ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ सिंह का सोल में ऐलान: 'यह नए भारत की शक्ति और संकल्प का प्रमाण'

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ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ सिंह का सोल में ऐलान: 'यह नए भारत की शक्ति और संकल्प का प्रमाण'

सारांश

सोल में राजनाथ सिंह का संदेश सिर्फ प्रवासी भारतीयों के लिए नहीं था — यह दुनिया को दिया गया एक रणनीतिक संकेत था। ऑपरेशन सिंदूर को 'नए भारत की ताकत' बताते हुए उन्होंने परमाणु ब्लैकमेलिंग को खारिज किया और ₹1.54 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन के साथ भारत की आत्मनिर्भरता का दावा पेश किया।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 मई 2025 को सोल में 'ऑपरेशन सिंदूर' को नए भारत की शक्ति और संकल्प का प्रतीक बताया।
भारत 'नो फर्स्ट यूज' परमाणु नीति पर कायम है, लेकिन किसी भी परमाणु ब्लैकमेलिंग को सहन नहीं किया जाएगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात ₹40,000 करोड़ रहा।
अगले 1-2 वर्षों में रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ और उत्पादन ₹1.75 लाख करोड़ पार करने का अनुमान।
राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरियाई मंत्री ली योंग के साथ भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा उद्योग गोलमेज सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 मई 2025 को दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' एक मजबूत, आत्मविश्वासी और सक्षम राष्ट्र के रूप में भारत के उभरने का प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी रूप में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और देश की सुरक्षा नीति अब पहले की तुलना में कहीं अधिक साहसिक, निर्णायक और प्रभावी हो चुकी है।

परमाणु नीति पर कड़ा संदेश

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में 'नो फर्स्ट यूज' नीति का पालन करता है, लेकिन इस संयम को कमजोरी समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि भारत किसी भी प्रकार की परमाणु ब्लैकमेलिंग को सहन नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा, 'यह नया भारत है।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा जारी है। गौरतलब है कि भारत की परमाणु नीति में 'नो फर्स्ट यूज' का सिद्धांत दशकों से अपरिवर्तित रहा है, परंतु रक्षा मंत्री का यह कथन उसकी सीमाओं को स्पष्ट करने वाला माना जा रहा है।

वैश्विक मंच पर भारत की बदलती छवि

रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि 12-13 वर्ष पहले दुनिया भारत को एक कमजोर राष्ट्र के रूप में देखती थी। आज भारत वैश्विक मंच पर मजबूती से अपनी बात रखता है और दुनिया उसे गंभीरता से सुनती है। उन्होंने कहा कि भारत अब ऐसे वैश्विक शक्ति केंद्र के रूप में उभर रहा है, जो दुनिया को समाधान देने की क्षमता रखता है।

रक्षा उत्पादन और निर्यात के नए आँकड़े

राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बताया। उन्होंने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग ₹1.54 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन और करीब ₹40,000 करोड़ का रक्षा निर्यात हासिल किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले 1-2 वर्षों में रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ तक पहुँच जाएगा, जबकि रक्षा उत्पादन जल्द ही ₹1.75 लाख करोड़ का स्तर पार कर सकता है।

भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा साझेदारी

सोल में रक्षा मंत्री ने दक्षिण कोरिया के रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन मंत्री ली योंग के साथ भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा उद्योग व्यापार गोलमेज सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों ने नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।

राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरियाई कंपनियों से भारतीय उद्योगों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की तकनीकी उत्कृष्टता और भारत की विशाल विनिर्माण क्षमता, प्रतिभा और नवाचार शक्ति मिलकर भविष्य की उन्नत रक्षा तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

आधुनिक रक्षा तकनीक की नई परिभाषा

रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि आधुनिक रक्षा क्षेत्र अब केवल पारंपरिक हथियारों और प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। आज रक्षा इकोसिस्टम एआई, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर तकनीक, सेंसर, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, उन्नत सामग्री और अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित हो चुका है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में तकनीकी रूप से सक्षम देशों के बीच भरोसेमंद साझेदारी का रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है — और भारत तथा दक्षिण कोरिया इस दिशा में मिलकर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों एक साथ। लेकिन ₹1.54 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन के दावे के साथ यह सवाल भी उठता है कि इस उत्पादन में घरेलू मूल्यवर्धन कितना है और कितना आयातित कलपुर्जों की असेंबली। रक्षा निर्यात के आँकड़े उत्साहजनक हैं, पर ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य तभी टिकाऊ होगा जब भारत प्रमुख प्रणालियों में तकनीकी संप्रभुता हासिल करे — न कि केवल लाइसेंस-निर्मित उत्पादों के पुनः निर्यात पर निर्भर रहे। दक्षिण कोरिया के साथ साझेदारी का आह्वान सही दिशा में है, परंतु बिना प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की ठोस शर्तों के यह केवल व्यापारिक संबंध बनकर रह सकता है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर के बारे में राजनाथ सिंह ने सोल में क्या कहा?
राजनाथ सिंह ने 20 मई 2025 को सोल में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक मजबूत, आत्मविश्वासी और सक्षम राष्ट्र के रूप में भारत के उभरने का प्रमाण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत किसी भी रूप में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा।
भारत की 'नो फर्स्ट यूज' परमाणु नीति क्या है और राजनाथ सिंह ने इस पर क्या कहा?
'नो फर्स्ट यूज' नीति के तहत भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, यह भारत की दीर्घकालिक परमाणु नीति है। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस संयम को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए और भारत किसी भी परमाणु ब्लैकमेलिंग को सहन नहीं करेगा।
भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात 2025-26 में कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन लगभग ₹1.54 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात करीब ₹40,000 करोड़ रहा। राजनाथ सिंह ने अनुमान जताया कि अगले 1-2 वर्षों में निर्यात ₹50,000 करोड़ और उत्पादन ₹1.75 लाख करोड़ पार कर सकता है।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा गोलमेज सम्मेलन में क्या हुआ?
राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन मंत्री ली योंग के साथ भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा उद्योग व्यापार गोलमेज सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। इसमें दोनों देशों के अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी के नए अवसरों पर चर्चा की।
आधुनिक रक्षा क्षेत्र में भारत किन तकनीकों पर ध्यान दे रहा है?
राजनाथ सिंह के अनुसार आधुनिक रक्षा इकोसिस्टम अब एआई, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर तकनीक, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, उन्नत सामग्री और अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं पर केंद्रित हो चुका है। भारत इन क्षेत्रों में दक्षिण कोरिया जैसे तकनीकी रूप से सक्षम देशों के साथ साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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