18 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रसुवा बाढ़: नेपाल के वित्त मंत्री वागले ने जयशंकर से मिलकर भारत की राहत सहायता के लिए जताया आभार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रसुवा बाढ़: नेपाल के वित्त मंत्री वागले ने जयशंकर से मिलकर भारत की राहत सहायता के लिए जताया आभार

सारांश

रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने 26 अगस्त से आठ विशेष उड़ानों में 130 टन से अधिक राहत सामग्री और 54 विशेषज्ञ नेपाल भेजे। अब नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले नई दिल्ली पहुँचकर विदेश मंत्री जयशंकर से मिले — यह आभार और भविष्य के सहयोग, दोनों का संकेत है।

मुख्य बातें

नेपाल के वित्त मंत्री डॉ.
स्वर्णिम वागले ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ.
जयशंकर से मुलाकात कर रसुवा बाढ़ राहत में भारत का आभार जताया।
भारत ने 26 अगस्त से अब तक 8 विशेष उड़ानों के ज़रिए 130 टन से अधिक राहत सामग्री नेपाल भेजी।
नेपाल में 54 भारतीय विशेषज्ञ कर्मी बचाव, राहत और फोरेंसिक कार्यों में तैनात हैं।
भारत की विशेष सुरंग बचाव टीम ने नेपाल के चिलिमे और लांगटांग में अभियान शुरू किया।
दोनों मंत्रियों ने निवेश, ऊर्जा और कनेक्टिविटी में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने पर भी चर्चा की।

नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात कर रसुवा में आई अचानक बाढ़ के बाद बचाव और राहत अभियानों में भारत सरकार द्वारा दिए गए समर्थन के लिए औपचारिक आभार व्यक्त किया। भारत में नेपाल दूतावास ने एक्स पर यह जानकारी साझा की।

भारत की राहत कार्रवाई: क्या-क्या भेजा गया

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने 26 अगस्त से अब तक आठ विशेष उड़ानों के ज़रिए नेपाल को 130 टन से अधिक राहत सामग्री, उपकरण और विशेषज्ञ कर्मी उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा बचाव, राहत और फोरेंसिक कार्यों में सहयोग के लिए भारत के 54 विशेषज्ञ कर्मियों को नेपाल में तैनात किया गया है।

राहत सामग्री में अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सौर लैंप और दवाओं के अलावा विशेष वस्तुएँ भी शामिल हैं — जैसे सुरंग एवं कीचड़ बचाव उपकरण, कीचड़ बचाव सूट, गैस डिटेक्टर, श्वास यंत्र, इन्फ्लेटेबल वॉकवे, डीएनए किट, अभिकर्मक, डीएनए प्रोफाइलिंग उपकरण, पोर्टेबल जेनरेटर, प्रकाश टावर और जल निकासी पंप।

सुरंग बचाव अभियान

भारत की विशेष सुरंग बचाव टीम ने नेपाली सेना के समन्वय से नेपाल के दो स्थलों — चिलिमे और लांगटांग — पर अपना अभियान शुरू किया है। यह ऐसे समय में आया है जब रसुवा क्षेत्र में भारी तबाही के बाद लापता लोगों की तलाश अभी भी जारी है।

पिछले सप्ताह भारतीय वायु सेना की आठवीं उड़ान काठमांडू पहुँची, और राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महावीर पुन को सौंपी गई। भारत में नेपाल के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने एक्स पर यह जानकारी दी।

द्विपक्षीय संबंध और आगे की बातचीत

डॉ. वागले और डॉ. जयशंकर के बीच हुई बैठक में राहत सहयोग के अलावा नेपाल-भारत की दीर्घकालिक मित्रता को और गहरा करने पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से निवेश, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढाँचे से जुड़ी कई परियोजनाएँ पहले से प्रगति पर हैं, और इस बैठक को उस रिश्ते की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।

विदेश मंत्रालय का रुख

विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि भारत विनाशकारी बाढ़ के मद्देनजर चल रहे बचाव और राहत कार्यों में नेपाल को मानवीय सहायता प्रदान करना जारी रखेगा। मंत्रालय ने पुष्टि की कि यह सहायता दोनों देशों के बीच मज़बूत पड़ोसी संबंधों की परंपरा के अनुरूप है।

यह सहायता अभियान भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का व्यावहारिक प्रदर्शन माना जा रहा है, जो क्षेत्रीय आपदाओं में त्वरित प्रतिक्रिया को प्राथमिकता देती है। आने वाले दिनों में राहत अभियान के और विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

130 टन सामग्री, 54 विशेषज्ञ — को केवल मानवीय सहायता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए; यह 'नेबरहुड फर्स्ट' कूटनीति का सुविचारित प्रयोग है, जो नेपाल के साथ संबंधों में आई कुछ तनातनी के बाद और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है। वागले की दिल्ली यात्रा का समय — बाढ़ राहत के साथ-साथ निवेश और ऊर्जा पर बातचीत — बताता है कि नेपाल इस संकट को भी द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक बुनावट में पिरोना चाहता है। सुरंग बचाव जैसी विशेष क्षमता का प्रदर्शन भारत को क्षेत्र में एक अपरिहार्य भागीदार के रूप में स्थापित करता है — एक भूमिका जो लंबे समय में रणनीतिक लाभांश दे सकती है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रसुवा बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल को क्या-क्या सहायता दी?
भारत ने 26 अगस्त 2026 से 8 विशेष उड़ानों के ज़रिए 130 टन से अधिक राहत सामग्री नेपाल भेजी। इसमें कंबल, दवाएँ, सुरंग बचाव उपकरण, डीएनए किट, पोर्टेबल जेनरेटर और 54 विशेषज्ञ कर्मी शामिल हैं।
नेपाल के वित्त मंत्री वागले और जयशंकर की बैठक में क्या हुआ?
18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में डॉ. वागले ने रसुवा बाढ़ राहत में भारत के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही दोनों मंत्रियों ने निवेश, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा की।
भारत की सुरंग बचाव टीम नेपाल में कहाँ काम कर रही है?
भारत की विशेष सुरंग बचाव टीम नेपाल के चिलिमे और लांगटांग में नेपाली सेना के समन्वय से अपना अभियान चला रही है। ये वे क्षेत्र हैं जो रसुवा में आई अचानक बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
रसुवा में अचानक बाढ़ के बाद भारत की पहली प्रतिक्रिया कब आई?
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत ने 26 अगस्त 2026 से राहत उड़ानें शुरू कीं। 18 सितंबर तक कुल 8 उड़ानें नेपाल पहुँच चुकी थीं, जो इस अभियान की तीव्र और निरंतर प्रकृति को दर्शाती हैं।
भारत-नेपाल के बीच इस सहायता का द्विपक्षीय संबंधों पर क्या असर होगा?
वागले-जयशंकर बैठक में राहत के साथ-साथ निवेश, ऊर्जा और कनेक्टिविटी पर भी बातचीत हुई, जो संकेत देती है कि दोनों देश इस सहयोग को व्यापक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं। भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत यह सहायता द्विपक्षीय विश्वास को मज़बूत करने का अवसर बन रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 3 सप्ताह पहले