यमन में सऊदी गठबंधन का बड़ा अभियान, हूती के अहम सैन्य संसाधन तबाह करने का दावा
सारांश
मुख्य बातें
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने रविवार, 2 नवंबर 2026 को दावा किया कि उसने यमन में हूती विद्रोहियों के महत्वपूर्ण सैन्य संसाधनों को निष्क्रिय करने के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया। गठबंधन के अनुसार यह कदम सऊदी अरब और यमन में नागरिकों व नागरिक ठिकानों पर हूतियों के लगातार हमलों के जवाब में उठाया गया।
अभियान की घोषणा और वजह
गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा, 'अभियान रविवार सुबह चलाया गया। यह कदम सऊदी अरब और यमन में नागरिकों और नागरिक ठिकानों पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के जवाब में उठाया गया था।' अल-मल्की ने यह भी बताया कि हूती विद्रोही इन संसाधनों का उपयोग अपने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों को मज़बूत करने के लिए कर रहे थे। हालाँकि, उन्होंने अभियान की सटीक जगह या उसके नतीजों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
अदन में हूती मिसाइल हमला
इसी रविवार को यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में एक सरकारी सैन्य ठिकाने के निकट हूती मिसाइल गिरने की सूचना मिली, जिससे जोरदार धमाका हुआ। एक सुरक्षा अधिकारी ने, अपना नाम न बताने की शर्त पर, बताया कि मिसाइल पश्चिमी अदन के अल-बुरैका जिले में उस सैन्य ठिकाने के पास गिरी जिसका उपयोग सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेना कर रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार धमाके की गूंज कई इलाकों तक सुनाई दी। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और हूती समूह ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
मक्का ड्रोन विवाद और हूती का खंडन
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते गठबंधन प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने एक्स पर दावा किया था कि हूती समूह द्वारा भेजे गए एक ड्रोन को मक्का क्षेत्र — इस्लाम के सबसे पवित्र शहर — के ऊपर रोककर नष्ट कर दिया गया। इस दावे को हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया ने एक्स पर जारी बयान में 'झूठा' बताते हुए खारिज किया। सरिया ने कहा कि उनके समूह ने शुक्रवार को 'सऊदी अरब के क्षेत्र की ओर कोई अभियान नहीं चलाया।' इस परस्पर विरोधी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
यमन संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन 2014 के अंत से गृहयुद्ध की चपेट में है। उस समय हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। अदन, जो इस मान्यता प्राप्त सरकार का अस्थायी मुख्यालय है, हाल के दिनों में हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों का बार-बार निशाना बनता रहा है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब यमन संघर्ष में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है और दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। अभियान की सफलता या विफलता को लेकर स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है, और यह देखना होगा कि यह ताज़ा सैन्य कार्रवाई व्यापक युद्धविराम प्रयासों को किस दिशा में ले जाती है।