महाराष्ट्र सरकार ने ईरान-इजरायल तनाव के बीच एलपीजी सप्लाई को बनाए रखने के लिए उठाए कदम

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महाराष्ट्र सरकार ने ईरान-इजरायल तनाव के बीच एलपीजी सप्लाई को बनाए रखने के लिए उठाए कदम

सारांश

ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण महाराष्ट्र में गैस संकट की स्थिति बनी हुई है। राज्य सरकार ने एलपीजी सिलेंडरों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कंट्रोल रूम और समितियां गठित की हैं। जानें, इस महत्वपूर्ण कदम के बारे में सभी जानकारी।

Key Takeaways

  • एलपीजी सप्लाई को बनाए रखने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।
  • जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है।
  • सरकार ने कहा है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है।
  • आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • सूचना प्रसार के लिए विशेष उपाय किए गए हैं।

मुंबई, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान-इजरायल तनाव के चलते देश के कई क्षेत्रों में गैस और ईंधन संकट को देखते हुए, महाराष्ट्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडरों की सतत आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने पूरे महाराष्ट्र में कंट्रोल रूम स्थापित करने और जिला स्तर पर विशेष समितियों का गठन करने का निर्णय लिया है, ताकि घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में किसी प्रकार की रुकावट न आए।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल डिग्गीकर ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि राज्यभर में एलपीजी वितरण की निरंतर निगरानी की जाए और आपूर्ति को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता पिछले छह महीनों के मुकाबले अधिक है। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि गैस की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित न होने दी जाए।

गैस सप्लाई में संभावित व्यवधान को रोकने और किसी भी आपात स्थिति में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों में जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला आपूर्ति अधिकारी और सभी सरकारी गैस कंपनियों के अधिकारी शामिल होंगे।

इन समितियों की मुख्य जिम्मेदारियों में एलपीजी सप्लाई चेन की निगरानी, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और रोजाना स्थिति की रिपोर्ट सरकार को भेजना शामिल होगा। मुंबई-ठाणे राशनिंग क्षेत्र में एक अलग समिति बनाई जाएगी, जो राशनिंग कंट्रोलर के नेतृत्व में काम करेगी। इस समिति में पुलिस के डिप्टी कमिश्नर और डिप्टी कंट्रोलर (राशनिंग) शामिल होंगे। मुंबई और ठाणे के सभी डिप्टी कमिश्नरों के साथ समन्वय का काम जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (प्रशासन) करेंगे।

अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर कोयला या केरोसिन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जाए। हालांकि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी नियमों का पूरी तरह पालन हो।

जिला स्तर की समितियां होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशनों के साथ बैठकें भी करेंगी, ताकि जहां संभव हो वहां वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ावा दिया जा सके।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों, सरकारी छात्रावासों, सरकारी स्कूल और कॉलेजों की मेस, मिड-डे मील योजना और सरकार संचालित आश्रम स्कूलों जैसी आवश्यक सेवाएं देने वाले संस्थानों को एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। ऐसे संस्थानों की सूची तैयार की जाएगी और उनके लिए अलग प्राथमिकता आदेश लागू किया जाएगा ताकि इन सेवाओं में किसी तरह की बाधा न आए।

गैस सप्लाई को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह या घबराहट फैलने से रोकने के लिए सरकार ने सूचना प्रसार की विशेष व्यवस्था भी की है। रेडियो, एफएम चैनल, टेलीविजन और प्रिंट मीडिया के माध्यम से रोजाना सही जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी।

इस कार्य की जिम्मेदारी सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय और जिला समितियों को दी गई है। साथ ही, सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी या भ्रामक खबरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

तेल कंपनियों को गैस बुकिंग ऐप और मिस्ड कॉल सेवाओं में आने वाली तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा राज्य, संभाग, जिला और तालुका स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए व्हाट्सऐप सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि लोग आसानी से अपनी समस्या दर्ज करा सकें।

आने वाले त्योहारों को देखते हुए सार्वजनिक संस्थानों को एलपीजी की आपूर्ति को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम पंचायत सदस्यों से भी सहयोग लिया जाएगा, ताकि गैस सप्लाई के संबंध में नागरिकों में किसी तरह की घबराहट न फैले। एलपीजी सिलेंडर लेकर जाने वाले वाहनों और गैस एजेंसियों को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को सौंपी गई है। जिला प्रशासन, राशनिंग कंट्रोलर और तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना गैस स्टॉक की स्थिति और आपूर्ति से संबंधित अपडेट राज्य स्तर के कंट्रोल रूम को भेजें।

महाराष्ट्र में एलपीजी की औसत दैनिक मांग लगभग ९,००० मीट्रिक टन है। इस मांग को पूरा करने के लिए पिछले दो दिनों में रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन को ९,००० मीट्रिक टन से बढ़ाकर लगभग ११,००० मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त उत्पादन और स्टॉक उपलब्ध है।

व्यावसायिक एलपीजी के मामले में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर आवंटन किया जा रहा है। अस्पतालों, स्कूलों की मिड-डे मील योजना, आश्रम स्कूलों, सामुदायिक रसोई और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की मेस को प्राथमिकता दी जा रही है।

इसके अतिरिक्त घरेलू उपयोग के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। राज्य में पेट्रोल और डीजल की भी पर्याप्त उपलब्धता है। महाराष्ट्र की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और बाजार की मांग को पूरा करने के लिए प्रतिदिन लगभग १५,००० किलोलीटर पेट्रोल और ३८,००० किलोलीटर डीजल का उत्पादन कर रही हैं।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे ईंधन की आपूर्ति को लेकर घबराएं नहीं और किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें क्योंकि राज्य में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी तरह से सुनिश्चित की गई हैं।

Point of View

जो ईरान-इजरायल तनाव के बीच नागरिकों को गैस संकट से बचाने के लिए कदम उठा रही है। सरकार ने आवश्यक उपायों को लागू किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे जनता के हित में कार्य कर रहे हैं।
NationPress
14/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या महाराष्ट्र में एलपीजी की कोई कमी है?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है।
कंट्रोल रूम का क्या उद्देश्य है?
कंट्रोल रूम का उद्देश्य एलपीजी सप्लाई को सुचारु बनाए रखना और स्थिति की निगरानी करना है।
क्या वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग किया जाएगा?
आवश्यकता पड़ने पर कोयला या केरोसिन जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग करने पर विचार किया जाएगा।
सरकार ने सूचना प्रसार के लिए क्या उपाय किए हैं?
सरकार ने रेडियो, एफएम चैनल, और सोशल मीडिया के माध्यम से सही जानकारी लोगों तक पहुंचाने का निर्णय लिया है।
क्या अस्पतालों और स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी?
जी हां, अस्पतालों और स्कूलों को एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।
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