प्रिमाकोव फोरम 2026: मॉस्को में 6 भारतीय विशेषज्ञ वैश्विक शक्ति-संघर्ष पर रखेंगे अपना पक्ष
सारांश
मुख्य बातें
प्रिमाकोव रीडिंग्स इंटरनेशनल फोरम का 12वाँ संस्करण 23 और 24 जून 2026 को मॉस्को में आयोजित होगा, जिसमें भारत के छह शीर्ष विशेषज्ञ वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और डिजिटल प्रतिस्पर्धा जैसे अहम मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे। इस वर्ष फोरम की थीम 'वर्ल्ड विदाउट रूल्स: पावर गेम?' रखी गई है — जो बदलती विश्व व्यवस्था पर एक सीधा सवाल है।
फोरम का स्वरूप और प्रमुख वक्ता
दो दिवसीय इस कार्यक्रम को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव संबोधित करेंगे। इसके अलावा रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव और फेडरेशन काउंसिल के उपाध्यक्ष कॉन्स्टेंटिन कोसाचेव भी इसमें भाग लेंगे। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, तुर्किये, कतर, ईरान, दक्षिण कोरिया और उज्बेकिस्तान सहित लगभग 20 देशों के करीब 50 विशेषज्ञ इसमें शिरकत करेंगे। कुल मिलाकर 400 से अधिक वैज्ञानिक, अधिकारी, राजनेता और कारोबारी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल — सबसे बड़ा विदेशी दल
आयोजकों के अनुसार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस फोरम में सबसे बड़ा विदेशी दल होगा। छह भारतीय विशेषज्ञ विभिन्न सत्रों में अपने विचार रखेंगे:
मंजीत कृपलानी (डायरेक्टर, गेटवे हाउस: इंडियन काउंसिल ऑन ग्लोबल रिलेशंस), समीर सरन (प्रेसीडेंट, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन), शिशिर प्रियदर्शी (प्रेसीडेंट, चिंतन रिसर्च फाउंडेशन; 2007 से 2022 तक विश्व व्यापार संगठन में डायरेक्टर), पंकज सरन (कन्वेनर, नैटस्ट्रेट; राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड), अरविंद गुप्ता (हेड, डिजिटल इंडिया फाउंडेशन), और लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह (डायरेक्टर जनरल, सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज)।
मुख्य विषय और सत्र
फोरम में जिन विषयों पर विचार-विमर्श होगा, वे वर्तमान वैश्विक तनाव के केंद्र में हैं। इनमें 'क्षेत्रीय संघर्षों के वैश्विक प्रभाव', 'सदी के मध्य तक वैश्विक व्यवस्था की संभावनाएँ', 'वैश्विक व्यापार और निवेश के सामने चुनौतियाँ और जोखिम', 'यूरेशियाई सुरक्षा 2035: सीएसटीओ की अध्यक्षता', 'एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में वैश्विक प्रतिस्पर्धा' और 'सैन्य-तकनीकी प्रतिस्पर्धा का नया दौर' शामिल हैं।
विशेषज्ञ मध्य पूर्व में तनाव कम करने की संभावनाओं, क्षेत्रीय सुरक्षा की नई संरचना और इसे स्थिर बनाने में गैर-पश्चिमी देशों की भूमिका पर भी चर्चा करेंगे। न्यू स्टार्ट संधि के समाप्त होने के प्रभाव और हथियार नियंत्रण व्यवस्था के कमज़ोर पड़ने के खतरे भी एजेंडे में हैं।
आयोजकों का नज़रिया
फोरम के आयोजकों में से एक और रूसी विज्ञान अकादमी के अंतरराष्ट्रीय संबंध संस्थान (आईएमईएमओ) के अध्यक्ष अलेक्जेंडर डिनकिन ने कहा, 'नियमों पर आधारित उदारवादी वैश्विक व्यवस्था की रूस और दुनिया भर में कड़ी और उचित आलोचना हुई है। 2022 से 2026 के बीच यह व्यवस्था धीरे-धीरे इतिहास का हिस्सा बन गई। आज हम वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक ढाँचे के टूटने, उसके बिखराव और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में ताकत के लगभग पूर्ण प्रभुत्व को देख रहे हैं।'
भारत की भागीदारी का महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंचों पर अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति को और मज़बूत कर रहा है। गौरतलब है कि भारत न तो पश्चिमी गठबंधन का हिस्सा है और न ही रूस-चीन धुरी का — ऐसे में मॉस्को के एक प्रमुख नीतिगत मंच पर भारत का सबसे बड़ा विदेशी प्रतिनिधिमंडल भेजना एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत है। आने वाले सत्रों में भारतीय विशेषज्ञों के विचार वैश्विक नीति-निर्माताओं के लिए एक स्वतंत्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे।