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नेपाल बाढ़ में 781 मौतें, 2,502 लापता: आपदा प्रमुख ने बताया 'मेगा आपदा', भारत-चीन कर रहे सहयोग

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नेपाल बाढ़ में 781 मौतें, 2,502 लापता: आपदा प्रमुख ने बताया 'मेगा आपदा', भारत-चीन कर रहे सहयोग

सारांश

नेपाल की बाढ़ महज़ प्राकृतिक आपदा नहीं — यह एक ढहती अवसंरचना और टूटी चेतावनी प्रणाली की कहानी भी है। 781 मौतें, 2,502 लापता और 9,500 घर तबाह। आपदा प्रमुख ने इसे 'मेगा आपदा' कहा; भारत और चीन दोनों बचाव में जुटे हैं।

मुख्य बातें

नेपाल बाढ़ में 30 अगस्त तक 781 लोगों की मौत, 2,502 अभी भी लापता।
8,730 लोगों को बचाया गया; 19,895 सुरक्षाकर्मी बचाव अभियान में तैनात।
छह सुरंगों में लोगों के फंसे होने की आशंका, निकासी जारी।
भारत के सुरंग विशेषज्ञ मौके पर तैनात; चीन नियमित रूप से जानकारी साझा कर रहा है।
लगभग 9,500 घर क्षतिग्रस्त; सड़क, पुल, स्वास्थ्य और सिंचाई ढाँचा तबाह।
धर्मराज उप्रेती ने इसे 'कैस्केडिंग, यौगिक और मेगा आपदा' बताया।

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने 30 अगस्त तक 781 लोगों की जान ले ली है और 2,502 लोग अभी भी लापता हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के प्रमुख डॉ. धर्मराज उप्रेती ने इसे एक 'कैस्केडिंग, यौगिक और मेगा आपदा' करार दिया है। अब तक 8,730 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, जबकि 19,895 सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव अभियान में तैनात हैं।

मुख्य घटनाक्रम

डॉ. उप्रेती ने बताया कि छह सुरंगों में लोगों के फंसे होने की गंभीर आशंका है और उन्हें निकालने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा, 'सुरंगों से लोगों को बचाया जा रहा है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि और लोगों को बचाया जाएगा।' इस आपदा में लगभग 9,500 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। सड़कें, पुल, स्वास्थ्य सुविधाएँ, जल आपूर्ति और सिंचाई ढाँचा — सभी बुरी तरह तबाह हो गए हैं।

बाढ़ की अगली लहर का खतरा और अलर्ट प्रणाली

डॉ. उप्रेती ने स्वीकार किया कि अपस्ट्रीम क्षेत्र में अवलोकन अवसंरचना पूरी तरह नष्ट हो जाने से स्थिति और जटिल हो गई। उन्होंने बताया, 'केवल एक नदी प्रवाह स्टेशन था, जो पूरी तरह ढह गया। लगभग 150 किलोमीटर नीचे एक और स्टेशन है।' बाढ़ की दूसरी लहर की आशंका को देखते हुए प्राधिकरण ने जोखिम-ग्रस्त समुदायों को एसएमएस अलर्ट भेजे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को अपस्ट्रीम, मिड-स्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम और निचले क्षेत्र — चार अलग-अलग बहुभुजों में विभाजित कर अलर्ट जारी किए गए।

भारत और चीन का सहयोग

भारत ने पहले ही सुरंग विशेषज्ञ नेपाल में तैनात कर दिए हैं, जो नेपाली सुरक्षा बलों के साथ मिलकर बचाव कार्य में जुटे हैं। डॉ. उप्रेती ने बताया कि नेपाल भारतीय दूतावास के माध्यम से निरंतर संपर्क में है। उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र से सटे होने के कारण चीन भी नियमित रूप से जानकारी साझा कर रहा है। उन्होंने कहा, 'आज सुबह भी हमें चीन से जानकारी मिली।'

आम जनता और पर्यटन पर असर

डॉ. उप्रेती ने इस त्रासदी को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि गहरे सांस्कृतिक और सामाजिक नुकसान के रूप में भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'लोगों ने बुनियादी ढाँचा खोया, बस्तियाँ खोईं, परिवार खोए और सांस्कृतिक मूल्य भी खो दिए। यह पर्यटन हॉटस्पॉट है, तो सब कुछ खो गया।' उनके अनुसार, आर्थिक और गैर-आर्थिक दोनों नुकसानों को जोड़ा जाए तो वास्तविक क्षति तीन से दस गुना तक हो सकती है।

आगे की राह

बचाव अभियान अभी भी जारी है और सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने की कोशिशें रुकी नहीं हैं। प्राधिकरण ने कहा कि क्षतिग्रस्त अवलोकन प्रणालियों के पुनर्निर्माण और बेहतर प्रारंभिक चेतावनी तंत्र की तत्काल आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस स्तर की तबाही से बचा जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस त्रासदी की असली जड़ उजागर करता है — यह केवल बाढ़ की नहीं, बल्कि दशकों की उपेक्षित आपदा-तैयारी की भी विफलता है। नेपाल जैसे भूगोल में, जहाँ हिमालयी नदियाँ अचानक उफान लेती हैं, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली जीवन-रेखा होती है — और वह यहाँ अनुपस्थित थी। भारत और चीन दोनों का एक साथ सहयोग करना कूटनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय है, लेकिन यह सहयोग तब आया जब नुकसान अपूरणीय हो चुका था। असली सवाल यह है कि 9,500 घरों और पर्यटन अवसंरचना के पुनर्निर्माण की ज़िम्मेदारी कौन उठाएगा — और क्या इस बार चेतावनी प्रणाली को भी उतनी ही प्राथमिकता मिलेगी।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
30 अगस्त तक नेपाल बाढ़ में 781 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 2,502 लोग अभी भी लापता हैं। आपदा प्राधिकरण प्रमुख डॉ. धर्मराज उप्रेती ने यह जानकारी दी।
नेपाल में बचाव अभियान की स्थिति क्या है?
अब तक 8,730 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है और 19,895 सुरक्षाकर्मी बचाव अभियान में तैनात हैं। छह सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने का काम युद्धस्तर पर जारी है।
नेपाल बाढ़ में भारत किस तरह मदद कर रहा है?
भारत ने सुरंग विशेषज्ञ नेपाल में तैनात किए हैं जो नेपाली सुरक्षा बलों के साथ मिलकर बचाव कार्य में जुटे हैं। नेपाल भारतीय दूतावास के माध्यम से निरंतर संपर्क में है और ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता माँगी जा सकती है।
नेपाल बाढ़ से बुनियादी ढाँचे को कितना नुकसान हुआ है?
आपदा प्राधिकरण के अनुसार लगभग 9,500 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। सड़कें, पुल, स्वास्थ्य सुविधाएँ, जल आपूर्ति और सिंचाई ढाँचा सभी तबाह हो गए हैं। डॉ. उप्रेती ने कहा कि आर्थिक और गैर-आर्थिक नुकसान मिलाकर वास्तविक क्षति तीन से दस गुना तक हो सकती है।
नेपाल में बाढ़ की चेतावनी प्रणाली क्यों विफल रही?
डॉ. उप्रेती ने बताया कि अपस्ट्रीम क्षेत्र का एकमात्र नदी प्रवाह स्टेशन पूरी तरह ध्वस्त हो गया, जिससे समय पर चेतावनी देना मुश्किल हो गया। अगला स्टेशन लगभग 150 किलोमीटर नीचे है, जिससे अपस्ट्रीम खतरों की निगरानी में गंभीर अंतराल बना रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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