₹93 लाख की जमीन धोखाधड़ी: कश्मीर ईओडब्ल्यू ने फरार ठग गुलाम मोही-उद-दीन डार को किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग (ईओडब्ल्यू) कश्मीर ने ₹93 लाख की जमीन और संपत्ति धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में कुख्यात आरोपी गुलाम मोही-उद-दीन डार को गिरफ्तार किया है। आरोपी बडगाम के जवाहरपोरा, सैमसन का निवासी है और अब्दुल खालिक डार का पुत्र है। यह गिरफ्तारी 18 सितंबर 2026 को सब-जज श्रीनगर की अदालत द्वारा जारी आदेश और वारंट के आधार पर की गई।
एक साल से था फरार
जाँच अधिकारियों के अनुसार, गुलाम मोही-उद-दीन डार पिछले एक वर्ष से गिरफ्तारी से बचता आ रहा था। उसके विरुद्ध पुलिस थाने में कई आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। इनमें थाना ईओडब्ल्यू कश्मीर की एफआईआर नंबर 17/2026 भी शामिल है, जो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338, 340 और 61(2) के तहत दर्ज की गई है।
ठगी का तरीका: जाली दस्तावेज़ और फर्जी संपत्ति बिक्री
जाँच में सामने आया है कि आरोपी गुलाम मोही-उद-दीन डार और उसके साथी सोमनाथ कौल — जो कालाश नाथ कौल के पुत्र हैं और 22 लोटस टावर, बेंगलुरु नॉर्थ, कर्नाटक / जनिपुर जम्मू के निवासी बताए जाते हैं — ने मिलकर पीड़ित को ₹93 लाख का आर्थिक नुकसान पहुँचाया।
आरोपियों ने पुलवामा के द्रुसु में 5 कनाल माइग्रेंट जमीन और बिजबेहारा में 300 खड़े पेड़ों की फर्जी बिक्री का झाँसा दिया। इसके लिए जाली एग्रीमेंट तैयार किए गए। ठगी की रकम निकालने हेतु एक बैंक खाता ठीक उसी दिन खोला गया था जिस दिन धनराशि का हस्तांतरण हुआ — जो इस घोटाले की सुनियोजित प्रकृति को उजागर करता है।
दोनों आरोपी खुद को संपत्ति का स्वामी या अटॉर्नी होल्डर बताकर भोले-भाले लोगों को माइग्रेंट संपत्तियाँ बेचने के झूठे आश्वासन देते थे — एक ऐसा हथकंडा जो जम्मू-कश्मीर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों की संपत्तियों से जुड़ी असुरक्षा का सीधा फायदा उठाता है।
सह-आरोपी की तलाश जारी
फरार सह-आरोपी सोमनाथ कौल के विरुद्ध फिलहाल ह्यू एंड क्राई नोटिस जारी किया जा चुका है। ईओडब्ल्यू कश्मीर उसके नेटवर्क और इस पूरे ऑपरेशन की व्यापक जाँच कर रही है।
माइग्रेंट संपत्ति धोखाधड़ी: व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में माइग्रेंट संपत्तियों की फर्जी बिक्री का यह कोई पहला मामला नहीं है। विस्थापित कश्मीरी परिवारों की संपत्तियाँ दशकों से धोखाधड़ी का निशाना रही हैं। ईओडब्ल्यू की यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब प्रशासन माइग्रेंट संपत्तियों की सुरक्षा और डिजिटल रिकॉर्डिंग को प्राथमिकता दे रहा है। आगे की जाँच से इस नेटवर्क के और सदस्यों का खुलासा होने की संभावना है।