अजित डोभाल की रियाद यात्रा: सऊदी अरब के साथ सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग पर अहम बैठकें
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल 21 जुलाई को उच्चस्तरीय कूटनीतिक वार्ता के लिए सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुँचे। मध्य-पूर्व में तेज़ी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मज़बूत करना और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करना है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स प्लेटफॉर्म पर इस दौरे की जानकारी साझा की।
स्वागत और प्रमुख बैठकें
रियाद पहुँचने पर डोभाल का स्वागत सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय में राजनीतिक मामलों के उपमंत्री डॉ. सऊद अल-साती और भारत में सऊदी अरब के राजदूत डॉ. सुहैल खान ने किया। दूतावास द्वारा साझा की गई तस्वीरों में यह स्वागत-समारोह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
दौरे के दौरान डोभाल ने तीन वरिष्ठ सऊदी अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात की — ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान, और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मुसाएद अल-अइबान। इन बैठकों में भारत-सऊदी रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और साझे हितों पर विस्तृत चर्चा हुई।
ऊर्जा सुरक्षा: यात्रा की केंद्रीय चिंता
यह यात्रा ऐसे नाज़ुक समय में हो रही है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष और एक कमज़ोर संघर्ष-विराम के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ा है। भारतीय दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सऊदी अरब भारत को कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और भारत की कुल तेल ज़रूरत का लगभग 14% वहीं से पूरा होता है।
विश्व के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों और आपूर्ति पर पड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव ने समुद्री गलियारों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ खड़ी कर दी हैं।
सुरक्षा सहयोग और आतंकवाद-रोधी समन्वय
बैठकों में सुरक्षा सहयोग को भी प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्षों ने आतंकवाद-रोधी समन्वय और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। गौरतलब है कि भारत और सऊदी अरब दोनों ही कट्टरपंथी नेटवर्कों से उत्पन्न खतरों का सामना कर रहे हैं, और यह साझा चिंता दोनों देशों के सुरक्षा सहयोग की बुनियाद रही है।
रणनीतिक साझेदारी का व्यापक संदर्भ
भारतीय दूतावास के अनुसार, इस यात्रा को भारत-सऊदी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा सुरक्षा, ऊर्जा एवं क्षेत्रीय सहयोग के नए आयाम तलाशने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देश पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री गलियारों और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
आने वाले समय में इस यात्रा के ठोस परिणाम — चाहे वे ऊर्जा समझौतों के रूप में हों या सुरक्षा प्रोटोकॉल के रूप में — भारत की खाड़ी नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।