28 अक्टूबर 2026
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गुजरात सूखा: 'आप' ने मांगा ₹50,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजा, सरकार की ₹8,500 राहत पर उठाए सवाल

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गुजरात सूखा: 'आप' ने मांगा ₹50,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजा, सरकार की ₹8,500 राहत पर उठाए सवाल

सारांश

गुजरात में सूखे की राजनीति गर्माई — AAP के गढ़वी ने सरकार की ₹8,500 प्रति हेक्टेयर राहत को नाकाफी बताते हुए ₹50,000 की माँग रखी। देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ के किसान फसल नुकसान और कर्ज के दोहरे बोझ तले हैं, और विपक्ष का तर्क है कि सरकार के पास पैसा है पर इच्छाशक्ति नहीं।

मुख्य बातें

AAP गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने 28 अक्टूबर 2026 को सूखा प्रभावित किसानों के लिए ₹50,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजे और कर्ज माफी की माँग की।
राज्य सरकार ने ₹8,500 प्रति हेक्टेयर (अधिकतम ₹17,000 प्रति किसान ) की राहत 1 नवंबर 2026 से लागू करने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ को सूखा प्रभावित घोषित किया।
सरकार ने 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा ₹2/किलो रियायती दर पर वितरित किया; 3 करोड़ किलोग्राम और उपलब्ध।
पशु शिविरों में रखे गए पशुओं के लिए ₹80 प्रति पशु प्रतिदिन दो माह तक सहायता दी जाएगी।
AAP ने पंजाब में ₹50,000 प्रति हेक्टेयर राहत का हवाला देते हुए गुजरात में समान पैकेज की माँग की।

आम आदमी पार्टी (AAP) के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने 28 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार से माँग की कि सूखा प्रभावित किसानों को ₹50,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाए और उनके कर्ज माफ किए जाएँ। यह माँग मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने के दो दिन बाद सामने आई है।

सरकार की राहत और 'आप' की आपत्ति

राज्य सरकार ने 1 नवंबर 2026 से लागू होने वाले राहत पैकेज में ₹8,500 प्रति हेक्टेयर फसल नुकसान सहायता की घोषणा की है, जो अधिकतम दो हेक्टेयर तक सीमित है — यानी एक किसान को अधिकतम ₹17,000 ही मिल सकेंगे। गढ़वी ने इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि खाद-बीज, ट्रैक्टर, निराई-गुड़ाई और बिजली पर किसानों का खर्च ₹20,000 से ₹21,000 प्रति बीघा तक पहुँच जाता है।

गढ़वी ने पिछले वर्ष बेमौसम बारिश के दौरान दी गई ₹22,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इस बार की घोषणा उससे भी कम है, जबकि कृषि लागत बढ़ चुकी है।

अन्य राज्यों से तुलना

AAP नेता ने पंजाब सरकार द्वारा सूखा राहत में ₹50,000 प्रति हेक्टेयर सहायता देने का उदाहरण दिया। उन्होंने महाराष्ट्र और राजस्थान में लागू कर्ज माफी व नकद सहायता योजनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि गुजरात के किसानों को भी तुलनीय राहत मिलनी चाहिए। गढ़वी का आरोप है कि मूंगफली की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद से सरकार के पास पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, परंतु उसका उचित उपयोग नहीं हो रहा।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार के अनुसार, राहत पैकेज में फसल नुकसान सहायता के अलावा रियायती दर पर चारा, पशु शिविरों के लिए सहयोग और प्रभावित क्षेत्रों में 150 दिन का रोजगार भी शामिल है। सरकार ने बताया कि खरीफ सीजन में 44 बाँधों के कमांड क्षेत्रों में सिंचाई जल उपलब्ध कराया गया था और आगामी रबी सीजन में 76 बाँधों से पानी की व्यवस्था की गई है।

सरकार के अनुसार, अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा ₹2 प्रति किलो की रियायती दर पर वितरित किया जा चुका है और वर्तमान में 3 करोड़ किलोग्राम चारा उपलब्ध है। पशु शिविरों में रखे गए पशुओं के लिए दो महीने तक ₹80 प्रति पशु प्रतिदिन की सहायता दी जाएगी। पेयजल को प्राथमिकता देते हुए 30 जून 2027 तक के लिए जल भंडारण की योजना बनाई गई है।

किसानों की व्यापक चिंताएँ

गढ़वी ने केवल मुआवजे तक अपनी बात सीमित नहीं रखी — उन्होंने किसानों, पशुपालकों, कृषि मजदूरों और बटाईदार किसानों सभी के लिए व्यापक राहत पैकेज की माँग की। उनका कहना है कि सूखा प्रभावित चारों जिलों के किसान परिवारों का दैनिक खर्च चलाना कठिन हो गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब आगामी रबी सीजन के लिए बुआई नजदीक है और सिंचाई जल की कमी की शिकायत भी सामने आ रही है। गढ़वी ने आरोप लगाया कि उद्योगों को जल उपलब्ध कराने के कारण कृषि क्षेत्र को नुकसान हो रहा है और सौनी सिंचाई योजना के बाँधों का पर्याप्त विकास न होने से योजना का पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुँच पा रहा। राज्य सरकार ने इन आरोपों पर सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आगे क्या होगा

राहत पैकेज 1 नवंबर 2026 से लागू होना है। AAP ने संकेत दिया है कि अगर सरकार बड़े मुआवजे की माँग नहीं मानती तो वे आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं। गौरतलब है कि गुजरात में सूखे की यह स्थिति मानसून की कम और देरी से हुई वर्षा का परिणाम है, जिसने विशेष रूप से सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र को प्रभावित किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 प्रति हेक्टेयर राहत और किसान की वास्तविक लागत ₹20,000-21,000 प्रति बीघा के बीच की खाई बताती है कि राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) की दरें कृषि लागत के वास्तविक आँकड़ों के साथ अद्यतन नहीं हो रही हैं। AAP की तुलना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है — पंजाब में वे सत्ता में हैं, इसलिए वहाँ की उदार दरें उद्धृत करना सहज है — परंतु इससे मूल सवाल वैध नहीं हो जाता, बल्कि और गहरा हो जाता है। असली अनुत्तरित मुद्दा बटाईदार किसानों और कृषि मजदूरों का है, जो न तो भू-स्वामी हैं और न ही औपचारिक लाभार्थी सूची में — ये वर्ग हर सूखे में राहत की परिधि से बाहर रहते हैं, चाहे सत्ता में कोई भी हो।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में सूखा राहत के लिए सरकार ने कितना मुआवजा घोषित किया है?
राज्य सरकार ने ₹8,500 प्रति हेक्टेयर फसल नुकसान सहायता की घोषणा की है, जो अधिकतम दो हेक्टेयर तक सीमित है — यानी एक किसान को अधिकतम ₹17,000 मिल सकेंगे। यह राहत 1 नवंबर 2026 से राज्य आपदा राहत कोष के नियमों के तहत लागू होगी।
'आप' ने गुजरात सूखे पर क्या माँग रखी है?
AAP के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने ₹50,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजे और किसानों के कर्ज माफी की माँग की है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों, पशुपालकों, कृषि मजदूरों और बटाईदार किसानों सभी के लिए व्यापक राहत पैकेज घोषित किया जाए।
गुजरात के कौन से जिले सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ को सूखा प्रभावित घोषित किया है। इन जिलों में मानसून की बारिश कम और देरी से होने के कारण यह निर्णय लिया गया।
सरकार के राहत पैकेज में किसानों के लिए और क्या शामिल है?
राहत पैकेज में फसल सहायता के अलावा ₹2 प्रति किलो रियायती दर पर चारा, पशु शिविरों के लिए ₹80 प्रति पशु प्रतिदिन दो माह तक सहायता और प्रभावित क्षेत्रों में 150 दिन का रोजगार शामिल है। सरकार ने 30 जून 2027 तक पेयजल भंडारण की भी योजना बनाई है।
गुजरात की राहत राशि अन्य राज्यों की तुलना में कहाँ खड़ी है?
AAP के अनुसार पंजाब सरकार सूखा राहत में ₹50,000 प्रति हेक्टेयर सहायता देती है, जबकि महाराष्ट्र और राजस्थान में कर्ज माफी व नकद सहायता योजनाएँ लागू हैं। गुजरात में इस बार घोषित ₹8,500 प्रति हेक्टेयर की दर पिछले वर्ष बेमौसम बारिश के दौरान दी गई ₹22,000 प्रति हेक्टेयर सहायता से भी कम है।
राष्ट्र प्रेस
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