जयशंकर की विसेग्राड-4 देशों के साथ ऐतिहासिक पहली बैठक, UNSC स्थायी सदस्यता को मिला समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र के मौके पर मध्य यूरोप के 'विसेग्राड-4' (वी4) देशों — स्लोवाकिया, हंगरी, पोलैंड और चेक रिपब्लिक — के नेताओं के साथ पहली संयुक्त बैठक की। बैठक की मेज़बानी करने वाले स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने भारत को 'उभरती हुई सुपरपावर' बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए वी4 का समर्थन घोषित किया।
बैठक का ऐतिहासिक महत्व
यह पहली बार है जब भारत के विदेश मंत्री और चारों वी4 देशों के शीर्ष राजनयिक एक साथ एक मेज़ पर बैठे। ब्लानार ने पत्रकारों से कहा, 'हम चारों देश इस बात पर सहमत हैं कि ग्लोबल साउथ का हिस्सा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती हुई सुपरपावर भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के तौर पर जगह मिलनी चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब UNSC सुधार की माँग वैश्विक स्तर पर तेज़ होती जा रही है और भारत लंबे समय से इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में लगा है।
बैठक के मुख्य निर्णय
जयशंकर ने बताया कि दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण पहलों पर सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा, 'क्योंकि यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, इसलिए वी4 देशों के साथ भी हम कुछ खास पहल करेंगे, जिनमें हर साल एक बिजनेस फोरम आयोजित करना शामिल है।' इसके अलावा चारों देशों के विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक का भी निर्णय लिया गया।
टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग विस्तार पर भी व्यापक चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा, 'रक्षा के क्षेत्र में वी4 के सभी देशों के साथ हमारा बहुत मजबूत इतिहास रहा है। हम इस पुराने सहयोग को फिर से नई रफ्तार देना और आगे बढ़ाना चाहते हैं।'
प्रतिनिधित्व और द्विपक्षीय वार्ताएँ
वी4 की ओर से बैठक में हंगरी की उप प्रधानमंत्री अनीता ओरबान, पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडेक सिकोरस्की और चेक रिपब्लिक के उप प्रधानमंत्री पेट्र माकिंका ने अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व किया। गौरतलब है कि जयशंकर की शुरुआती राजनयिक पोस्टिंग में से एक हंगरी में रही थी, और उन्होंने अनीता ओरबान के साथ अलग से भी द्विपक्षीय बैठक की। इसके अतिरिक्त ब्लानार के साथ भी अलग से बातचीत हुई, जिसमें बहुपक्षीय स्तर पर सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई।
विसेग्राड-4 समूह की पृष्ठभूमि
इस समूह का नाम हंगरी के शहर विसेग्राद के नाम पर रखा गया है, जहाँ इन देशों के नेताओं की पहली बैठक 1991 में हुई थी — वह दौर जब ये देश सोवियत संघ के प्रभाव से बाहर आ रहे थे। शुरुआत में समूह में तीन सदस्य थे; बाद में चेकोस्लोवाकिया के विभाजन के बाद सदस्य संख्या चार हो गई। जयशंकर ने इन देशों को 'मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्थाएँ' बताते हुए कहा कि इनके पास इनोवेशन और टेक्नोलॉजी में बेहतरीन प्रतिभा है।
एक्स पोस्ट और आगे की राह
बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'हमने अपने संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का फैसला किया है।' यह बैठक भारत की यूरोप-नीति में एक नई परत जोड़ती है — जहाँ बड़ी शक्तियों के साथ-साथ मध्य यूरोप के उभरते समूहों के साथ भी संस्थागत संवाद की नींव रखी जा रही है। वार्षिक बिजनेस फोरम और विदेश मंत्रियों की नियमित बैठक इस साझेदारी को भविष्य में ठोस रूप देने का काम करेगी।