जेलेंस्की का दावा: यूक्रेन ने रूस के क्रास्नोडार-स्टावरोपोल में सैन्य सप्लाई हब और तेल डिपो तबाह किए
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बुधवार, 22 जुलाई को दावा किया कि यूक्रेनी सेना ने रूस के क्रास्नोडार और स्टावरोपोल क्षेत्रों में अहम सैन्य लॉजिस्टिक्स ठिकानों और एक तेल भंडारण केंद्र पर लंबी दूरी के सफल हमले किए। जेलेंस्की के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य रूस पर दबाव बनाकर उसे कूटनीति और शांति वार्ता की ओर मजबूर करना है।
हमलों का विवरण
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि निशाना बनाए गए लॉजिस्टिक्स हब वे केंद्र थे जहाँ से रूसी सेना को ड्रोन के पुर्जे, नेविगेशन उपकरण और अन्य जरूरी सैन्य सामग्री की आपूर्ति की जाती थी। इसके अतिरिक्त एक तेल भंडारण केंद्र को भी नष्ट करने का दावा किया गया है।
समुद्री मोर्चे पर भी यूक्रेन ने कार्रवाई का दावा किया। जेलेंस्की के अनुसार, काला सागर और आजोव सागर में रूस के तथाकथित 'शैडो फ्लीट' के एक टैंकर और चार मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया।
जेलेंस्की का बयान
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, 'हम पूरी तरह जायज तरीके से इस युद्ध को वापस रूस की धरती तक ले जा रहे हैं।' उन्होंने यूक्रेन की रक्षा सेनाओं के जवानों का आभार जताते हुए कहा कि शांति की जरूरत है और यूक्रेन ने रूसी पक्ष के सामने हर तरह का प्रस्ताव रखा है।
रूसी हमलों की पृष्ठभूमि
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले मंगलवार को रूस ने यूक्रेन पर भीषण हवाई हमले किए थे। जेलेंस्की ने उन हमलों को युद्ध के नियमों का उल्लंघन बताया था, क्योंकि रूसी हमलों ने एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत को निशाना बनाया जिसकी पहली से सातवीं मंजिल तक के फ्लैटों में आग लग गई। रूसी हवाई हमलों में जापोरिज्जिया, खेरसोन और ओडेसा में कई लोगों की जान गई और कई घायल हुए।
साझेदार देशों से अपील
जेलेंस्की ने यूरोपीय एवं पश्चिमी साझेदार देशों से समर्थन जारी रखने की अपील की। उन्होंने यूरोपीय संघ के 21वें प्रतिबंध पैकेज को शीघ्र मंजूरी देने और हथियारों तथा रक्षा उपकरणों की आपूर्ति बिना देरी के सुनिश्चित करने की माँग की। उन्होंने कहा कि लोगों की जान बचाने में जो भी मदद संभव है, उसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए।
रूस-यूक्रेन संघर्ष में दोनों पक्षों की ओर से हमलों का यह सिलसिला जारी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब यूरोपीय संघ के प्रतिबंध पैकेज और हथियार आपूर्ति की गति पर टिकी हैं।