शिशिर खनल की भारत यात्रा के बाद 14 जून को बीजिंग रवानगी, वांग यी से होगी अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल भारत की तीन दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद 14 जून 2026 को बीजिंग रवाना होंगे, जहाँ वे अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात करेंगे। स्थानीय मीडिया पोर्टल 'ऑनलाइन खबर' ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है, हालाँकि नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
दौरे का कार्यक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, खनल 14 जून को बीजिंग पहुँचेंगे और आधिकारिक बैठकें 15-16 जून को प्रस्तावित हैं। इस दौरान वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ-साथ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन के अंतरराष्ट्रीय विभाग के प्रमुख ल्यू हाइशिंग से भी वार्ता कर सकते हैं। खनल चीन में बसे नेपाली प्रवासियों से भी मिलेंगे और 17 जून को स्वदेश लौटेंगे।
गौरतलब है कि यह यात्रा बतौर विदेश मंत्री खनल की पहली भारत-यात्रा के ठीक बाद हो रही है, जिसमें दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल पेमेंट सिस्टम समेत कई मुद्दों पर सहमति बनी।
बीजिंग की नज़र में यात्रा का महत्व
चीन में नेपाल के पूर्व राजदूत बिष्णु पुकार श्रेष्ठ ने कहा, 'ऐसे समय में जब चीन यह जानना चाहता है कि नई सरकार चीन से जुड़े मुद्दों को किस तरह देखती है, विदेश मंत्री खनल की यात्रा बीजिंग के लिए यह समझने में महत्वपूर्ण होगी कि नई सरकार चीन के मूल हितों पर क्या रुख रखती है।'
श्रेष्ठ ने आगे कहा कि तिब्बत और ताइवान चीन की दो प्रमुख सुरक्षा चिंताएँ हैं और चीन नेपाल की किसी भी ऐसी सरकार के साथ काम करेगा जो 'वन चाइना' नीति का समर्थन करती हो। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चीन चाहता है कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत चिन्हित परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज़ी से हो, क्योंकि अब तक इन परियोजनाओं पर बहुत कम प्रगति हुई है।
श्रेष्ठ ने तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ज़ोर दिया — 'कनेक्टिविटी, कम्युनिकेशन और क्लाइमेट' — जिनमें चीन का सहयोग नेपाल के लिए अहम है।
नेपाल की 'संतुलित कूटनीति'
भारत और चीन के बीच भूगोल की दृष्टि से स्थित नेपाल दोनों ही पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने की नीति पर चलता है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि नेपाल अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर अडिग है।
वित्त वर्ष 2026–27 के वार्षिक बजट में नेपाल सरकार ने कहा है कि वह 'पारस्परिक लाभ, राष्ट्रीय गरिमा और संप्रभु हितों के आधार पर संतुलित विदेश संबंधों को मजबूत करेगी तथा आर्थिक समृद्धि के लिए सॉफ्ट पावर का उपयोग करेगी।' इससे पहले 'राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पत्र' के मसौदे में भी सरकार ने 'समान दूरी और समान निकटता' की नीति का उल्लेख किया था।
भारत-नेपाल संबंधों की पृष्ठभूमि
नेपाल और भारत के बीच साझा भौगोलिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध हैं — दोनों देशों में हिंदू बहुसंख्यक आबादी है। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल की नई सरकार त्रिपक्षीय आर्थिक साझेदारियों और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देकर खुद को वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र, तटस्थ और गुटनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
खनल की बीजिंग यात्रा यह तय करेगी कि नई काठमांडू सरकार भारत-चीन प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी कूटनीतिक संतुलन-कला को किस दिशा में ले जाती है।