पीओके में प्रेस पर शिकंजा: पत्रकार सैयद फरहाद भूख हड़ताल पर, रज़ी ताहिर-सैफ लापता, CPJ ने की रिहाई की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने 4 अगस्त 2026 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पत्रकारों पर जारी कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से तीन लापता या हिरासत में बंद पत्रकारों को तत्काल रिहा करने, इंटरनेट सेवाएँ बहाल करने और स्वतंत्र रिपोर्टिंग पर लगी पाबंदियाँ हटाने की माँग की है।
हिरासत में पत्रकार: क्या है स्थिति
स्वतंत्र कश्मीरी पत्रकार सैयद फरहाद अली शाह विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के कारण हिरासत में हैं। 28 जुलाई को बाघ जिले में भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से उनके स्वास्थ्य को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। CPJ ने माँग की है कि उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाए और बिना शर्त रिहा किया जाए।
इसके अलावा पत्रकार रज़ी ताहिर और मुहम्मद सैफ 1 अगस्त को कथित तौर पर पुलिस वर्दी में आए लोगों द्वारा उठाए जाने के बाद से लापता हैं। CPJ ने कहा, 'यदि वे सरकारी हिरासत में हैं, तो पाकिस्तानी अधिकारियों को इसकी पुष्टि करनी चाहिए, उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए और उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए।'
इंटरनेट ब्लैकआउट और मीडिया पर प्रतिबंध
रिपोर्टों के अनुसार पीओके में 5 जून से आंशिक इंटरनेट ब्लैकआउट और दूरसंचार सेवाओं पर प्रतिबंध लागू हैं। 1 अगस्त को पीओके से रिपोर्टिंग के बाद कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने दावा किया कि पाकिस्तान में कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रसारकों की वेबसाइटें प्रतिबंधित कर दी गई हैं। पाकिस्तान में अनेक उपयोगकर्ताओं ने अल जजीरा की वेबसाइट तक पहुँच न होने की शिकायत की है, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में व्यापक अशांति की खबरें हैं। रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई में पिछले कुछ दिनों में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं। वास्तविक संख्या इससे अधिक होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि सूचना के प्रवाह पर कड़ा नियंत्रण है।
CPJ की माँगें और वैश्विक प्रतिक्रिया
न्यूयॉर्क स्थित प्रेस स्वतंत्रता संगठन CPJ ने पाकिस्तानी अधिकारियों से तीन स्पष्ट माँगें रखी हैं — पत्रकारों पर कार्रवाई तत्काल बंद हो, सूचना तक पहुँच बहाल हो और पीओके में स्वतंत्र रिपोर्टिंग की अनुमति दी जाए। संगठन ने प्रेस स्वतंत्रता, इंटरनेट प्रतिबंधों और नागरिकों के स्वतंत्र सूचना के अधिकार पर लगाम को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
गौरतलब है कि पीओके में मीडिया पर इस तरह की पाबंदियाँ कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन एकसाथ तीन पत्रकारों का लापता होना या हिरासत में होना और लंबे समय से जारी इंटरनेट ब्लैकआउट इसे असाधारण रूप से गंभीर बनाता है।
आगे क्या होगा
पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक CPJ की माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और पत्रकार संघों की नज़र इस स्थिति पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इंटरनेट और दूरसंचार सेवाएँ बाधित रहेंगी, पीओके की वास्तविक स्थिति का स्वतंत्र आकलन संभव नहीं होगा।