस दिशा में कदम नहीं उठा सकता।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका दुनिया को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और आम नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की एक श्रृंखला शुरू कर दी, जिसमें इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।