अभिषेक बनर्जी ने मदन मित्रा को भेजा ₹10 करोड़ का कानूनी नोटिस, 72 घंटे में माफी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव एवं डायमंड हार्बर से लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी ने 21 जुलाई 2026 को पार्टी के बागी विधायक मदन मित्रा को कानूनी नोटिस भेजा। मित्रा पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अभिषेक के विरुद्ध झूठे, मनगढ़ंत और मानहानिकारक बयान प्रसारित किए। नोटिस में ₹10 करोड़ के मुआवजे और सार्वजनिक माफी की माँग की गई है।
कानूनी नोटिस में क्या है
अभिषेक बनर्जी की अधिवक्ता श्रोबाना सेनगुप्ता द्वारा भेजे गए इस नोटिस में कहा गया है कि मदन मित्रा के बयानों से डायमंड हार्बर सांसद की 'व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, राजनीतिक कद, विश्वसनीयता और साख' को गंभीर क्षति पहुँची है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यह ₹10 करोड़ की राशि एक पंजीकृत ट्रस्ट में जमा की जाएगी।
नोटिस के अनुसार, यह ट्रस्ट उन TMC सांसदों और विधायकों के विरुद्ध दल-बदल की कार्यवाही में सहायता करेगा जिन्होंने पार्टी छोड़ी है। साथ ही, यह उन लोगों की कानूनी और पुनर्वास संबंधी जरूरतें पूरी करेगा जो कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर और बागी सदस्यों की मिलीभगत से दर्ज झूठे आपराधिक मामलों के कारण राजनीतिक हिंसा के शिकार हुए हैं।
मदन मित्रा के लाइव वीडियो से उठा विवाद
नोटिस में 19 जुलाई 2026 को मदन मित्रा द्वारा किए गए एक लाइव वीडियो का विशेष उल्लेख है, जिसमें उन्होंने अभिषेक बनर्जी के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं। नोटिस में मित्रा को लिखित और वीडियो दोनों माध्यमों से सार्वजनिक माफी माँगने का निर्देश दिया गया है।
यह नोटिस मित्रा को ईमेल — जो उन्होंने अपने वेरिफाइड फेसबुक प्रोफाइल और 2026 के चुनावों के दौरान उपयोग किया था तथा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष दाखिल 'फॉर्म 26' हलफनामे में दर्ज है — एवं इंडिया पोस्ट स्पीड पोस्ट के जरिए भेजा गया है।
समय-सीमा और कानूनी चेतावनी
नोटिस में मित्रा को 72 घंटे के भीतर मुआवजे का भुगतान करने और माफी माँगने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अभिषेक बनर्जी कानून के तहत उपलब्ध सभी अधिकार और उपाय सुरक्षित रखते हैं, और इस नोटिस में लिखी किसी भी बात को उन अधिकारों के त्याग के रूप में नहीं समझा जाए।
TMC में अंदरूनी तनाव की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर बागी नेताओं और पार्टी नेतृत्व के बीच तनाव चरम पर है। मदन मित्रा, जो कभी TMC के वरिष्ठ नेता रहे हैं, हाल के महीनों में पार्टी लाइन से अलग बयान देते रहे हैं। यह कानूनी कार्रवाई संकेत देती है कि अभिषेक बनर्जी इस बार बागी स्वरों को कानूनी मोर्चे पर भी जवाब देने के लिए तैयार हैं। आने वाले दिनों में मित्रा की प्रतिक्रिया और TMC की आंतरिक राजनीति पर इसका असर देखने योग्य होगा।