SCO शिखर सम्मेलन: PM मोदी ने बिश्केक में लाओस और तजाकिस्तान के राष्ट्रपतियों से की द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 1 सितंबर को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान दो महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं — पहली लाओस के राष्ट्रपति थोंगलोउन सिसोउलिथ से और दूसरी तजाकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन से। दोनों अलग-अलग बैठकों में आपसी संबंधों को और प्रगाढ़ करने के तरीकों पर विस्तृत चर्चा हुई।
द्विपक्षीय बैठकों का ब्यौरा
प्रधानमंत्री मोदी ने लाओस के राष्ट्रपति थोंगलोउन सिसोउलिथ से मुलाकात के बाद एक्स पर लिखा, "बिश्केक में एससीओ समिट के दौरान लाओ पीडीआर के राष्ट्रपति थोंगलोउन सिसोउलिथ से मुलाकात की। हमारी दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने पर अच्छी बातचीत हुई।"
इसी क्रम में तजाकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन से हुई बैठक का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, "तजाकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान के साथ अच्छी बातचीत हुई। भारत विभिन्न क्षेत्रों में ताजिकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए उत्सुक है।"
SCO शिखर सम्मेलन में भारत का संदेश
इन द्विपक्षीय बैठकों से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने SCO राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 26वीं बैठक को संबोधित किया। उन्होंने भारत के उस सुस्थापित रुख को एक बार फिर रेखांकित किया कि सभी विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के ज़रिये होना चाहिए, युद्ध के मैदान पर नहीं।
पश्चिम एशिया के चल रहे संकट का संदर्भ देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "पश्चिम एशिया के संकट ने यह दिखाया है कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव पूरे विश्व की ऊर्जा सुरक्षा, मैरीटाइम ट्रेड और सप्लाई चेन्स पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को भुगतना पड़ता है, इसलिए भारत का आह्वान रहा है कि सभी तनावों और युद्धों का समाधान युद्ध के मैदान पर नहीं, डायलॉग और डिप्लोमेसी से ही संभव है।"
संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने साझा विकास की बात करते हुए स्पष्ट किया कि व्यापार और बाज़ारों को जोड़ने के सभी प्रयासों में सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अनिवार्य है। उन्होंने कहा, "भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है, जो मार्केट्स को जोड़ते हैं, व्यापार को सुगम बनाते हैं, और विकास के नए रास्ते खोलते हैं। किन्तु इन प्रयासों में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान भी अत्यंत आवश्यक है। यही SCO चार्टर की भी मूल भावना है।"
आतंकवाद पर कड़ा रुख
प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को मानवता के समक्ष सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने आतंकी फंडिंग, भर्ती प्रक्रिया, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों के पूरे तंत्र को समूल नष्ट करने की ज़रूरत पर बल दिया। उनका स्पष्ट संदेश था कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मापदंडों की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए — यह बयान SCO के भीतर पाकिस्तान की उपस्थिति के संदर्भ में विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव चरम पर हैं और SCO सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग के नए समीकरण बन रहे हैं। भारत की इस सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी को मध्य एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी साझेदारियों को मज़बूत करने की दिशा में एक सुविचारित कदम के रूप में देखा जा रहा है।