आगरा MLC चुनाव 2026: सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल ने शिक्षक सीट पर लगातार दूसरी बार भाजपा को हराया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने 28 अक्टूबर 2026 को लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को करारा झटका दिया। वहीं, आगरा खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के प्रत्याशी डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ 'गुरुजी' ने सपा के शशांक यादव को पराजित कर अपनी सीट बचा ली।
मुख्य घटनाक्रम
रिटर्निंग ऑफिसर नरेंद्र प्रताप ने बुधवार को डॉ. आकाश अग्रवाल को विजय प्रमाणपत्र सौंपा। हालाँकि, प्रशासन की ओर से मतों के अंतिम आधिकारिक आँकड़े तत्काल उपलब्ध नहीं कराए गए। प्रमाणपत्र मिलने के बाद डॉ. अग्रवाल मीडिया से बातचीत किए बिना पुलिस सुरक्षा के बीच मतगणना स्थल के पिछले गेट से बाहर निकले, जबकि बाहर समर्थकों की भारी भीड़ जमा थी।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक श्रेणी की सीटें परंपरागत रूप से राजनीतिक दलों के शिक्षित मतदाताओं के बीच पकड़ की कसौटी मानी जाती हैं। डॉ. अग्रवाल की यह लगातार दूसरी जीत दर्शाती है कि शिक्षक वर्ग में सपा की स्वीकार्यता बनी हुई है।
भाजपा की स्नातक सीट पर वापसी
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत के बाद डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत और सरकार के कामकाज को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों, स्नातकों, अधिवक्ताओं और पत्रकारों का समर्थन इस जीत की बुनियाद रहा।
डॉ. सिंह ने रोज़गार, सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता, प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना और 'एक जिला, एक उत्पाद' जैसी योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में 'बिना खर्ची और बिना पर्ची' के सरकारी नौकरियाँ दी गई हैं।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप
डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि पहले 'सैफई और रामपुर का सिंडिकेट' नौकरियों पर डाका डालता था, जबकि अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से पूरी की जा रही है। गौरतलब है कि यह चुनाव 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों के लिए एक अहम राजनीतिक संकेत माने जा रहे हैं।
प्रशासन की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था
आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत मतगणना प्रक्रिया शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। दोनों विजयी प्रत्याशियों को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई।
शहर में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू रहने के कारण किसी भी विजय जुलूस की अनुमति नहीं दी गई। प्रत्याशियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।
मतगणना के दौरान रात को हुए कथित हंगामे के सवाल पर पुलिस कमिश्नर ने कहा कि संबंधित घटना मतगणना स्थल के अंदर की थी और बाहर कोई उपद्रव नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि पुलिस को अब तक इस विषय में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
आगे का सियासी परिदृश्य
इन दोनों सीटों पर मिले-जुले नतीजों से स्पष्ट है कि आगरा मंडल में दोनों प्रमुख दलों की जड़ें अलग-अलग मतदाता वर्गों में मज़बूत बनी हुई हैं। सपा का शिक्षक वर्ग में टिकाऊ आधार और भाजपा का स्नातक वर्ग में प्रभाव यह संकेत देते हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।