ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम: 'वार्ता टूटे तो परवाह नहीं, परमाणु हथियार बनाया तो पूरी तरह तबाह करूँगा'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 जून 2026 को स्पष्ट कर दिया कि ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता के टूटने की स्थिति में उन्हें कोई चिंता नहीं है। सीएनबीसी के वरिष्ठ वाशिंगटन संवाददाता ईमोन जेवर्स के साथ फोन पर बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान ने बातचीत में अनावश्यक रूप से समय बर्बाद किया और तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनके प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह बयान ऐसे समय आया जब ईरान के वार्ता से पीछे हटने की खबरों के बाद वैश्विक तेल बाजार में 8 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल दर्ज की गई।
वार्ता पर ट्रंप का रुख
जब ट्रंप से सीधे पूछा गया कि क्या ईरान के साथ बातचीत समाप्त हो गई है, तो उन्होंने कहा, 'सच कहूँ तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बातचीत खत्म हुई या नहीं। मुझे बिल्कुल परवाह नहीं है।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'अगर खत्म हो गई है, तो हो गई है। अगर नहीं हुई, तो मुझे लगता है कि उन्होंने बहुत ज्यादा समय लिया — यह बातचीत अब काफी उबाऊ लगने लगी थी।'
ट्रंप ने ईरान पर जानबूझकर वार्ता को लंबा खींचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगा कि वे बस हमें टाल रहे थे।' जब उनसे पूछा गया कि क्या यह जानबूझकर किया गया, तो उन्होंने सीधे जवाब दिया — 'हाँ, मुझे ऐसा ही लगा।'
परमाणु हथियारों पर कड़ी चेतावनी
ट्रंप ने तेहरान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'इस समय मेरी जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हो।' इसके बाद उन्होंने आगाह किया, 'अगर वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करेंगे, तो मैं उन्हें पूरी तरह तबाह कर दूँगा।' यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर है।
तेल बाजार पर असर और ट्रंप का जवाब
वार्ता के संकट में पड़ने की खबरों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई। जेवर्स के अनुसार, ईरान के पीछे हटने की रिपोर्टों के बाद तेल की कीमतों में 8 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई। हालाँकि ट्रंप ने इस पर चिंता जताने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'नहीं, मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है।'
राष्ट्रपति ने तर्क दिया कि तेल की कीमतें जल्द ही नीचे आएंगी। उन्होंने कहा, 'इस समय 1,700 जहाज तेल से भरे हुए हैं और यह किसी बड़े तेल प्रवाह की तरह बाजार में पहुँचेगा।' ट्रंप ने यह भी कहा कि तनाव के बावजूद समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही जारी है और मार्ग लंबे समय तक बाधित नहीं रहेंगे।
ईरान की आर्थिक स्थिति पर दावे
ट्रंप ने दावा किया कि मौजूदा नाकाबंदी के कारण ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, 'ईरान हर दिन 50 करोड़ डॉलर का नुकसान झेल रहा है।' उन्होंने कहा कि अगर ईंधन की कीमतें बढ़ती भी हैं, तो इसे ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकने की व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
यूरोप पर जिम्मेदारी डालने का सुझाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया कि खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों की सुरक्षा की जिम्मेदारी यूरोपीय देशों को अधिक उठानी चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति पर उनकी निर्भरता अमेरिका की तुलना में कहीं अधिक है। यह बयान अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति में एक नई दिशा का संकेत देता है, जहाँ वाशिंगटन अपने यूरोपीय सहयोगियों पर अधिक भार डालने की कोशिश कर रहा है।