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होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी नियंत्रण की कोशिश इंडो-पैसिफिक के लिए खतरा: रुबियो की चेतावनी

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होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी नियंत्रण की कोशिश इंडो-पैसिफिक के लिए खतरा: रुबियो की चेतावनी

सारांश

होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण सिर्फ खाड़ी का मामला नहीं — अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने मनीला में आसियान देशों को सीधे आगाह किया कि यह मिसाल इंडो-पैसिफिक के समुद्री रास्तों तक पहुँच सकती है और 150 साल पुरानी वैश्विक व्यापार व्यवस्था को हिला सकती है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मनीला में आसियान पोस्ट-मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस में ईरान के होर्मुज दावों पर कड़ी चेतावनी दी।
रुबियो के अनुसार, होर्मुज पर एकतरफा नियंत्रण किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था के तहत स्वीकार्य नहीं।
चेतावनी दी कि यह खतरनाक मिसाल मध्य पूर्व से आगे हिंद-प्रशांत क्षेत्र तक फैल सकती है।
अमेरिका ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने पहले हुई बातचीत के वादे पूरे नहीं किए।
रुबियो ने कहा — यदि ईरान गंभीर है तो अमेरिका वार्ता के लिए तैयार है, अन्यथा सहयोगियों के हितों की रक्षा की जाएगी।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 24 जुलाई 2025 को मनीला में आसियान पोस्ट-मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि यदि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण करने का अवसर मिला, तो यह एक ऐसी खतरनाक मिसाल बन जाएगी जिसके दुष्परिणाम मध्य पूर्व से आगे हिंद-प्रशांत क्षेत्र तक फैल सकते हैं। उनके अनुसार, यह विवाद केवल दो देशों के बीच का टकराव नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता और डेढ़ सदी पुरानी अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था की रक्षा का प्रश्न है।

रुबियो ने क्या कहा

रुबियो ने आसियान देशों के विदेश मंत्रियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि ईरान जो अधिकार मांग रहा है — होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण — वह किसी भी मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था के तहत उसे प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा, "होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और किसी एक देश को इस पर नियंत्रण देना स्वीकार्य नहीं।"

उन्होंने आगाह किया कि यदि मध्य पूर्व में यह मिसाल बनने दी गई — जहाँ कोई देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते पर शुल्क वसूले और भुगतान न करने पर जहाज नष्ट करे — तो यही नजीर दुनिया के अन्य हिस्सों में भी दोहराई जा सकती है, जिनमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र भी शामिल है।

एशिया के लिए विशेष चिंता

रुबियो ने रेखांकित किया कि एशियाई अर्थव्यवस्थाएँ समुद्री व्यापार पर बड़े पैमाने पर निर्भर हैं, इसलिए होर्मुज पर किसी भी प्रकार का एकतरफा नियंत्रण उनके लिए अधिक गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा, "असली सवाल समुद्री रास्तों पर आजादी से आवाजाही का है। यदि इस पर खतरा पैदा होता है, तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और पिछले करीब 150 वर्षों से चली आ रही अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था संकट में पड़ जाएगी।"

ईरान के साथ बातचीत पर अमेरिका का रुख

रुबियो ने कहा कि अमेरिका कूटनीतिक वार्ता के लिए अब भी तैयार है, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने पहले हुई बातचीत में किए गए वादे पूरे नहीं किए, जबकि वार्ता की पहल ईरान की ओर से ही हुई थी। उन्होंने कहा, "हम खुले मन से बातचीत करने और मतभेदों का समाधान कूटनीतिक रास्ते से निकालने के लिए सदैव तैयार हैं।"

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संदर्भ देते हुए रुबियो ने कहा कि यदि ईरान ईमानदारी से वार्ता चाहता है, तो अमेरिका पूरी गंभीरता से उसमें भागीदार होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका अपने और अपने सहयोगी देशों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यह ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता कई दौरों के बाद भी अनिर्णायक बनी हुई है और होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। गौरतलब है कि होर्मुज पर किसी भी व्यवधान का सीधा असर भारत सहित एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। रुबियो का यह संबोधन आसियान मंच पर अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें इंडो-पैसिफिक भागीदारों को ईरान के समुद्री दावों के विरुद्ध एकजुट किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसकी लहरें मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुँचती हैं। भारत सहित एशियाई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इन्हीं समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं, फिर भी इस मंच पर उनकी प्रतिक्रिया अब तक सतर्क रही है। विरोधाभास यह है कि अमेरिका ईरान से वार्ता की बात करता है, लेकिन साथ ही सैन्य विकल्प की धमकी भी देता है — यह द्विआयामी नीति क्षेत्रीय भागीदारों के लिए स्पष्ट संकेत नहीं देती। जब तक होर्मुज पर कोई ठोस बहुपक्षीय कानूनी ढाँचा नहीं बनता, तब तक यह चेतावनी भाषणों की श्रृंखला में एक और कड़ी बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्या चेतावनी दी?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मनीला में कहा कि यदि ईरान को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण करने दिया गया, तो यह एक खतरनाक मिसाल बनेगी जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र तक फैल सकती है। उनके अनुसार, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ईरान को यह अधिकार प्राप्त नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा प्रतिदिन गुजरता है। एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाएँ समुद्री व्यापार पर अत्यधिक निर्भर हैं, इसलिए इस मार्ग पर कोई भी व्यवधान भारत सहित पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की स्थिति क्या है?
रुबियो के अनुसार, अमेरिका कूटनीतिक वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन ईरान ने पहले हुई बातचीत में किए गए वादे पूरे नहीं किए। उन्होंने कहा कि वार्ता की पहल ईरान की ओर से हुई थी, फिर भी उसने अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया।
रुबियो ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का जिक्र क्यों किया?
रुबियो ने आसियान देशों के विदेश मंत्रियों को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट करना चाहा कि होर्मुज का मामला सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। उनका तर्क था कि यदि किसी देश को एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर एकाधिकार देने की नजीर बनी, तो यही पैटर्न हिंद-प्रशांत के समुद्री रास्तों पर भी दोहराया जा सकता है।
अमेरिका ने ईरान को क्या संदेश दिया?
रुबियो ने कहा कि यदि ईरान गंभीरता से वार्ता करना चाहता है, तो अमेरिका भी पूरी तत्परता से तैयार है। लेकिन यदि ईरान ने ऐसा नहीं किया, तो अमेरिका अपने और अपने सहयोगी देशों के हितों की रक्षा के लिए जो जरूरी होगा, वह करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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