ट्रंप का ऐलान: होर्मुज में जहाजों के नुकसान की भरपाई ईरान के फंड से होगी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 जुलाई 2026 को घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुए जहाजों की भरपाई अमेरिका के नियंत्रण में मौजूद ईरानी फंड से की जाएगी। यह घोषणा उन्होंने एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान की और इस विचार को स्पष्ट रूप से खारिज किया कि अमेरिकी सरकारी राशि से शिपिंग कंपनियों को मुआवजा दिया जाएगा।
ट्रंप का बयान: ईरान के पैसे से होगा नुकसान का हिसाब
ट्रंप ने कहा, 'नहीं, बिल्कुल नहीं। हम नुकसान की भरपाई के लिए ईरान के पैसे का इस्तेमाल करेंगे। दूसरे शब्दों में कहें तो, ईरान का वह पैसा जो हमारे नियंत्रण में है, उसी से उनके द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई की जाएगी।' हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी नियंत्रण में ईरान की कितनी राशि है, किन शिपिंग कंपनियों को मुआवजा मिलेगा और यह भुगतान किस प्रक्रिया के तहत होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य की मौजूदा स्थिति
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति 'अब बहुत अच्छी है।' उन्होंने कहा, 'उनका पूरा तटीय इलाका तबाह हो चुका है। जलडमरूमध्य की स्थिति अब बहुत अच्छी है और हम इस समय बातचीत कर रहे हैं।' गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक कच्चे तेल तथा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
ईरान से बातचीत और संभावित समझौता
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच इस समय बातचीत जारी है। उन्होंने दावा किया कि भारी सैन्य दबाव के बाद ईरान ने मध्यस्थों और सीधे संपर्क के ज़रिए बैठक का अनुरोध किया। ट्रंप ने कहा, 'वे मिलना चाहते हैं और हम मिल रहे हैं। देखते हैं क्या होता है। समझौते की संभावना है। अगर हमने वह कार्रवाई नहीं की होती, तो वे हमसे बात भी नहीं कर रहे होते।' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।
वेनेजुएला मॉडल से तुलना
ट्रंप ने ईरान के प्रति अपनी नीति की तुलना वेनेजुएला के मामले में अमेरिकी कार्रवाई से की। उनके अनुसार, वेनेजुएला से प्राप्त धन से अमेरिका ने अपने खर्च की भरपाई की थी और ईरान के मामले में भी यही नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा, 'हमने उस युद्ध की लागत कई गुना वसूल कर ली थी और ईरान के मामले में भी ऐसा ही होगा।' वेनेजुएला से प्राप्त धन के उपयोग पर उन्होंने कहा कि वह 'देश चलाने' में इस्तेमाल हो रहा है और कांग्रेस की मंजूरी मिलने पर उसे सेना के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।
भारत और ऊर्जा आयातक देशों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सीधे प्रभावित कर रहा है। भारत जैसे प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह मार्ग रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि अमेरिका-ईरान वार्ता सफल रहती है, तो इस क्षेत्र में शिपिंग की सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद है।