उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइल पर क्लस्टर बम वारहेड का परीक्षण किया, 12-13 हेक्टेयर तबाही की क्षमता
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया के मिसाइल विभाग ने शनिवार, 1 नवंबर 2026 को सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों पर तैनात किए जाने वाले क्लस्टर बम वारहेड का सफल परीक्षण करने का दावा किया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, यह हथियार एक ही प्रहार में 12 से 13 हेक्टेयर — यानी लगभग 30 से 32 एकड़ — क्षेत्र को नष्ट करने में सक्षम है। किम जोंग-उन के नेतृत्व वाली प्योंगयांग सरकार ने संकेत दिया है कि इस वर्ष के अंत तक इन वारहेड को सैन्य इकाइयों में शामिल कर लिया जाएगा।
परीक्षण का विवरण
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के हवाले से बताया गया कि इस परीक्षण की निगरानी सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की केंद्रीय समिति के प्रथम उपविभाग निदेशक और केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य जनरल किम जोंग-सिक ने की। मिसाइल विभाग के अनुसंधान संस्थानों ने दावा किया कि स्टैंडर्ड टाइप-2 क्लस्टर वारहेड अधिकतम घनत्व के साथ 12 से 13 हेक्टेयर क्षेत्र को तबाह कर सकता है, हालाँकि इस दावे का स्वतंत्र सत्यापन अभी उपलब्ध नहीं है।
महानिदेशक के अनुसार, क्लस्टर वारहेड को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है — जिनमें विशेष उद्देश्य और सामान्य इस्तेमाल के प्रकार शामिल हैं। इस वर्ष के अंत तक सभी श्रेणियों को सैन्य इकाइयों को उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है।
क्लस्टर बम क्यों हैं विशेष चिंता का विषय
क्लस्टर बम सामान्य विस्फोटकों से भिन्न होते हैं। एक मुख्य वारहेड के भीतर दर्जनों से सैकड़ों छोटे सबम्यूनिशन भरे होते हैं, जो हवा में बिखरकर विशाल क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर विस्फोट करते हैं। इससे एक ही प्रक्षेपण में कई सैन्य वाहनों, ठिकानों और सैनिकों को एक साथ निशाना बनाया जा सकता है।
गौरतलब है कि इन हथियारों के कुछ सबम्यूनिशन तत्काल नहीं फटते और जमीन पर बिना विस्फोट हुए पड़े रह जाते हैं, जो बाद में आम नागरिकों — विशेषकर बच्चों और किसानों — के लिए बारूदी सुरंगों की तरह जानलेवा बन जाते हैं। इसी कारण 2008 की अंतरराष्ट्रीय क्लस्टर म्यूनिशन संधि के तहत ऐसे हथियारों के उपयोग, उत्पादन और हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाया गया। हालाँकि उत्तर कोरिया, अमेरिका, रूस, चीन और दक्षिण कोरिया समेत कई प्रमुख सैन्य शक्तियाँ इस संधि का हिस्सा नहीं हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब 29 अक्टूबर को उत्तर कोरिया ने अपने पूर्वी तट से समुद्र की दिशा में करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं — उस समय जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज दक्षिण कोरिया दौरे पर थे। इससे पहले अप्रैल 2026 में भी उत्तर कोरिया ने ह्वासोंग-11 रा सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल पर क्लस्टर बम और फ्रैगमेंटेशन माइन वारहेड का परीक्षण किया था, जिसकी निगरानी किम जोंग-उन ने स्वयं की थी।
दक्षिण कोरिया की सुरक्षा एजेंसियों के लिए ह्वासोंग-11 रा जैसे कम दूरी के सामरिक मिसाइल सिस्टम विशेष चिंता का विषय हैं, क्योंकि इन्हें सीधे दक्षिण कोरियाई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। अप्रैल के परीक्षण में इन मिसाइलों ने कथित तौर पर 136 किलोमीटर दूर के लक्ष्य क्षेत्र को भेदा था।
रूस से सैन्य सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को रूस के साथ उसके गहरे होते रक्षा सहयोग से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यूक्रेन युद्ध में रूस की ओर से उत्तर कोरियाई सैनिकों की तैनाती और आधुनिक युद्ध के उस अनुभव ने प्योंगयांग की सैन्य क्षमताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
इसी बीच अटलांटा में हुई त्रिपक्षीय वार्ता में दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के शीर्ष राजनयिकों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की माँग दोहराई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किम जोंग-उन के साथ बातचीत को तैयार हैं, बशर्ते प्योंगयांग उन मुद्दों पर चर्चा के लिए राजी हो जो वाशिंगटन और उसके सहयोगियों के लिए चिंता का विषय हैं — हालाँकि अभी कोई बैठक निर्धारित नहीं हुई है।
यह परीक्षण स्पष्ट करता है कि प्योंगयांग कूटनीतिक संकेतों की परवाह किए बिना अपनी सैन्य तैयारी की रफ्तार बनाए हुए है।