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23 सितंबर 2026 पंचांग: वामन जयंती पर भगवान विष्णु की पूजा शुभ, शाम 4:27 तक सुकर्मा योग

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23 सितंबर 2026 पंचांग: वामन जयंती पर भगवान विष्णु की पूजा शुभ, शाम 4:27 तक सुकर्मा योग

सारांश

23 सितंबर 2026 को वामन जयंती पर भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार की पूजा का विशेष महत्व है। शाम 4:27 बजे तक सुकर्मा योग, प्रातः 11:49 से दोपहर 12:38 बजे तक अभिजीत मुहूर्त — नए कार्यों, विवाह और निवेश के लिए दिन शुभ संयोग लेकर आया है।

मुख्य बातें

वामन जयंती बुधवार, 23 सितंबर 2026 को — भगवान विष्णु के पाँचवें वामन अवतार की पूजा शुभ मानी गई है।
सुकर्मा योग शाम 4:27 बजे तक — सगाई, विवाह, गृह प्रवेश और नए व्यापार के लिए श्रेष्ठ।
अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:49 से दोपहर 12:38 बजे तक — दिन का सर्वाधिक फलदाई समय।
राहुकाल दोपहर 12:19 से 1:49 , गुलिक काल 10:49 से 12:19 , यमगंड काल 7:49 से 9:19 — इन कालों में नए कार्य वर्जित।
अमृतकाल रात 11:34 से 1:15 बजे — निवेश, पूजा और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उत्तम।
दिशाशूल उत्तर दिशा में — बुधवार को उत्तर दिशा में यात्रा से बचने की सलाह।

बुधवार, 23 सितंबर 2026 को वामन जयंती का पर्व मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के पाँचवें वामन अवतार की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं। पंचांग-गणना के अनुसार इस दिन सुकर्मा योग शाम 4:27 बजे तक विद्यमान रहेगा, जिसे 27 नित्य योगों में विशेष शुभ माना गया है।

तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रात 10:50 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी। बुधवार को सूर्योदय प्रातः 6:19 बजे और सूर्यास्त सायं 6:18 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 4:20 बजे और चंद्रास्त तड़के 3:51 बजे होगा।

नक्षत्र और राशि की स्थिति

इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेंगे। यह आकाशमंडल का 12वाँ नक्षत्र है, जो सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक विस्तृत है। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव और देवता अर्यमा (देवताओं तथा पितरों के प्रमुख) हैं। मान्यता है कि इस नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी और नेतृत्व क्षमता से भरपूर होते हैं।

बुधवार को सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सूर्य के कन्या राशि में रहने से व्यावहारिक और योजनाबद्ध कार्यशैली लाभदायक रहती है। वहीं मकर राशि में चंद्रमा के रहने पर शनि का प्रभाव भावनाओं को अनुशासित और व्यावहारिक बनाता है।

सुकर्मा योग और अभिजीत मुहूर्त

बुधवार शाम 4:27 बजे तक सुकर्मा योग रहेगा। यह 27 नित्य योगों में सातवाँ और अत्यंत शुभ योग माना जाता है। यह योग तब बनता है जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों की संयुक्त दूरी 80 डिग्री 00 मिनट से 93 डिग्री 20 मिनट के मध्य होती है। इस योग के अधिष्ठाता देव देवराज इन्द्र हैं। सगाई, विवाह, गृह प्रवेश, नया वाहन या संपत्ति खरीदना, नए व्यापार की शुरुआत तथा नई नौकरी में प्रवेश के लिए यह अवधि विशेष शुभ मानी गई है।

दिन का सर्वाधिक फलदाई अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा — लगभग 48 मिनट की यह अवधि वह समय है जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर रहते हैं। मान्यता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से समस्त अशुभ प्रभाव और दोष स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

अमृतकाल, राहुकाल और अन्य अशुभ काल

बुधवार को अमृतकाल रात 11:34 बजे से रात 1:15 बजे तक रहेगा। पंचांग-शास्त्र के अनुसार, यह अमृत के समान उत्तम फल देने वाला काल है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।

इस दिन राहुकाल दोपहर 12:19 बजे से 1:49 बजे तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। गुलिक काल प्रातः 10:49 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक और यमगंड काल प्रातः 7:49 से 9:19 बजे तक रहेगा। इन तीनों कालों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना गया है।

दिशाशूल और विशेष ध्यान

बुधवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिन उत्तर दिशा में यात्रा करना या प्रस्थान करना अशुभ माना जाता है। वामन जयंती के अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा शाम 4:27 बजे से पहले, सुकर्मा योग की अवधि में करना विशेष फलदाई माना जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दिन के निर्णयों का व्यावहारिक कैलेंडर है। वामन जयंती का संयोग सुकर्मा योग के साथ आना इस दिन को सामान्य पंचांग से अलग बनाता है। पाठकों के लिए सबसे उपयोगी पक्ष यह है कि राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल — तीनों अशुभ अवधियाँ — दोपहर से पहले समाप्त हो जाती हैं, जिससे अपराह्न का बड़ा हिस्सा शुभ कार्यों के लिए खुला रहता है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

23 सितंबर 2026 को वामन जयंती क्यों मनाई जाती है?
वामन जयंती भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार — वामन रूप — की जयंती है। मान्यता है कि इस दिन वामन अवतार की पूजा करने से सुख-समृद्धि मिलती है और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
23 सितंबर को सुकर्मा योग कब तक है और इसका महत्व क्या है?
सुकर्मा योग बुधवार शाम 4:27 बजे तक रहेगा। यह 27 नित्य योगों में सातवाँ और अत्यंत शुभ योग है, जो सगाई, विवाह, गृह प्रवेश, नया वाहन या संपत्ति खरीदने और नए व्यापार की शुरुआत के लिए विशेष फलदाई माना गया है।
23 सितंबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त का समय क्या है?
अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक — लगभग 48 मिनट — रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है जिसमें किए गए कार्य सफल होते हैं।
23 सितंबर को राहुकाल कब से कब तक है?
राहुकाल दोपहर 12:19 बजे से 1:49 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कोई नया शुभ कार्य आरंभ न करने की सलाह दी जाती है, हालाँकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
23 सितंबर को अमृतकाल का समय क्या है और इसमें क्या करें?
अमृतकाल रात 11:34 बजे से रात 1:15 बजे तक रहेगा। पंचांग-शास्त्र के अनुसार यह अत्यंत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समय है — नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह काल श्रेष्ठ माना गया है।
राष्ट्र प्रेस
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