शंघाई महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर का शाओशिंग दौरा, भारत-चीन संबंध सुधार की कड़ी में नई पहल
सारांश
मुख्य बातें
शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने बुधवार, 29 जुलाई को चीन के झेजियांग प्रांत के शाओशिंग शहर का आधिकारिक दौरा किया, जहाँ उन्होंने स्थानीय चीनी अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की और वहाँ बसे भारतीय समुदाय से मुलाकात की। यह दौरा भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में हाल के हफ्तों में की गई कूटनीतिक पहलों की श्रृंखला का हिस्सा है।
शाओशिंग में स्वागत और द्विपक्षीय चर्चा
शाओशिंग की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) सचिव शी हुइफांग ने महावाणिज्य दूत माथुर का औपचारिक स्वागत किया। दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई। चर्चा के दौरान पार्टी सचिव शी हुइफांग की हालिया भारत यात्रा का भी उल्लेख हुआ, जिसमें उन्होंने नई दिल्ली और बेंगलुरु का दौरा किया था।
माथुर ने शाओशिंग नेतृत्व को पिछले महीने आयोजित दूसरी एशियन रिले चैंपियनशिप के दौरान भारतीय एथलेटिक्स दल को दिए गए सहयोग के लिए विशेष रूप से धन्यवाद दिया। इस प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने कई पदक जीते, जिनमें महिला 4x100 मीटर रिले स्पर्धा में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक भी शामिल था।
सांस्कृतिक कूटनीति: टैगोर और लू शुन की मित्रता को श्रद्धांजलि
दौरे के दौरान माथुर ने लू शुन फाउंडेशन के निमंत्रण पर चीन के महान साहित्यकार लू शुन के आवास का भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत के महान कवि एवं नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और लू शुन के बीच की गहरी बौद्धिक मित्रता को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह सांस्कृतिक कूटनीति का एक सार्थक प्रतीक है, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक साहित्यिक संबंधों को रेखांकित करती है।
माथुर ने शाओशिंग में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात की और उनकी स्थानीय ज़रूरतों तथा अनुभवों के बारे में जानकारी ली।
विदेश सचिव मिस्री की बीजिंग यात्रा से जुड़ा संदर्भ
माथुर के शाओशिंग दौरे से ठीक एक दिन पहले विदेश सचिव विक्रम मिस्री अपनी दो दिवसीय बीजिंग यात्रा समाप्त कर स्वदेश लौटे। इस यात्रा में उन्होंने कई वरिष्ठ चीनी अधिकारियों के साथ भारत-चीन संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत वार्ता की।
मिस्री की यह यात्रा विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 21 जुलाई को मनीला में आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ) से संबंधित बैठकों के दौरान हुई मुलाकात के बाद की गई। इन लगातार कूटनीतिक संपर्कों से स्पष्ट है कि दोनों देश संबंध सामान्यीकरण की प्रक्रिया को गति दे रहे हैं।
गलवान के बाद: संबंध सुधार की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 2020 में गलवान घाटी की झड़पों और उसके बाद चार वर्षों से अधिक के सैन्य गतिरोध ने भारत-चीन संबंधों को गहरे संकट में डाल दिया था। पिछले एक वर्ष में दोनों देशों ने राजनयिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक स्तर पर कई उपाय करते हुए संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास किए हैं। माथुर का शाओशिंग दौरा और मिस्री की बीजिंग यात्रा इसी सिलसिले की कड़ियाँ हैं।
आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच और अधिक उच्चस्तरीय संपर्कों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।