23 सितंबर 2026 पंचांग: वामन जयंती पर भगवान विष्णु की पूजा शुभ, शाम 4:27 तक सुकर्मा योग
सारांश
मुख्य बातें
बुधवार, 23 सितंबर 2026 को वामन जयंती का पर्व मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के पाँचवें वामन अवतार की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं। पंचांग-गणना के अनुसार इस दिन सुकर्मा योग शाम 4:27 बजे तक विद्यमान रहेगा, जिसे 27 नित्य योगों में विशेष शुभ माना गया है।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रात 10:50 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी। बुधवार को सूर्योदय प्रातः 6:19 बजे और सूर्यास्त सायं 6:18 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 4:20 बजे और चंद्रास्त तड़के 3:51 बजे होगा।
नक्षत्र और राशि की स्थिति
इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेंगे। यह आकाशमंडल का 12वाँ नक्षत्र है, जो सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक विस्तृत है। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव और देवता अर्यमा (देवताओं तथा पितरों के प्रमुख) हैं। मान्यता है कि इस नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी और नेतृत्व क्षमता से भरपूर होते हैं।
बुधवार को सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सूर्य के कन्या राशि में रहने से व्यावहारिक और योजनाबद्ध कार्यशैली लाभदायक रहती है। वहीं मकर राशि में चंद्रमा के रहने पर शनि का प्रभाव भावनाओं को अनुशासित और व्यावहारिक बनाता है।
सुकर्मा योग और अभिजीत मुहूर्त
बुधवार शाम 4:27 बजे तक सुकर्मा योग रहेगा। यह 27 नित्य योगों में सातवाँ और अत्यंत शुभ योग माना जाता है। यह योग तब बनता है जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों की संयुक्त दूरी 80 डिग्री 00 मिनट से 93 डिग्री 20 मिनट के मध्य होती है। इस योग के अधिष्ठाता देव देवराज इन्द्र हैं। सगाई, विवाह, गृह प्रवेश, नया वाहन या संपत्ति खरीदना, नए व्यापार की शुरुआत तथा नई नौकरी में प्रवेश के लिए यह अवधि विशेष शुभ मानी गई है।
दिन का सर्वाधिक फलदाई अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा — लगभग 48 मिनट की यह अवधि वह समय है जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर रहते हैं। मान्यता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से समस्त अशुभ प्रभाव और दोष स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
अमृतकाल, राहुकाल और अन्य अशुभ काल
बुधवार को अमृतकाल रात 11:34 बजे से रात 1:15 बजे तक रहेगा। पंचांग-शास्त्र के अनुसार, यह अमृत के समान उत्तम फल देने वाला काल है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।
इस दिन राहुकाल दोपहर 12:19 बजे से 1:49 बजे तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। गुलिक काल प्रातः 10:49 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक और यमगंड काल प्रातः 7:49 से 9:19 बजे तक रहेगा। इन तीनों कालों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना गया है।
दिशाशूल और विशेष ध्यान
बुधवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिन उत्तर दिशा में यात्रा करना या प्रस्थान करना अशुभ माना जाता है। वामन जयंती के अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा शाम 4:27 बजे से पहले, सुकर्मा योग की अवधि में करना विशेष फलदाई माना जाएगा।