भारत-यूके सीईटीए बिजनेस मैनुअल लॉन्च: पीयूष गोयल ने लंदन में किया विमोचन, 15 जुलाई से लागू होगा समझौता
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के लिए एक व्यावहारिक बिजनेस उपयोग मैनुअल का विमोचन किया। इस मैनुअल का उद्देश्य दोनों देशों के कारोबारियों को 15 जुलाई से प्रभावी होने वाले इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते के प्रावधानों को समझने और उनका अधिकतम व्यावसायिक लाभ उठाने में सक्षम बनाना है।
मैनुअल का स्वरूप और तैयारी
'यूके-इंडिया सीईटीए बिजनेस यूटिलाइजेशन मैनुअल — भारतीय और ब्रिटिश कारोबारियों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका' को यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूकेआईबीसी) और एचएसबीसी इंडिया ने संयुक्त रूप से तैयार किया है। इस दस्तावेज़ को एक लिविंग डॉक्यूमेंट के रूप में विकसित किया गया है, जिसे समय-समय पर अद्यतन किया जाएगा, ताकि कंपनियाँ सीईटीए के तहत उभरते अवसरों के साथ कदमताल कर सकें।
इसका विमोचन भारतीय उद्योग परिसंघ (फिक्की) द्वारा आयोजित और यूकेआईबीसी के सहयोग से संचालित एक दो दिवसीय कार्यक्रम में हुआ, जिसमें भारत और ब्रिटेन के कई वरिष्ठ उद्योगपति एवं कारोबारी नेता उपस्थित रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के ग्रुप सीईओ डॉ. किशोर जयरामन ने कहा कि भारत-यूके सीईटीए दोनों देशों की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारियों में से एक में एक नया अध्याय है। उनके अनुसार, यह मैनुअल अपनी तरह का पहला व्यावहारिक बिजनेस उपयोग गाइड है जो एक जटिल व्यापार समझौते को कारोबारियों के लिए सुगम रोडमैप में रूपांतरित करता है। जयरामन ने कहा, 'यूकेआईबीसी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों देशों के कारोबारी केवल इस समझौते को समझें ही नहीं, बल्कि इसका पूरा लाभ भी उठा सकें।'
एचएसबीसी इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हितेंद्र दवे ने कहा कि यह व्यापार समझौता कारोबारियों को अधिक निश्चितता, बेहतर बाजार पहुँच और मजबूत व्यावसायिक सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने कंपनियों से आग्रह किया कि वे इस मैनुअल को सीमा पार व्यापार और निवेश बढ़ाने की दिशा में पहले कदम के रूप में उपयोग करें।
द्विपक्षीय व्यापार की स्थिति
आँकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 2025 की चौथी तिमाही तक के चार तिमाहियों में दोनों देशों का कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 47.9 अरब पाउंड (करीब 56 से 60 अरब डॉलर) तक पहुँच गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के आर्थिक संबंध नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं।
आम जनता और कारोबारियों पर असर
15 जुलाई से सीईटीए के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुँच सुगम होगी, व्यापारिक बाधाएँ घटेंगी और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी। गौरतलब है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों, सेवा प्रदाताओं और निवेशकों के लिए ब्रिटिश बाजार में प्रवेश की राह आसान करेगा।
आगे क्या
मैनुअल को लिविंग डॉक्यूमेंट के रूप में रखे जाने का निर्णय संकेत देता है कि जैसे-जैसे सीईटीए के क्रियान्वयन में नई परिस्थितियाँ उभरेंगी, इसे अद्यतन किया जाता रहेगा। कारोबारी जगत की नज़र अब 15 जुलाई की प्रभावी तिथि पर है, जब समझौते के प्रावधान व्यवहार में उतरेंगे।