10 अगस्त 2026
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अमेरिकी संसद में भारत के यूपीआई मॉडल की तारीफ, पेमेंट सुधार बहस में बना मिसाल

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अमेरिकी संसद में भारत के यूपीआई मॉडल की तारीफ, पेमेंट सुधार बहस में बना मिसाल

सारांश

अमेरिकी संसद की सुनवाई में भारत का यूपीआई मॉडल चर्चा के केंद्र में आया — स्ट्राइप की वाइस चेयर ने इसे नवाचार की मिसाल बताया। सवाल यह है कि क्या अमेरिका अपने फेडनाउ सिस्टम को भारत की तरह खुला और व्यापक बना सकता है, या पारंपरिक बैंकिंग हित इसे रोकेंगे।

मुख्य बातें

हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी की सब-कमेटी ने 25 जून 2025 को पेमेंट सुधार पर सुनवाई की, जिसमें भारत के यूपीआई को मॉडल के रूप में उद्धृत किया गया।
स्ट्राइप की वाइस चेयर एलीन ओमारा ने ब्रिटेन (2017), EU (2024) और भारत के यूपीआई को खुली पेमेंट पहुँच के सफल उदाहरण बताया।
यूपीआई को NPCI संचालित करता है और यह प्रतिमाह अरबों लेनदेन प्रसंस्कृत करता है — यह तथ्य कांग्रेस सदस्य रशीदा तलीब ने सुनवाई में रेखांकित किया।
फिनटेक कंपनियों ने माँग की कि गैर-बैंक पेमेंट कंपनियों को फेडरल रिज़र्व के इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीधी पहुँच मिले।
नेशनल कम्युनिटी रीइन्वेस्टमेंट कोएलिशन ने किसी भी नई पहुँच के साथ मज़बूत उपभोक्ता सुरक्षा और नियामक निगरानी की शर्त रखी।

अमेरिकी संसद की हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी की फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स सब-कमेटी ने 25 जून 2025 को वाशिंगटन में पेमेंट सुधार पर एक अहम सुनवाई आयोजित की, जिसमें भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को आधुनिक सार्वजनिक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का एक सफल उदाहरण बताया गया। अमेरिकी सांसदों ने इस बात पर विचार-विमर्श किया कि क्या अमेरिका को अपने नियामक ढाँचे को इस तरह आधुनिक बनाना चाहिए कि योग्य गैर-बैंक पेमेंट कंपनियों को फेडरल रिज़र्व के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीधी पहुँच मिल सके।

सुनवाई में क्या हुआ

इस सुनवाई में फिनटेक कंपनियों ने अमेरिकी कांग्रेस से पेमेंट नेटवर्क तक पहुँच को नियंत्रित करने वाले नियमों में व्यापक बदलाव की माँग की। मुख्य सवाल यह था कि क्या गैर-बैंक पेमेंट कंपनियों को पारंपरिक बैंकिंग मध्यस्थों पर निर्भर रहने के बजाय फेडरल रिज़र्व के सिस्टम से सीधे जोड़ा जाए।

स्ट्राइप की दलील और यूपीआई की मिसाल

स्ट्राइप की वाइस चेयर एलीन ओमारा ने सांसदों के सामने तर्क रखा कि जिन देशों ने पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक खुली पहुँच दी है, वहाँ उल्लेखनीय नवाचार हुए हैं। उन्होंने ब्राज़ील और भारत दोनों का उदाहरण दिया। ओमारा ने कहा, "ब्रिटेन ने 2017 में ऐसा किया, यूरोपीय संघ ने 2024 में और नतीजे वास्तविक हैं। हमने भारत में यूपीआई के साथ भी ठीक यही चीज़ और भी बड़े पैमाने पर होते देखा है।"

ओमारा ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका में फेडनाउ इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम तो मौजूद है, लेकिन उसके ऊपर एक उत्पाद परत (प्रोडक्ट लेयर) की कमी है — ठीक वैसी जो स्ट्राइप जैसी कंपनियाँ बना सकती हैं — और इसके लिए प्रत्यक्ष पहुँच ज़रूरी है ताकि इसे व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके।

सांसदों की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सदस्य रशीदा तलीब ने भारत की डिजिटल पेमेंट सफलता को रेखांकित किया। यूपीआई का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) संचालित करता है और यह प्रणाली हर महीने अरबों लेनदेन प्रसंस्कृत करती है। दोनों दलों के सदस्य इस बात पर सहमत थे कि डिजिटल वाणिज्य के विस्तार के साथ तेज़ और कुशल पेमेंट प्रणाली की ज़रूरत बढ़ रही है, हालाँकि फेडरल रिज़र्व के सिस्टम तक पहुँच की सीमा पर मतभेद बने रहे।

उपभोक्ता सुरक्षा पर चिंता

नेशनल कम्युनिटी रीइन्वेस्टमेंट कोएलिशन की तारा फ्लिन ने कानून-निर्माताओं से आग्रह किया कि बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम तक पहुँच पाने वाली किसी भी गैर-बैंक संस्था को मज़बूत उपभोक्ता संरक्षण, सामुदायिक निवेश की ज़िम्मेदारियों और कड़े नियामक निगरानी के दायरे में लाया जाना चाहिए। यह चेतावनी इस बात की ओर इशारा करती है कि सुधार की राह में सुरक्षा उपायों को कमज़ोर किए बिना संतुलन बनाना होगा।

नियामक ढाँचे पर बड़ा सवाल

ओमारा ने यह भी कहा कि मौजूदा नियामक ढाँचा इस आधार पर बना है कि कोई संस्था 'बैंक है या नहीं', जबकि पेमेंट कंपनियाँ एक अलग व्यावसायिक मॉडल पर काम करती हैं। उनके शब्दों में, "हम न तो लोगों की जमा राशि स्वीकार करते हैं और न ही ऋण देते हैं। हमारी माँग केवल इतनी है कि जिस प्रकार का काम हम करते हैं — यानी पेमेंट प्रोसेसिंग — उसी के अनुरूप हमारा नियमन किया जाए।" यह बहस आने वाले महीनों में अमेरिकी पेमेंट नीति की दिशा तय कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तुलना उतनी सरल नहीं जितनी दिखती है — भारत में यूपीआई एक सरकार-समर्थित, गैर-लाभकारी ढाँचे पर खड़ा है, जबकि अमेरिका में यही माँग मुनाफा-केंद्रित फिनटेक कंपनियाँ कर रही हैं। यह अंतर नीतिगत नतीजों को मौलिक रूप से बदल सकता है। तारा फ्लिन की उपभोक्ता सुरक्षा संबंधी चेतावनी मुख्यधारा की कवरेज में दब गई, जबकि यही असली कसौटी है। बिना मज़बूत निगरानी के, खुली पहुँच नवाचार कम और बाज़ार एकाधिकार अधिक पैदा कर सकती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी संसद की सुनवाई में भारत के यूपीआई का ज़िक्र क्यों हुआ?
अमेरिकी सांसद और फिनटेक कंपनियाँ यह तर्क दे रही थीं कि सार्वजनिक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक खुली पहुँच से नवाचार बढ़ता है। भारत का यूपीआई, जो हर महीने अरबों लेनदेन प्रसंस्कृत करता है, इस दलील का सबसे मज़बूत उदाहरण बनकर सामने आया।
स्ट्राइप ने अमेरिकी कांग्रेस से क्या माँग की?
स्ट्राइप की वाइस चेयर एलीन ओमारा ने माँग की कि गैर-बैंक पेमेंट कंपनियों को फेडरल रिज़र्व के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीधी पहुँच मिले, ताकि उन्हें पारंपरिक बैंकिंग मध्यस्थों पर निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि फेडनाउ सिस्टम के ऊपर एक उत्पाद परत की ज़रूरत है।
यूपीआई को कौन संचालित करता है और यह कितना बड़ा है?
यूपीआई को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) संचालित करता है। यह प्रणाली हर महीने अरबों लेनदेन प्रसंस्कृत करती है और इसे दुनिया के सबसे सफल सार्वजनिक डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म में से एक माना जाता है।
उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर क्या चिंताएँ उठाई गईं?
नेशनल कम्युनिटी रीइन्वेस्टमेंट कोएलिशन की तारा फ्लिन ने कहा कि फेडरल रिज़र्व के सिस्टम तक पहुँच पाने वाली किसी भी गैर-बैंक संस्था को मज़बूत उपभोक्ता संरक्षण, सामुदायिक निवेश की ज़िम्मेदारियों और कड़े नियामक निगरानी के दायरे में लाया जाना चाहिए।
क्या अमेरिका में पेमेंट सुधार पर दोनों दलों में सहमति है?
दोनों दलों के सदस्य इस बात पर सहमत थे कि डिजिटल वाणिज्य के विस्तार के साथ तेज़ और कुशल पेमेंट प्रणाली ज़रूरी है। हालाँकि, फेडरल रिज़र्व के सिस्टम तक गैर-बैंकों की पहुँच की सीमा को लेकर मतभेद बने रहे।
राष्ट्र प्रेस
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