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ब्यूफोर्ट किले पर फिर लहराया इजरायली झंडा, रक्षा मंत्री काट्ज बोले — 'दुश्मनों के लिए स्पष्ट संदेश'

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ब्यूफोर्ट किले पर फिर लहराया इजरायली झंडा, रक्षा मंत्री काट्ज बोले — 'दुश्मनों के लिए स्पष्ट संदेश'

सारांश

44 साल बाद इजरायली सेना ने फिर ब्यूफोर्ट किले पर झंडा फहराया — यह महज एक सैन्य कदम नहीं, बल्कि लितानी नदी के पार अभियान विस्तार का प्रतीकात्मक संदेश है। रक्षा मंत्री काट्ज ने इसे 1982 के शहीदों को श्रद्धांजलि और दुश्मनों के लिए चेतावनी दोनों बताया।

मुख्य बातें

इजरायली सेना (आईडीएफ) ने गोलानी ब्रिगेड के नेतृत्व में दक्षिणी लेबनान के ब्यूफोर्ट किले पर 31 मई को कब्जा किया।
रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इसे 'रणनीतिक जीत' बताया; कार्रवाई लितानी नदी के पार अभियान विस्तार का हिस्सा है।
इजरायल ने पहली बार 1982 में यह किला जीता था; उस लड़ाई में गोलानी ब्रिगेड के 6 सैनिक शहीद हुए थे।
1982 से 2000 तक 18 वर्षों के कब्जे के बाद इजरायल ने किला छोड़ा था; अब 44 साल बाद वापसी हुई।
काट्ज ने कहा — प्रधानमंत्री नेतन्याहू के निर्देश पर अभियान जारी है और हिजबुल्लाह को कमज़ोर करने के प्रयास रुकेंगे नहीं।

इजरायली सेना (आईडीएफ) ने गोलानी ब्रिगेड के नेतृत्व में दक्षिणी लेबनान के नबातियेह के निकट स्थित ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा कर इजरायली और गोलानी ब्रिगेड के झंडे फहरा दिए। इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इस कार्रवाई को 'रणनीतिक जीत' बताया और कहा कि यह लितानी नदी के पार सैन्य अभियान के विस्तार का हिस्सा है। यह घटनाक्रम 31 मई की सुबह सामने आया जब इजरायली ब्रॉडकास्ट कॉर्प ने किले पर फहराते झंडों की तस्वीर सोशल प्लेटफॉर्म पर साझा की।

मुख्य घटनाक्रम

आईडीएफ के प्रवक्ता ने एक्स पर पोस्ट जारी कर बताया कि इजरायली सैनिक अब लितानी नदी के उत्तर में हिजबुल्लाह के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। प्रवक्ता ने इलाके में तैनात सैनिकों की तस्वीरें भी जारी कीं और अब तक की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया।

रक्षा मंत्री काट्ज ने एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निर्देश पर इजरायली सेना ने लेबनान में अभियान का विस्तार किया, लितानी नदी पार की और ब्यूफोर्ट रिज पर नियंत्रण स्थापित किया।

रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

काट्ज ने अपनी पोस्ट में कहा, 'ब्यूफोर्ट की वीरतापूर्ण लड़ाई के 44 वर्ष बाद, और 'गैलीली के लिए शांति' युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के स्मरण दिवस पर — जिसमें ब्यूफोर्ट की लड़ाई में शहीद हुए गोलानी ब्रिगेड के सैनिक भी शामिल थे — आईडीएफ के सैनिक गोलानी ब्रिगेड के नेतृत्व में ब्यूफोर्ट की चोटी पर फिर से लौटे।'

उन्होंने ब्यूफोर्ट रिज को गैलीली की बस्तियों की रक्षा के लिए 'अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान' बताया और चेतावनी दी: 'जो भी इज़रायली नागरिकों को धमकी देगा, वह एक के बाद एक अपने रणनीतिक ठिकानों को खो देगा।' काट्ज ने यह भी स्वीकार किया कि इस अभियान में गोपनीयता बरती गई थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि आईडीएफ ने पहली बार 1982 में इस किले पर कब्जा किया था, जिस दौरान गोलानी ब्रिगेड के छह सैनिक मारे गए थे। इसके बाद 1982 से 2000 तक — यानी 18 वर्षों के दक्षिणी लेबनान पर कब्जे के दौरान — इजरायल ने इस किले क्षेत्र को अपने नियंत्रण में रखा। 2000 में इजरायली सेना को वहाँ से वापस बुला लिया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष में तेजी आई है और लितानी नदी के पार अभियान का विस्तार एक नई रणनीतिक दिशा का संकेत देता है।

आगे की स्थिति

काट्ज ने स्पष्ट किया कि लड़ाई अभी जारी है और इजरायल हिजबुल्लाह को कमज़ोर करने तथा उत्तरी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रखेगा। आलोचकों का कहना है कि लितानी नदी के पार इस अभियान के विस्तार से क्षेत्रीय तनाव और गहरा हो सकता है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 2006 युद्धविराम का आधार था — इस पहलू पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः मौन रहती है। काट्ज का 'एक के बाद एक रणनीतिक ठिकाने खोने' वाला बयान संकेत देता है कि यह अभियान ब्यूफोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और लेबनान सरकार का रुख ही तय करेगा कि यह 'रणनीतिक जीत' दीर्घकालिक स्थिरता लाती है या नए मोर्चे खोलती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्यूफोर्ट किला क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
ब्यूफोर्ट किला दक्षिणी लेबनान के नबातियेह के निकट स्थित एक ऐतिहासिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। इजरायल के अनुसार यह गैलीली की बस्तियों की निगरानी और सुरक्षा के लिए अत्यंत अहम है।
इजरायल ने पहले कब ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा किया था?
इजरायली सेना ने 1982 में पहली बार ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा किया था, जिसमें गोलानी ब्रिगेड के 6 सैनिक शहीद हुए थे। 1982 से 2000 तक 18 वर्षों के दक्षिणी लेबनान पर कब्जे के दौरान यह किला इजरायल के नियंत्रण में रहा, फिर सेना वापस बुला ली गई।
रक्षा मंत्री काट्ज ने इस कार्रवाई को 'रणनीतिक जीत' क्यों कहा?
काट्ज के अनुसार ब्यूफोर्ट रिज पर नियंत्रण गैलीली की बस्तियों की रक्षा और उत्तरी सीमा की सुरक्षा के लिए निर्णायक है। उन्होंने इसे हिजबुल्लाह के खिलाफ लितानी नदी के पार अभियान विस्तार का अहम हिस्सा बताया।
लितानी नदी के पार इजरायली अभियान का क्या मतलब है?
लितानी नदी दक्षिणी लेबनान में एक भौगोलिक सीमा रेखा मानी जाती है। इजरायल का इस नदी के उत्तर में अभियान विस्तार संकेत देता है कि आईडीएफ हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अधिक गहराई तक कार्रवाई कर रही है।
इस घटनाक्रम का क्षेत्रीय स्थिरता पर क्या असर हो सकता है?
आलोचकों का कहना है कि लितानी नदी के पार इजरायली अभियान के विस्तार से इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष और गहरा हो सकता है। काट्ज ने स्पष्ट किया है कि लड़ाई जारी रहेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और लेबनान सरकार का रुख महत्वपूर्ण हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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