संघर्ष विराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान में जारी रहेगा इजरायली सैन्य अभियान: रक्षा मंत्री काट्ज
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि हाल ही में घोषित संघर्ष विराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैन्य अभियान फिलहाल जारी रहेगा और विस्थापित लेबनानी नागरिकों को अभी अपने घरों में लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बयान वाशिंगटन में हुई वार्ताओं के बाद इजरायल और लेबनान द्वारा युद्धविराम पर सहमति जताए जाने के ठीक एक दिन बाद आया है।
मुख्य घोषणा और शर्तें
काट्ज ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि इजरायली सैनिक दक्षिणी लेबनान में स्थापित तथाकथित ‘सुरक्षा क्षेत्र’ में तैनात रहेंगे, जिसमें ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले का इलाका भी शामिल है। लगभग 900 वर्ष पुराने इस किले पर इजरायली बलों ने 30 मई, शनिवार को नियंत्रण स्थापित किया था।
रक्षा मंत्री के अनुसार, यह समझौता हिज्बुल्लाह द्वारा गोलीबारी रोकने की शर्त पर आधारित है, और इजरायल क्षेत्र में ‘आतंकी ढांचे को ध्वस्त’ करने की कार्रवाई बरकरार रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के समर्थन से इजरायल को बेरूत सहित इजरायली क्षेत्रों पर किसी भी हमले के जवाब में कार्रवाई करने की स्वतंत्रता प्राप्त रहेगी।
भीतर से तीखी आलोचना
इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने अमेरिकी मध्यस्थता से हुए इस समझौते को ‘बड़ी गलती’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता उन सलाहकारों की ‘कल्पनाओं’ का परिणाम है जो प्रधानमंत्री को गलत निर्णय लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बेन ग्वीर ने लिखा, ‘हिज्बुल्लाह केवल और अधिक मजबूत होगा, और उसे पराजित करने के बजाय इजरायल उसके अस्तित्व को स्वीकार कर रहा है।’ उन्होंने आगे जोड़ा कि ‘कुछ अवसर ऐसे होते हैं जब अमेरिका के राष्ट्रपति को भी ‘नहीं’ कहना आवश्यक होता है।’
जमीनी हालात: ड्रोन हमले की रिपोर्ट
लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के हवाले से रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के जेफ्ता-कफरवा मार्ग पर एक वाहन को निशाना बनाकर किए गए इजरायली ड्रोन हमले में कई लोग घायल हो गए। यह घटना उसी समय हुई जब दोनों देशों ने औपचारिक रूप से संघर्ष समाप्ति की दिशा में सहमति की घोषणा की थी।
क्यों मायने रखता है यह घटनाक्रम
यह संघर्ष विराम पिछले कई महीनों से चल रहे सीमा-पार संघर्ष के बाद आया है, जिसमें हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच अमेरिकी मध्यस्थता से समझौते की कोशिश की गई है, परंतु काट्ज की ताज़ा टिप्पणी और जमीन पर जारी सैन्य गतिविधि से समझौते की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आगे क्या
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या हिज्बुल्लाह संयम बरकरार रखता है और क्या इजरायल अपने ‘सुरक्षा क्षेत्र’ से चरणबद्ध वापसी का कोई समय-निर्धारण साझा करता है। विस्थापित लेबनानी नागरिकों की वापसी का प्रश्न इस समझौते की वास्तविक परीक्षा साबित होगा।