3 अगस्त 2026
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जी-7 में PM मोदी ने समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया में शांति की पुरज़ोर पैरवी की: विदेश सचिव मिस्री

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जी-7 में PM मोदी ने समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया में शांति की पुरज़ोर पैरवी की: विदेश सचिव मिस्री

सारांश

एवियन में जी-7 मंच पर PM मोदी ने दो मोर्चे एक साथ साधे — पश्चिम एशिया में शांति की पैरवी और लाखों भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा का सवाल। साथ ही, ट्रंप से मुलाकात में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम दौर में पहुँचा।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 17-18 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया — यह उनकी लगातार सातवीं और भारत की 13वीं जी-7 भागीदारी।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि PM ने संबोधनों और द्विपक्षीय बैठकों में समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा विशेष रूप से उठाया।
भारत ने अमेरिका-ईरान समझौते को सकारात्मक बताया और पश्चिम एशिया में जल्द शांति की उम्मीद जताई।
भारत-अमेरिका अंतरिम मुक्त व्यापार समझौते पर अच्छी प्रगति; अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत आएंगे।
PM मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एवियन में द्विपक्षीय बैठक में व्यापार समझौता प्रमुख एजेंडा रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17-18 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 18 जून को पेरिस में पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधनों और कई विश्व नेताओं के साथ हुई द्विपक्षीय बैठकों, दोनों में यह विषय विशेष रूप से रखा।

समुद्री सुरक्षा पर भारत का रुख

विदेश सचिव मिस्री ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता और निर्बाध व्यापार का पक्षधर रहा है। उन्होंने कहा कि लाखों भारतीय समुद्री कर्मचारी दुनियाभर के जहाजों पर काम करते हैं और वैश्विक व्यापार को सुचारू रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा केवल भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की साझा ज़िम्मेदारी है।

यह ऐसे समय में आया है जब लाल सागर और अदन की खाड़ी में समुद्री मार्गों पर तनाव के कारण वैश्विक शिपिंग लागत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और कई व्यापारिक जहाज़ों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े हैं।

पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद

विदेश सचिव ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में बनी नई समझ को भारत सकारात्मक दृष्टि से देखता है। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व नेताओं के साथ हुई चर्चाओं में पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और सुरक्षा की भारत की इच्छा एक बार फिर दोहराई। मिस्री ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि इस क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता लौटेगी।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति, प्रवासी कामगारों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ता है, जिससे यह क्षेत्र भारत की विदेश नीति की प्राथमिकता सूची में हमेशा ऊपर रहता है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर प्रगति

विदेश सचिव मिस्री ने यह भी खुलासा किया कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम मुक्त व्यापार समझौते को लेकर अच्छी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। अगले सप्ताह अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर भारत आएंगे, ताकि इन चर्चाओं को आगे बढ़ाया जा सके।

एवियन में प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में यह व्यापार समझौता एक प्रमुख एजेंडा बिंदु रहा।

जी-7 में भारत की भागीदारी

भारत को इस बार भी साझेदार देश के रूप में 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था। यह जी-7 में भारत की 13वीं भागीदारी थी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह लगातार सातवीं भागीदारी रही। इस मंच पर प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।

आगे देखें तो अगले सप्ताह होने वाली ग्रीर की भारत यात्रा और व्यापार वार्ता के नतीजे यह तय करेंगे कि भारत-अमेरिका आर्थिक संबंध किस दिशा में जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सदस्यता से बाहर रहने की सीमाएँ भी बरकरार हैं। समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाना रणनीतिक रूप से सटीक है — भारत विश्व के सबसे बड़े समुद्री कर्मचारी-आपूर्तिकर्ता देशों में है — लेकिन इस पैरवी के ठोस नतीजे क्या निकले, यह अभी स्पष्ट नहीं है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर 'बेहद करीब' की भाषा परिचित है; असली परीक्षा ग्रीर की यात्रा के बाद सामने आएगी। पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद स्वागत योग्य है, पर भारत की ऊर्जा और प्रवासी निर्भरता को देखते हुए केवल उम्मीद काफी नहीं — एक सक्रिय मध्यस्थ भूमिका की माँग बढ़ती जा रही है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी-7 शिखर सम्मेलन में PM मोदी ने कौन-से मुख्य मुद्दे उठाए?
PM मोदी ने एवियन में जी-7 के दौरान दो प्रमुख मुद्दे उठाए — समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति। उन्होंने ग्लोबल साउथ से जुड़े विषय भी विश्व नेताओं के सामने रखे।
भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा जी-7 में क्यों उठाया गया?
लाखों भारतीय नागरिक दुनियाभर के जहाजों पर काम करते हैं और वैश्विक व्यापार में अहम भूमिका निभाते हैं। पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ा है, इसलिए विदेश सचिव मिस्री के अनुसार PM ने इसे साझा वैश्विक चिंता बताया।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की स्थिति क्या है?
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत आएंगे और PM मोदी व राष्ट्रपति ट्रंप की एवियन बैठक में यह प्रमुख विषय रहा।
जी-7 में भारत की भागीदारी का क्या महत्व है?
भारत जी-7 का सदस्य नहीं है, लेकिन इस बार 52वें शिखर सम्मेलन में उसे साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया। यह जी-7 में भारत की 13वीं और PM मोदी की लगातार सातवीं भागीदारी थी, जो वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
अमेरिका-ईरान समझौते पर भारत का क्या रुख है?
भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच बनी नई समझ को सकारात्मक बताया है। विदेश सचिव मिस्री के अनुसार भारत को उम्मीद है कि इस समझौते से पश्चिम एशिया में जल्द शांति और स्थिरता लौटेगी।
राष्ट्र प्रेस
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