चुनाव से पहले मेटा पर दबाव: 'नो किंग्स कोएलिशन' का इंस्टाग्राम निलंबन, 14 राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स ने माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
वाशिंगटन में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी कांग्रेस चुनावों से ठीक पहले सोशल मीडिया दिग्गज मेटा गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। मामला एंटी-ट्रंप संगठन 'नो किंग्स कोएलिशन' के इंस्टाग्राम अकाउंट को 17 अक्टूबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान अस्थायी रूप से निलंबित किए जाने से जुड़ा है। इस घटना ने राजनीतिक अभिव्यक्ति, स्वचालित कंटेंट मॉडरेशन और बड़ी तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
निलंबन की घटनाक्रम
17 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:30 बजे (ईस्टर्न टाइम) 'नो किंग्स कोएलिशन' का इंस्टाग्राम अकाउंट उस वक्त बंद कर दिया गया जब देशभर में विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। संगठन के अनुसार, करीब 90 मिनट बाद अकाउंट पुनः सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगा, लेकिन संचालकों को लॉग-इन करने में कई घंटे और लगे। पूरी पहुँच बहाल होने में चार घंटे से अधिक का समय लगा।
इस व्यवधान के कारण संगठन प्रदर्शन के दौरान अपने समर्थकों तक ज़रूरी संदेश और जानकारी नहीं पहुँचा सका। गौरतलब है कि उस समय संगठन अग्रिम मतदान (अर्ली वोटिंग) के लिए जन-जागरण अभियान भी चला रहा था।
मेटा का स्पष्टीकरण
मेटा ने स्वीकार किया है कि यह निलंबन एक तकनीकी गलती थी। कंपनी के अनुसार, अकाउंट पर अचानक असामान्य रूप से बढ़ी गतिविधि को उसके स्वचालित सिस्टम ने बॉट्स (स्वचालित खाते) जैसी संदिग्ध गतिविधि समझ लिया, जिसके कारण यह कार्रवाई हुई। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि ट्रंप प्रशासन ने इस निलंबन का निर्देश दिया हो या इसे प्रभावित किया हो।
यह ऐसे समय में आया है जब बड़ी तकनीकी कंपनियाँ स्पैम और फर्जी गतिविधियों की पहचान के लिए व्यापक स्वचालित प्रणालियों पर निर्भर हैं — जो राजनीतिक रैलियों के दौरान वैध सामूहिक गतिविधि को भी संदिग्ध मान सकती हैं।
14 राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स का दबाव
सोमवार को कनेक्टिकट के अटॉर्नी जनरल विलियम टोंग के नेतृत्व में 14 राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स के एक समूह ने मेटा को पत्र लिखकर कई सवाल पूछे। इस गठबंधन में कैलिफोर्निया, मैरीलैंड, न्यूयॉर्क, मैसाचुसेट्स और वॉशिंगटन सहित कई राज्य शामिल थे।
इन अधिकारियों ने जानना चाहा कि निलंबन की जानकारी कंपनी को कब मिली, यह फैसला किस प्रक्रिया से लिया गया, मानव समीक्षकों (ह्यूमन रिव्यूअर्स) की क्या भूमिका थी और क्या चुनाव से जुड़े अन्य वैध अकाउंट भी इसी तरह प्रभावित हुए। अटॉर्नी जनरल्स ने मेटा से 29 अक्टूबर तक जवाब देने को कहा है — जो कांग्रेस चुनावों से ठीक पाँच दिन पहले की तारीख है।
डेमोक्रेटिक सीनेटरों की चिंताएँ
अटॉर्नी जनरल्स की कार्रवाई से पहले, 22 अक्टूबर को पाँच डेमोक्रेटिक सीनेटरों — क्रिस वैन होलेन, रॉन वायडन, जेफ मर्कली, रिचर्ड ब्लूमेंथल और क्रिस मर्फी — ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर स्वचालित कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या मेटा के अधिकारियों ने 'नो किंग्स आंदोलन' या अन्य राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर ट्रंप प्रशासन के साथ कोई बातचीत की थी।
आम जनता और लोकतंत्र पर असर
कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि सोशल मीडिया आज राजनीतिक संवाद का एक अनिवार्य माध्यम बन चुका है। उनके अनुसार, 'कैलिफोर्निया के लाखों लोग संगठित होने, खबरें पढ़ने और आने वाले चुनावों से जुड़ी जानकारी पाने के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर हैं।'
यह विवाद एक व्यापक प्रश्न को उजागर करता है: क्या बड़ी तकनीकी कंपनियों की स्वचालित प्रणालियाँ चुनावी माहौल में वैध राजनीतिक गतिविधि और संदिग्ध ऑनलाइन हेरफेर के बीच सही अंतर कर सकती हैं? मेटा को अब 29 अक्टूबर की समयसीमा के भीतर इन सवालों का जवाब देना होगा।