4 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

26/11 केस: हाफिज सईद समेत 6 पाकिस्तानी आतंकियों पर गैर-मौजूदगी में ट्रायल, उज्ज्वल निकम ने बताई पूरी प्रक्रिया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
26/11 केस: हाफिज सईद समेत 6 पाकिस्तानी आतंकियों पर गैर-मौजूदगी में ट्रायल, उज्ज्वल निकम ने बताई पूरी प्रक्रिया

सारांश

डेढ़ दशक बाद 26/11 के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद, लखवी और साजिद मीर समेत 6 पाकिस्तानी आतंकियों पर भारतीय अदालत में गैर-मौजूदगी में ट्रायल की राह खुली। BNSS 2023 के तहत यह किसी आतंकी मामले में पहला ऐसा केस होगा — और 21 अगस्त की सुनवाई इस ऐतिहासिक कदम की दिशा तय करेगी।

मुख्य बातें

हाफिज मुहम्मद सईद , जकी-उर-रहमान लखवी और साजिद मीर सहित 6 पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ गैर-मौजूदगी में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू।
BNSS, 2023 लागू होने के बाद किसी आतंकी मामले में यह पहला इन एब्सेंशिया ट्रायल होगा।
कोर्ट ने प्रोक्लेमेशन ऑर्डर जारी किया; इसे भारत और पाकिस्तान में प्रकाशित कराया जाएगा।
अगली अहम सुनवाई 21 अगस्त 2026 को; उसी दिन ट्रायल शुरू करने पर अंतिम निर्णय संभव।
26 नवंबर 2008 के हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी; हमला 29 नवंबर 2008 तक चला था।

26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान में मौजूद 6 आरोपी आतंकियों के खिलाफ गैर-मौजूदगी में ट्रायल (इन एब्सेंशिया ट्रायल) की प्रक्रिया 20 अगस्त 2026 को एक अहम पड़ाव पर पहुँची, जब सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने इस कार्रवाई के कानूनी आधार और आगे की राह स्पष्ट की। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 लागू होने के बाद किसी आतंकी मामले में यह पहला इन एब्सेंशिया ट्रायल होगा, जो इसे ऐतिहासिक कानूनी मिसाल बनाता है।

मुख्य घटनाक्रम

निकम ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में दरखास्त दी गई है कि नए कानून के प्रावधानों के तहत हाफिज मुहम्मद सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर सहित छह पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ सबूत पेश करने की अनुमति दी जाए। कोर्ट की ओर से इस दरखास्त पर प्रोक्लेमेशन ऑर्डर जारी किया जा चुका है। निकम के अनुसार, यह आदेश भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में प्रकाशित कराया जाएगा, और इसके बाद कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे।

सरकार की भूमिका और कानूनी आधार

निकम ने कहा कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के खिलाफ ट्रायल चलाने की कानूनी सुविधा मिलने का श्रेय गृह मंत्री अमित शाह को जाता है और यह भारत सरकार का एक सकारात्मक कदम है। BNSS, 2023 के तहत यह व्यवस्था की गई है कि यदि आरोपी देश से बाहर हो और उपस्थित न हो सके, तो भी उसके खिलाफ ट्रायल संचालित किया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने दशकों से इन आरोपियों को भारत को सौंपने से इनकार किया है।

21 अगस्त की सुनवाई अहम

इस मामले में अगली निर्णायक सुनवाई 21 अगस्त 2026 को निर्धारित है। इसी दिन कोर्ट तय करेगा कि सभी छह आरोपियों के खिलाफ गैर-मौजूदगी में ट्रायल औपचारिक रूप से शुरू किया जाए या नहीं। मुंबई पुलिस और अभियोजन पक्ष कोर्ट के समक्ष इस आशय की माँग रखेंगे।

26/11 हमले की पृष्ठभूमि

26 नवंबर 2008 की रात लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने पाकिस्तान से समुद्री मार्ग से मुंबई में प्रवेश कर कई स्थानों पर एक साथ हमला किया था। यह हमला 29 नवंबर 2008 तक चला। इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। गौरतलब है कि इस हमले को डेढ़ दशक से अधिक बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान में मौजूद मुख्य आरोपियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

आगे क्या होगा

यदि कोर्ट 21 अगस्त को इन एब्सेंशिया ट्रायल की अनुमति देता है, तो यह भारत की न्यायिक प्रणाली में एक नई मिसाल कायम करेगा — जहाँ सीमा पार छिपे आतंकियों को भी भारतीय अदालत में जवाबदेह ठहराया जा सकेगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उनके पास छहों आतंकियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यावहारिक सीमाएँ स्पष्ट हैं — पाकिस्तान ने आज तक किसी भी भारतीय प्रत्यर्पण अनुरोध का पालन नहीं किया है, और इन एब्सेंशिया दोषसिद्धि बिना हिरासत के केवल कागज़ पर रहती है। BNSS 2023 ने कानूनी रास्ता ज़रूर खोला है, पर असली सवाल यह है कि क्या इस फैसले का कूटनीतिक दबाव में कोई वज़न होगा। पिछले डेढ़ दशक में FAT F ग्रेलिस्टिंग जैसे अंतरराष्ट्रीय दबाव भी पाकिस्तान को इन आरोपियों पर सार्थक कार्रवाई के लिए मजबूर नहीं कर सके। यह ट्रायल न्यायिक रिकॉर्ड के लिए ज़रूरी है, लेकिन इसे न्याय का पर्याय मानना जल्दबाज़ी होगी।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

26/11 केस में गैर-मौजूदगी में ट्रायल क्या होता है?
गैर-मौजूदगी में ट्रायल (इन एब्सेंशिया ट्रायल) वह कानूनी प्रक्रिया है जिसमें आरोपी की शारीरिक उपस्थिति के बिना भी अदालत में उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। BNSS, 2023 के तहत यह सुविधा अब आतंकी मामलों में भी उपलब्ध है, और 26/11 केस इस कानून के तहत पहला ऐसा आतंकी मामला होगा।
हाफिज सईद और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारत के पास क्या सबूत हैं?
वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम के अनुसार अभियोजन पक्ष के पास हाफिज मुहम्मद सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर सहित सभी छह आतंकियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। ये साक्ष्य कोर्ट की अनुमति मिलने पर प्रस्तुत किए जाएंगे।
21 अगस्त 2026 की सुनवाई में क्या होगा?
21 अगस्त 2026 को मुंबई की अदालत में इस मामले की सुनवाई होगी, जिसमें मुंबई पुलिस और अभियोजन पक्ष सभी छह आरोपियों के खिलाफ गैर-मौजूदगी में ट्रायल शुरू करने की औपचारिक माँग करेंगे। इसी दिन कोर्ट यह तय कर सकता है कि ट्रायल शुरू किया जाए या नहीं।
26/11 हमले में कितने लोग मारे गए थे और हमला कब हुआ था?
26 नवंबर 2008 की रात लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने पाकिस्तान से समुद्री मार्ग से मुंबई में प्रवेश कर कई स्थानों पर हमला किया था। यह हमला 29 नवंबर 2008 तक चला और इसमें 166 लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।
BNSS 2023 ने इस मामले में क्या बदला?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 ने यह प्रावधान किया है कि विदेश में छिपे या फरार आरोपियों के खिलाफ भी भारतीय अदालत में ट्रायल संचालित किया जा सकता है। 26/11 केस इस नए कानून के तहत आतंकवाद के किसी मामले में पहला इन एब्सेंशिया ट्रायल बनेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले