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पद्म श्री रॉबर्ट थर्मन के निधन पर PM मोदी का शोक — 'भारत के आजीवन मित्र थे'

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पद्म श्री रॉबर्ट थर्मन के निधन पर PM मोदी का शोक — 'भारत के आजीवन मित्र थे'

सारांश

पद्म श्री से सम्मानित और दलाई लामा के मित्र प्रोफेसर रॉबर्ट थर्मन का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। PM मोदी ने उन्हें 'भारत का आजीवन मित्र' बताया और 2023 की न्यूयॉर्क मुलाकात को याद किया — जब दोनों ने बौद्ध मूल्यों और वैश्विक चुनौतियों पर संवाद किया था।

मुख्य बातें

प्रख्यात बौद्ध विद्वान प्रोफेसर रॉबर्ट ए.
थर्मन का 16 जून को वुडस्टॉक, न्यूयॉर्क में 84 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
PM नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर उन्हें 'भारत का आजीवन मित्र' और बौद्ध विचारों का वैश्विक दूत बताया।
प्रोफेसर थर्मन कोलंबिया विश्वविद्यालय में इंडो-तिब्बती बौद्ध स्टडीज के जे त्सोंग खापा प्रोफेसर और तिब्बत हाउस यूएस के सह-संस्थापक थे।
भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया था; वे दलाई लामा के दीर्घकालिक मित्र थे।
मोदी और थर्मन की आखिरी मुलाकात 21 जून 2023 को न्यूयॉर्क में हुई थी, जहाँ बौद्ध मूल्यों और वैश्विक समस्याओं पर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जून 2026 को पद्म श्री से सम्मानित प्रख्यात बौद्ध विद्वान प्रोफेसर रॉबर्ट ए. एफ. थर्मन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने थर्मन को बौद्ध धर्म का असाधारण ज्ञाता, एक समर्पित शिक्षक और भारत का आजीवन मित्र बताया। तिब्बत हाउस यूएस ने बुधवार को सूचित किया कि प्रोफेसर थर्मन का 16 जून की सुबह वुडस्टॉक, न्यूयॉर्क में 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

PM मोदी की श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी भावनाएँ साझा करते हुए लिखा, 'अपने कार्यों से, थर्मन ने बौद्ध विचारों को दुनिया भर में मशहूर किया और दुनिया भर की अलग-अलग संस्कृतियों के बीच समझ और संवाद के मजबूत सेतु भी स्थापित किए।' उन्होंने 21 जून 2023 को न्यूयॉर्क में हुई अपनी मुलाकात को याद करते हुए कहा कि उस भेंट में दोनों के बीच बहुत सार्थक वार्तालाप हुई थी। मोदी ने थर्मन के परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदनाएँ प्रकट कीं।

प्रोफेसर थर्मन: एक परिचय

प्रोफेसर थर्मन कोलंबिया विश्वविद्यालय के धर्म विभाग में इंडो-तिब्बती बौद्ध अध्ययन के जे त्सोंग खापा प्रोफेसर थे। वे तिब्बत हाउस यूएस और अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने तिब्बती काग्यूर से विमलकीर्ति सूत्र का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया और तिब्बती बौद्ध धर्म पर अनेक पुस्तकें लिखीं, संपादित कीं एवं अनुवाद किया। वे अभिनेत्री उमा थर्मन के पिता भी थे।

भारत से विशेष जुड़ाव

प्रोफेसर थर्मन को भारत सरकार ने पद्म श्री से नवाज़ा था — यह देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक है। वे तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के दीर्घकालिक मित्र थे। 21 जून 2023 को न्यूयॉर्क में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बैठक में दोनों ने इस विषय पर विचार-विमर्श किया कि बौद्ध मूल्य वैश्विक चुनौतियों के समाधान में किस प्रकार मार्गदर्शन कर सकते हैं। भारत सरकार के बयान के अनुसार, उस मुलाकात में भारत के बौद्ध जुड़ाव और बौद्ध विरासत के संरक्षण पर भी चर्चा हुई।

राजनयिक और शैक्षणिक जगत की प्रतिक्रिया

न्यूयॉर्क में भारत के कॉन्सुलेट जनरल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रोफेसर थर्मन के इंडो-तिब्बती बौद्ध अध्ययन के प्रति जीवन भर के समर्पण ने भगवान बुद्ध के कालजयी ज्ञान को विश्वभर की पीढ़ियों तक पहुँचाया और भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत की गहरी समझ को विस्तार दिया। कॉन्सुलेट ने नेना थर्मन और उनके शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA), जिसका मुख्यालय हिमाचल प्रदेश में है, ने भी उनके अकादमिक योगदान को रेखांकित किया।

विरासत और सम्मान

प्रोफेसर थर्मन को 1997 में अमेरिका के 25 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में स्थान मिला था। 2006 में न्यूयॉर्क मैगज़ीन ने उन्हें धर्म के क्षेत्र में 'प्रभावशाली व्यक्तित्वों' में गिना। तिब्बत हाउस यूएस ने अपने शोक संदेश में कहा कि उनकी शिक्षाओं ने अनगिनत जीवनों को आकार दिया। उनके निधन के साथ, इंडो-तिब्बती बौद्ध अध्ययन की दुनिया ने अपना एक असाधारण स्तंभ खो दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वह राजनयिक स्तर पर भी भारत की आध्यात्मिक विरासत के प्रवक्ता थे। गौरतलब है कि ऐसे समय में जब तिब्बत और बौद्ध विरासत के मुद्दे भू-राजनीतिक संवेदनशीलता के केंद्र में हैं, थर्मन जैसे स्वतंत्र विद्वानों की भूमिका और भी अपरिहार्य हो जाती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रोफेसर रॉबर्ट थर्मन कौन थे?
प्रोफेसर रॉबर्ट ए. एफ. थर्मन तिब्बती बौद्ध धर्म के विश्वप्रसिद्ध अमेरिकी विद्वान थे, जो कोलंबिया विश्वविद्यालय में इंडो-तिब्बती बौद्ध स्टडीज के जे त्सोंग खापा प्रोफेसर थे। वे तिब्बत हाउस यूएस के सह-संस्थापक, पद्म श्री से सम्मानित और दलाई लामा के दीर्घकालिक मित्र थे।
रॉबर्ट थर्मन का निधन कब और कहाँ हुआ?
प्रोफेसर थर्मन का निधन 16 जून को वुडस्टॉक, न्यूयॉर्क में 84 वर्ष की आयु में हुआ। तिब्बत हाउस यूएस ने बुधवार 18 जून को यह जानकारी साझा की।
PM मोदी और रॉबर्ट थर्मन की मुलाकात कब हुई थी?
प्रधानमंत्री मोदी और प्रोफेसर थर्मन 21 जून 2023 को न्यूयॉर्क में मिले थे। उस बैठक में दोनों ने बौद्ध मूल्यों की वैश्विक प्रासंगिकता और भारत की बौद्ध विरासत के संरक्षण पर विचार-विमर्श किया था।
भारत से थर्मन का क्या संबंध था?
प्रोफेसर थर्मन को भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया था। उन्होंने इंडो-तिब्बती बौद्ध अध्ययन के ज़रिये भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई और भारत के बौद्ध जुड़ाव को प्रोत्साहित किया।
थर्मन की प्रमुख अकादमिक उपलब्धियाँ क्या थीं?
उन्होंने तिब्बती काग्यूर से विमलकीर्ति सूत्र का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया और तिब्बती बौद्ध धर्म पर दर्जनों पुस्तकें लिखीं व संपादित कीं। 1997 में उन्हें अमेरिका के 25 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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