ब्यूफोर्ट किले पर फिर लहराया इजरायली झंडा, रक्षा मंत्री काट्ज बोले — 'दुश्मनों के लिए स्पष्ट संदेश'
सारांश
मुख्य बातें
इजरायली सेना (आईडीएफ) ने गोलानी ब्रिगेड के नेतृत्व में दक्षिणी लेबनान के नबातियेह के निकट स्थित ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा कर इजरायली और गोलानी ब्रिगेड के झंडे फहरा दिए। इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इस कार्रवाई को 'रणनीतिक जीत' बताया और कहा कि यह लितानी नदी के पार सैन्य अभियान के विस्तार का हिस्सा है। यह घटनाक्रम 31 मई की सुबह सामने आया जब इजरायली ब्रॉडकास्ट कॉर्प ने किले पर फहराते झंडों की तस्वीर सोशल प्लेटफॉर्म पर साझा की।
मुख्य घटनाक्रम
आईडीएफ के प्रवक्ता ने एक्स पर पोस्ट जारी कर बताया कि इजरायली सैनिक अब लितानी नदी के उत्तर में हिजबुल्लाह के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। प्रवक्ता ने इलाके में तैनात सैनिकों की तस्वीरें भी जारी कीं और अब तक की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया।
रक्षा मंत्री काट्ज ने एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निर्देश पर इजरायली सेना ने लेबनान में अभियान का विस्तार किया, लितानी नदी पार की और ब्यूफोर्ट रिज पर नियंत्रण स्थापित किया।
रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया
काट्ज ने अपनी पोस्ट में कहा, 'ब्यूफोर्ट की वीरतापूर्ण लड़ाई के 44 वर्ष बाद, और 'गैलीली के लिए शांति' युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के स्मरण दिवस पर — जिसमें ब्यूफोर्ट की लड़ाई में शहीद हुए गोलानी ब्रिगेड के सैनिक भी शामिल थे — आईडीएफ के सैनिक गोलानी ब्रिगेड के नेतृत्व में ब्यूफोर्ट की चोटी पर फिर से लौटे।'
उन्होंने ब्यूफोर्ट रिज को गैलीली की बस्तियों की रक्षा के लिए 'अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान' बताया और चेतावनी दी: 'जो भी इज़रायली नागरिकों को धमकी देगा, वह एक के बाद एक अपने रणनीतिक ठिकानों को खो देगा।' काट्ज ने यह भी स्वीकार किया कि इस अभियान में गोपनीयता बरती गई थी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि आईडीएफ ने पहली बार 1982 में इस किले पर कब्जा किया था, जिस दौरान गोलानी ब्रिगेड के छह सैनिक मारे गए थे। इसके बाद 1982 से 2000 तक — यानी 18 वर्षों के दक्षिणी लेबनान पर कब्जे के दौरान — इजरायल ने इस किले क्षेत्र को अपने नियंत्रण में रखा। 2000 में इजरायली सेना को वहाँ से वापस बुला लिया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष में तेजी आई है और लितानी नदी के पार अभियान का विस्तार एक नई रणनीतिक दिशा का संकेत देता है।
आगे की स्थिति
काट्ज ने स्पष्ट किया कि लड़ाई अभी जारी है और इजरायल हिजबुल्लाह को कमज़ोर करने तथा उत्तरी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रखेगा। आलोचकों का कहना है कि लितानी नदी के पार इस अभियान के विस्तार से क्षेत्रीय तनाव और गहरा हो सकता है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।