गढ़वा अदालत ने हेलीकॉप्टर पायलट जशवीर सिंह योद्धा को 17 साल पुराने आचार संहिता मामले में बरी किया
सारांश
मुख्य बातें
गढ़वा की प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने 6 जून 2026 को हेलीकॉप्टर पायलट जशवीर सिंह योद्धा को 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज आचार संहिता उल्लंघन के मामले में सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में यह फैसला सुनाया, जिससे 17 वर्षों से चली आ रही न्यायिक प्रक्रिया का अंत हुआ।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान गढ़वा जिले के गोविंद हाई स्कूल मैदान में हेलीकॉप्टर की लैंडिंग से जुड़ा था। अधिकारियों का आरोप था कि हेलीकॉप्टर को प्रशासनिक अनुमति के बिना उस मैदान में उतारा गया, जिसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना गया और तदनुसार मामला दर्ज किया गया।
लालू प्रसाद यादव को पहले मिली थी राहत
इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद यादव का नाम भी शामिल था। हालांकि, उन्हें पहले ही अदालत से राहत प्राप्त हो चुकी थी। इसके बाद मुकदमे की कार्यवाही केवल पायलट जशवीर सिंह योद्धा के विरुद्ध जारी रही।
अदालत का फैसला
सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों की दलीलें सुनीं तथा मामले से संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तृत जाँच की। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। अदालत ने सभी तथ्यों की समीक्षा के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल नहीं रहा और पायलट को सभी आरोपों से मुक्त करने का आदेश सुनाया।
बचाव पक्ष की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने इसे न्याय की जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित इस मामले में अंततः सच्चाई सामने आई। गौरतलब है कि यह मामला करीब 17 वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन था।
आगे की स्थिति
अदालत के इस निर्णय के साथ चुनाव आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े इस मामले का न्यायिक अध्याय पूरी तरह बंद हो गया है। मामले से जुड़ी शेष सभी कानूनी प्रक्रियाएँ भी पूर्ण हो गई हैं। यह फैसला उन मामलों की याद दिलाता है जिनमें चुनावी प्रक्रिया के दौरान दर्ज आरोप वर्षों तक अदालतों में लंबित रहते हैं और अंततः साक्ष्यों के अभाव में निरस्त होते हैं।