आईआईटी मद्रास में सड़क सुरक्षा पर मंथन: AI और भू-स्थानिक डेटा से 2024 में 1,77,177 मौतें रोकने की रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
आईआईटी मद्रास में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भू-स्थानिक डेटा के उपयोग पर एक विशेष विचार-मंथन सत्र आयोजित किया गया। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के संसद में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में सड़क हादसों में 1,77,177 लोगों की मौत हुई — यानी प्रतिदिन औसतन 485 मौतें और हर घंटे करीब 20 जानें।
मुख्य घटनाक्रम
इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश और सड़क सुरक्षा संबंधी सर्वोच्च न्यायालय समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे तथा समिति के सदस्य संजय बंदोपाध्याय ने भाग लिया। इसके साथ ही छात्र, शोधकर्ता, विशेषज्ञ और नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागी भी उपस्थित रहे।
न्यायमूर्ति सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों को रेखांकित किया — तेज़ रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना, गलत दिशा में ड्राइविंग, रेड लाइट जंप करना, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल, असुरक्षित ओवरटेकिंग तथा चालक की थकान और मानसिक तनाव। उन्होंने फर्स्ट प्रिंसिपल्स थिंकिंग के आधार पर प्रभावी और टिकाऊ समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।
रोड सेफ्टी इनोवेशन हब का परिचय
कार्यक्रम में तमिलनाडु सरकार और आरबीजी लैब्स द्वारा संयुक्त रूप से विकसित रोड सेफ्टी इनोवेशन हब को भी प्रस्तुत किया गया। यह मंच छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को अपने विचार साझा करने, उनका परीक्षण करने और उन्हें व्यापक पैमाने पर लागू करने का अवसर देता है।
यह हब आईआईटी मद्रास के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी जैसे शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से डेटा-आधारित समाधानों, स्मार्ट मोबिलिटी टूल्स, कम लागत वाले इंजीनियरिंग विकल्पों और उभरती सुरक्षा तकनीकों पर काम करता है। गौरतलब है कि यह पहल ओडिशा और आईआईटी दिल्ली जैसी संस्थाओं की तकनीक-आधारित सड़क सुरक्षा योजनाओं के अनुरूप है।
आँकड़ों की गंभीर तस्वीर
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के संसद में साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, भारत में सड़क हादसों में मृत्यु का आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है — 2022 में 1,68,491, 2023 में 1,72,890 और 2024 में 1,77,177। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 2.3 प्रतिशत अधिक है।
मृतकों में 46.2 प्रतिशत दोपहिया वाहन चालक और 20.6 प्रतिशत पैदल यात्री हैं। सर्वाधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि जान गंवाने वालों में 66.1 प्रतिशत 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं, और 83.3 प्रतिशत 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के — यानी देश का सबसे उत्पादक कार्यबल सबसे बड़े जोखिम में है।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब विश्व स्तर पर सड़क सुरक्षा को लेकर 'दशक की कार्ययोजना 2021-2030' चल रही है, जिसका लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक घटाना है। भारत के मौजूदा आँकड़े बताते हैं कि इस लक्ष्य को हासिल करना अभी भी कठिन चुनौती बना हुआ है।
आईआईटी मद्रास जैसे संस्थानों में AI और डेटा-आधारित अनुसंधान का विस्तार सड़क सुरक्षा नीति को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इस हब से उभरने वाले नवाचार समाधान ही तय करेंगे कि तकनीकी दृष्टिकोण ज़मीन पर कितना असरदार साबित होता है।