श्रीलंका ने मिडिल ईस्ट तनाव के चलते चार विशेष समितियों का गठन किया
सारांश
Key Takeaways
- श्रीलंका ने चार विशेष समितियों का गठन किया है।
- इन समितियों का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का समाधान करना है।
- ऊर्जा क्षेत्र में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
- सरकारी सेवाओं की निगरानी के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है।
- सामाजिक प्रभावों से निपटने के लिए चौथी समिति का गठन किया गया है।
कोलंबो, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। श्रीलंका की सरकार ने मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न होने वाली आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से निपटने के लिए चार विशेष समितियों का गठन करने का निर्णय लिया है। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तुत किया गया था और मंत्रिमंडल ने इसे स्वीकृति प्रदान की।
सरकार का कहना है कि इन समितियों का मुख्य उद्देश्य आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना, सप्लाई चेन को स्थिर करना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है।
ऊर्जा क्षेत्र के लिए गठित समिति की जिम्मेदारी होगी कि वह ईंधन, गैस और कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे। यह समिति अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स की पहचान करने और आपात खरीद की प्रक्रिया को तेज करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
सरकारी सेवाओं की निगरानी के लिए एक अलग समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करेंगे। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यों को सुचारु रखना, आर्थिक गतिविधियों को सहारा देना और आम जनता तक आवश्यक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।
परिवहन, राजमार्ग और शहरी विकास मंत्री की अगुवाई में बनी तीसरी समिति आवश्यक वस्तुओं के वितरण की निगरानी करेगी। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक और निजी सप्लाई चेन बिना किसी रुकावट के काम करें और बाजार में वस्तुओं की कमी न हो।
चौथी समिति का गठन सामाजिक प्रभावों से निपटने के लिए किया गया है, जिसकी अध्यक्षता ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और सामुदायिक सशक्तिकरण मंत्री करेंगे। यह समिति कमजोर वर्गों पर पड़ने वाले प्रभाव की पहचान करेगी और संबंधित संस्थानों के साथ समन्वय करके समय पर सहायता उपलब्ध कराएगी।
यह ध्यान देने योग्य है कि मध्य पूर्व में तनाव ईरान पर इजरायली और अमेरिकी हमलों के बाद बढ़ा, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका और इजरायल सहित क्षेत्रीय ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।