नेतन्याहू का दावा: 20 परमाणु वैज्ञानिकों की मौत के बाद ईरान के लिए परमाणु हथियार बनाना हुआ मुश्किल
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 22 जून 2026 को दावा किया कि अमेरिका के सहयोग से किए गए सैन्य अभियानों में 20 प्रमुख ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की मौत के बाद ईरान के लिए परमाणु हथियार विकसित करना अब अत्यंत कठिन हो गया है। यरूशलम में आयोजित जेएनएस इंटरनेशनल पॉलिसी समिट 2026 में दिए गए अपने संबोधन में नेतन्याहू ने यह भी स्पष्ट किया कि दक्षिणी लेबनान में स्थापित सुरक्षा बफर जोन में इजरायली सेना तब तक बनी रहेगी, जब तक इसे सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक समझा जाएगा।
दो सैन्य अभियानों में मारे गए 20 वैज्ञानिक
नेतन्याहू के अनुसार, इजरायल ने ईरान के 20 प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया। उन्होंने बताया कि इनमें से 12 वैज्ञानिक 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' के दौरान और 8 वैज्ञानिक 'ऑपरेशन रोअरिंग लायन' के दौरान मारे गए। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि किसी भी देश के प्रमुख वैज्ञानिकों को खो देने के बाद परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ाना बेहद कठिन हो जाता है।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के साथ मिलकर इजरायल ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा हवाई हमला अंजाम दिया, जिसने ईरान के परमाणु ढाँचे को गंभीर नुकसान पहुँचाया और उसके परमाणु कार्यक्रम को पीछे धकेल दिया। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कूटनीतिक दबाव बनाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं।
भाई की स्मृति में लिया संकल्प
समिट से पहले नेतन्याहू अपने दिवंगत भाई के स्मृति समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा, 'पचास वर्ष पहले मैंने अपने बड़े भाई, इजरायल के हीरो लेफ्टिनेंट कर्नल योनी नेतन्याहू को खो दिया था। आज स्मृति समारोह में मैंने यह संकल्प लिया कि मैं ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दूंगा।' इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोमवार को उनका यह वीडियो जारी किया।
गौरतलब है कि नेतन्याहू ने समिट में ईरान को 'तबाह और बर्बाद' करने तक की बात कही — एक ऐसी भाषा जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर असाधारण मानी जाती है।
दक्षिणी लेबनान में बफर जोन पर इजरायल का रुख
नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायल द्वारा स्थापित बफर जोन दक्षिणी लेबनान के लगभग 602 वर्ग किलोमीटर (230 वर्ग मील) क्षेत्र में फैला है, जो लेबनान के कुल भू-भाग का करीब 6% हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में इजरायली सैन्य उपस्थिति का उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित खतरों को रोकना है।
इजरायली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र से हटने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है और निर्णय पूरी तरह सुरक्षा स्थिति के आकलन पर निर्भर करेगा।
इजरायल-अमेरिका संबंध और संप्रभुता का संदेश
अपने भाषण में नेतन्याहू ने अमेरिका और इजरायल दोनों को 'आज़ाद और संप्रभु राष्ट्र' बताते हुए कहा, 'हमें अपने हितों का ख्याल है और मैं यहाँ स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरे लिए इजरायल का हित सर्वोपरि है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब इजरायल-अमेरिका संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित है।
आने वाले दिनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की स्थिति और दक्षिणी लेबनान में इजरायली उपस्थिति पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक घटनाक्रम पर नज़र रहेगी।