पेजेश्कियन ने इस्तीफे की अटकलों को नकारा, मोजतबा की चेतावनी के बाद बोले — पद नहीं छोड़ूंगा
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने मंगलवार, 4 अगस्त को स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगे और अपने पद पर बने रहेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया जब तेहरान में सत्ता के गलियारों में उनके इस्तीफे को लेकर जोरदार अटकलें चल रही थीं और सुप्रीम लीडर के करीबी एक वरिष्ठ मौलवी ने सार्वजनिक रूप से उन्हें चेतावनी दे दी थी।
क्या बोले राष्ट्रपति पेजेश्कियन
पेजेश्कियन ने कहा, 'हम सैन्य बलों के साथ पूरी तरह समन्वय में हैं। मैं इस्तीफा नहीं दूंगा और अपनी बात पर अडिग रहूंगा। अगर कभी इस्तीफा दिया, तो आधिकारिक रूप से घोषणा करूंगा।' उनका यह वक्तव्य ईरान के राजनीतिक हलकों में तेजी से फैली उन खबरों के जवाब में आया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि वह कई बार पद छोड़ने की धमकी दे चुके हैं।
मोहम्मद-बाघेर खर्राजी की चेतावनी
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्टों के अनुसार, वरिष्ठ मौलवी मोहम्मद-बाघेर खर्राजी — जिनकी बहन की शादी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के भाई से हुई है — ने दावा किया कि पेजेश्कियन 28 बार इस्तीफे की धमकी दे चुके हैं। खर्राजी ने मोजतबा खामेनेई के हवाले से कहा, 'अगर वह एक बार और इस्तीफा देते हैं, तो मैं इसे मंजूरी दे दूंगा — नीचे 'मंजूर' लिख दूंगा और बात खत्म।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'पेजेश्कियन में अब हिम्मत नहीं है, वे सब पीछे हट गए।'
राष्ट्रपति कार्यालय का खंडन
पेजेश्कियन के कार्यालय में संचार एवं सूचना विभाग के उप-प्रमुख मेहदी तबताबाई ने खर्राजी के आरोपों को 'निराधार और सरासर झूठ' बताते हुए खारिज कर दिया। हालांकि, इस खंडन के बावजूद ईरान के भीतर राजनीतिक तनाव की तस्वीर धुंधली नहीं हुई है।
मई का इस्तीफा प्रसंग
रिपोर्टों के अनुसार, मई में पेजेश्कियन ने खामेनेई के कार्यालय को एक इस्तीफा भेजा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी सरकार को बड़े नीतिगत फैसलों से बाहर रखा जा रहा है और कट्टरपंथी तत्वों ने शासन पर नियंत्रण कर लिया है। उस समय ईरानी अधिकारियों ने इस्तीफे से जुड़े किसी भी दावे को नकार दिया था। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम ऐसे दौर में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है और ईरानी शासन के भीतर सुधारवादी और कट्टरपंथी धड़ों के बीच खींचतान की खबरें लगातार आ रही हैं।
आगे क्या होगा
पेजेश्कियन का यह सार्वजनिक बयान फिलहाल इस्तीफे की अटकलों पर विराम लगाता दिखता है, लेकिन ईरान के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति और सर्वोच्च नेतृत्व के बीच का तनाव संरचनात्मक है और यह निकट भविष्य में फिर उभर सकता है। ईरान की राजनीतिक स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय नजरें बनी हुई हैं।