कुमामोटो भूकंप में 13 की मौत, PM तकाइची ने बुलाई दूसरी आपातकालीन बैठक; 4,600 जवान राहत में जुटे
सारांश
मुख्य बातें
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि कुमामोटो प्रांत में मंगलवार शाम आए 7.1 तीव्रता के भूकंप में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। कई स्थानों पर इमारतें ढहने, आग लगने, सड़कें क्षतिग्रस्त होने और लोगों के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है। यह भूकंप स्थानीय समय के अनुसार शाम 4:27 बजे आया और इसकी गहराई जमीन के अंदर 10 किलोमीटर थी।
भूकंप की तीव्रता और क्षति का विवरण
जापान की मौसम एजेंसी के अनुसार, कुमामोटो प्रांत में आए इस भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी गई और इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर रही, जिससे सतह पर कंपन की तीव्रता अत्यधिक महसूस हुई। प्रभावित क्षेत्रों में इमारतें गिरीं, जगह-जगह आग भड़की और सड़क संपर्क बाधित हुआ। 'आईओएन मॉल कुमामोटो' और 'निप्पॉन पेपर यात्सुशिरो मिल' सहित कई स्थानों पर अभी भी लोग मलबे में फंसे हैं।
आपातकालीन आपदा प्रबंधन बैठक
प्रधानमंत्री तकाइची ने बुधवार को कुमामोटो भूकंप को लेकर दूसरी आपातकालीन आपदा प्रबंधन बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में कुमामोटो के गवर्नर किमुरा और कैबिनेट कार्यालय के उपमंत्री त्सुशिमा ने ऑनलाइन भागीदारी की। सरकार ने सभी संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेज़ी लाने के निर्देश दिए हैं।
राहत-बचाव अभियान की स्थिति
प्रधानमंत्री तकाइची ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि राहत अभियान में लगे सेल्फ-डिफेंस फोर्स के जवानों की संख्या बढ़ाकर लगभग 4,600 कर दी गई है। इसके अलावा करीब 2,000 पुलिसकर्मी और 1,400 अग्निशमन कर्मी भी निरंतर राहत कार्य में जुटे हैं। उन्होंने लिखा, 'राहत-बचाव का काम समय के खिलाफ एक दौड़ है।' सेल्फ-डिफेंस फोर्स पेयजल आपूर्ति और घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने का कार्य कर रही है।
राहत शिविर और बुनियादी सेवाएँ
सरकार ने अब तक लगभग 450 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहाँ करीब 7,700 लोग आश्रय ले रहे हैं। इन शिविरों में भोजन, पेयजल, बिस्तर, स्वच्छता सामग्री, एयर कंडीशनर और बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को विशेष रूप से गर्मी को देखते हुए हीट स्ट्रोक से बचाव के पूर्ण इंतज़ाम करने के निर्देश दिए हैं।
विशेष स्वास्थ्य चिंताएँ और आगे की योजना
प्रधानमंत्री तकाइची ने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में विस्थापित लोग अपने वाहनों में रह रहे हैं। इसे देखते हुए उन्होंने पर्याप्त पेट्रोल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा नियमित निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से होने वाली 'इकोनॉमी क्लास सिंड्रोम' जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके। बिजली और पानी जैसी आवश्यक सेवाओं की शीघ्र बहाली सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। आने वाले घंटों में मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी रहने के साथ मृतक संख्या में बदलाव की आशंका है।