26/11 केस: हाफिज सईद समेत 6 पाकिस्तानी आतंकियों पर गैर-मौजूदगी में ट्रायल, उज्ज्वल निकम ने बताई पूरी प्रक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान में मौजूद 6 आरोपी आतंकियों के खिलाफ गैर-मौजूदगी में ट्रायल (इन एब्सेंशिया ट्रायल) की प्रक्रिया 20 अगस्त 2026 को एक अहम पड़ाव पर पहुँची, जब सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने इस कार्रवाई के कानूनी आधार और आगे की राह स्पष्ट की। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 लागू होने के बाद किसी आतंकी मामले में यह पहला इन एब्सेंशिया ट्रायल होगा, जो इसे ऐतिहासिक कानूनी मिसाल बनाता है।
मुख्य घटनाक्रम
निकम ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में दरखास्त दी गई है कि नए कानून के प्रावधानों के तहत हाफिज मुहम्मद सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर सहित छह पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ सबूत पेश करने की अनुमति दी जाए। कोर्ट की ओर से इस दरखास्त पर प्रोक्लेमेशन ऑर्डर जारी किया जा चुका है। निकम के अनुसार, यह आदेश भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में प्रकाशित कराया जाएगा, और इसके बाद कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे।
सरकार की भूमिका और कानूनी आधार
निकम ने कहा कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के खिलाफ ट्रायल चलाने की कानूनी सुविधा मिलने का श्रेय गृह मंत्री अमित शाह को जाता है और यह भारत सरकार का एक सकारात्मक कदम है। BNSS, 2023 के तहत यह व्यवस्था की गई है कि यदि आरोपी देश से बाहर हो और उपस्थित न हो सके, तो भी उसके खिलाफ ट्रायल संचालित किया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने दशकों से इन आरोपियों को भारत को सौंपने से इनकार किया है।
21 अगस्त की सुनवाई अहम
इस मामले में अगली निर्णायक सुनवाई 21 अगस्त 2026 को निर्धारित है। इसी दिन कोर्ट तय करेगा कि सभी छह आरोपियों के खिलाफ गैर-मौजूदगी में ट्रायल औपचारिक रूप से शुरू किया जाए या नहीं। मुंबई पुलिस और अभियोजन पक्ष कोर्ट के समक्ष इस आशय की माँग रखेंगे।
26/11 हमले की पृष्ठभूमि
26 नवंबर 2008 की रात लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने पाकिस्तान से समुद्री मार्ग से मुंबई में प्रवेश कर कई स्थानों पर एक साथ हमला किया था। यह हमला 29 नवंबर 2008 तक चला। इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। गौरतलब है कि इस हमले को डेढ़ दशक से अधिक बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान में मौजूद मुख्य आरोपियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
आगे क्या होगा
यदि कोर्ट 21 अगस्त को इन एब्सेंशिया ट्रायल की अनुमति देता है, तो यह भारत की न्यायिक प्रणाली में एक नई मिसाल कायम करेगा — जहाँ सीमा पार छिपे आतंकियों को भी भारतीय अदालत में जवाबदेह ठहराया जा सकेगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उनके पास छहों आतंकियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।