युगांडा में इबोला संकट: संयुक्त राष्ट्र ने CERF से $40 लाख जारी किए, जूलियन हार्नेस बने वरिष्ठ समन्वयक
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों और आपातकालीन राहत समन्वयक के अवर महासचिव टॉम फ्लेचर ने युगांडा में इबोला महामारी से निपटने के लिए सरकारी प्रयासों को मजबूती देने हेतु केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष (CERF) से 40 लाख अमेरिकी डॉलर आवंटित किए हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने 19 जून को यह जानकारी दी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब इबोला — जिसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत है — पर नियंत्रण पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सक्रियता बढ़ रही है।
मुख्य घटनाक्रम
इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ माइग्रेशन (IOM) और यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर स्क्रीनिंग, निगरानी और आवागमन प्रबंधन को सुदृढ़ कर रहे हैं। यूनिसेफ सामुदायिक सहभागिता, जोखिम संबंधी जागरूकता और आवश्यक सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने में जुटा है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने मरीजों, पृथकवास में रखे गए संपर्कों और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को 6,000 से अधिक भोजन पैकेट उपलब्ध कराए हैं। इसके साथ ही संगठन आवश्यक राहत एवं चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति भी सुनिश्चित कर रहा है।
कांगो में भी सक्रिय हुआ संयुक्त राष्ट्र
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो (DRC) में संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठनों ने इस सप्ताह 16 मीट्रिक टन से अधिक चिकित्सा सामग्री पहुँचाई। इसके अतिरिक्त, साझेदार संगठनों ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एनजिली इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंशासा में नई स्वास्थ्य जांच सुविधाएँ भी स्थापित की हैं।
वरिष्ठ इबोला समन्वयक की नियुक्ति
संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन राहत समन्वयक ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक से परामर्श के बाद जूलियन हार्नेस को वरिष्ठ इबोला समन्वयक नियुक्त किया है। उनकी जिम्मेदारी इबोला प्रतिक्रिया से जुड़े विभिन्न प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, परिचालन संबंधी चुनौतियों का समाधान करना और जरूरतमंद लोगों तक सहायता शीघ्र पहुँचाना होगा।
इबोला: क्या है यह रोग
इबोला वायरस रोग एक दुर्लभ लेकिन प्रायः घातक रक्तस्रावी बुखार (हेमरेजिक फीवर) है, जो ऑर्थोइबोलावायरस के कारण होता है। यह मुख्यतः उप-सहारा अफ्रीका में पाया जाता है और संक्रमित मनुष्यों या जानवरों के शारीरिक द्रवों अथवा दूषित सतहों के सीधे संपर्क से फैलता है। इसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत बताई जाती है।
आगे क्या होगा
CERF से मिले इस आवंटन के बाद अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की जमीनी उपस्थिति और तेज होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि इबोला जैसी अत्यधिक संक्रामक बीमारियों में शुरुआती समन्वय और संसाधनों की त्वरित तैनाती ही प्रकोप को सीमित रखने की कुंजी मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा-पार निगरानी और सामुदायिक जागरूकता इस प्रतिक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं।