जी-7 में PM मोदी ने समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया में शांति की पुरज़ोर पैरवी की: विदेश सचिव मिस्री
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17-18 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 18 जून को पेरिस में पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधनों और कई विश्व नेताओं के साथ हुई द्विपक्षीय बैठकों, दोनों में यह विषय विशेष रूप से रखा।
समुद्री सुरक्षा पर भारत का रुख
विदेश सचिव मिस्री ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता और निर्बाध व्यापार का पक्षधर रहा है। उन्होंने कहा कि लाखों भारतीय समुद्री कर्मचारी दुनियाभर के जहाजों पर काम करते हैं और वैश्विक व्यापार को सुचारू रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा केवल भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की साझा ज़िम्मेदारी है।
यह ऐसे समय में आया है जब लाल सागर और अदन की खाड़ी में समुद्री मार्गों पर तनाव के कारण वैश्विक शिपिंग लागत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और कई व्यापारिक जहाज़ों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े हैं।
पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद
विदेश सचिव ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में बनी नई समझ को भारत सकारात्मक दृष्टि से देखता है। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व नेताओं के साथ हुई चर्चाओं में पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और सुरक्षा की भारत की इच्छा एक बार फिर दोहराई। मिस्री ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि इस क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता लौटेगी।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति, प्रवासी कामगारों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ता है, जिससे यह क्षेत्र भारत की विदेश नीति की प्राथमिकता सूची में हमेशा ऊपर रहता है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर प्रगति
विदेश सचिव मिस्री ने यह भी खुलासा किया कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम मुक्त व्यापार समझौते को लेकर अच्छी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। अगले सप्ताह अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर भारत आएंगे, ताकि इन चर्चाओं को आगे बढ़ाया जा सके।
एवियन में प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में यह व्यापार समझौता एक प्रमुख एजेंडा बिंदु रहा।
जी-7 में भारत की भागीदारी
भारत को इस बार भी साझेदार देश के रूप में 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था। यह जी-7 में भारत की 13वीं भागीदारी थी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह लगातार सातवीं भागीदारी रही। इस मंच पर प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
आगे देखें तो अगले सप्ताह होने वाली ग्रीर की भारत यात्रा और व्यापार वार्ता के नतीजे यह तय करेंगे कि भारत-अमेरिका आर्थिक संबंध किस दिशा में जाते हैं।