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बेअदबी मामले में अकाली दल की सीबीआई जांच की मांग, भगवंत मान पर गंभीर आरोप

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बेअदबी मामले में अकाली दल की सीबीआई जांच की मांग, भगवंत मान पर गंभीर आरोप

सारांश

शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर धार्मिक बेअदबी मामले में दस्तावेज हेरफेर और फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट के गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने CBI जांच की माँग करते हुए धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर जनांदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।

मुख्य बातें

शिरोमणि अकाली दल ने 24 जून को पंजाब के कथित धार्मिक बेअदबी मामले की CBI जांच की माँग की।
नेता महेशिंदर ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि दस्तावेजों में हेरफेर मुख्यमंत्री भगवंत मान के इशारे पर हुई।
दलजीत चीमा ने अकाल तख्त साहिब को गलत तरीके से प्रस्तुत करने और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
AAP पर कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर डीजीपी गौरव यादव से जांच माँगने का आरोप।
बलविंदर भुंदर ने कहा कि गुरुग्राम से कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई गई।
अकाली दल की पाँच सदस्यीय समिति धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर जनांदोलन की रणनीति बना रही है।

शिरोमणि अकाली दल ने बुधवार, 24 जून को मांग की कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित धार्मिक बेअदबी मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए। पार्टी का कहना है कि यह मामला अब अंतर-राज्यीय स्वरूप ले चुका है और राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

मुख्य आरोप और अकाली दल की माँग

अकाली दल नेता महेशिंदर ग्रेवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केवल CBI जांच ही इस मामले की सच्चाई तक पहुँच सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में पैसों के लेन-देन की भी जांच होनी चाहिए और दस्तावेजों में हेरफेर तथा जालसाजी कथित तौर पर मुख्यमंत्री के इशारे पर की गई।

ग्रेवाल को अकाली दल की उस पाँच सदस्यीय समिति में शामिल किया गया है जो धार्मिक संगठनों और संत समाज से मिलकर मुख्यमंत्री के खिलाफ जनांदोलन खड़ा करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में मुख्य आरोपी स्वयं मुख्यमंत्री हैं।

फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट का विवाद

अकाली नेता दलजीत चीमा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने खुद को बचाने के लिए कानून और संविधान का उल्लंघन किया, राज्य की शक्ति और सरकारी धन का दुरुपयोग किया, तथा अकाल तख्त साहिब को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की।

चीमा ने यह भी सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री ने किस अधिकार के तहत पंजाब पुलिस के कमिश्नर स्तर के अधिकारियों को कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट लाने के लिए भेजा। उन्होंने पूछा कि क्या यह निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए थे या अधिकारियों ने स्वयं ऐसा किया।

चीमा ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से भी स्पष्टीकरण माँगा कि कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट को किस आधार पर सार्वजनिक किया गया और उसे सही क्यों बताया गया।

आम आदमी पार्टी पर आरोप

ग्रेवाल ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर सार्वजनिक रूप से पेश किया और फिर उसी के आधार पर डीजीपी गौरव यादव से जांच की मांग की। यह आरोप, यदि सही है, तो पूरे जांच ढाँचे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

बलविंदर भुंदर का बयान

अकाली नेता बलविंदर भुंदर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले अकाल तख्त साहिब से टकराव किया और फिर झूठ का सहारा लिया, जिसमें गुरुग्राम से कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई गई। उन्होंने कहा कि जब यह साबित हो चुका है कि फोरेंसिक रिपोर्ट पंजाब पुलिस के अधिकारियों द्वारा बनाई गई थी, तो मुख्यमंत्री एक बार फिर सिख संगत को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

आगे क्या होगा

अकाली दल की पाँच सदस्यीय समिति धार्मिक संगठनों और संत समाज के साथ मिलकर जनांदोलन की रणनीति तय कर रही है। यह देखना बाकी है कि केंद्र सरकार CBI जांच की माँग पर क्या रुख अपनाती है और पंजाब सरकार इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी विश्वसनीयता तब तक अधूरी है जब तक स्वतंत्र साक्ष्य सामने न आएँ। गौरतलब है कि यह वही पार्टी है जिसके अपने कार्यकाल में बेअदबी के मामले अनसुलझे रहे — इसलिए नैतिक अधिकार का सवाल दोनों तरफ उठता है। फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट का आरोप यदि सही है, तो यह पंजाब पुलिस की संस्थागत विश्वसनीयता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है। CBI जांच की माँग राजनीतिक दबाव की रणनीति हो सकती है, लेकिन अकाल तख्त साहिब जैसी संस्था के नाम के जुड़ने से यह विवाद धार्मिक भावनाओं को भी छूता है — जो पंजाब की राजनीति में हमेशा निर्णायक रहा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेअदबी मामले में अकाली दल CBI जांच की माँग क्यों कर रहा है?
अकाली दल का कहना है कि यह मामला अंतर-राज्यीय स्वरूप ले चुका है और इसमें पैसों के लेन-देन की जांच जरूरी है, जो राज्य पुलिस के बजाय CBI ही कर सकती है। पार्टी का आरोप है कि राज्य पुलिस पर मुख्यमंत्री का प्रभाव होने से निष्पक्ष जांच संभव नहीं।
भगवंत मान पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
अकाली नेताओं ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के इशारे पर दस्तावेजों में हेरफेर हुई, कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट गुरुग्राम से तैयार करवाई गई और अकाल तख्त साहिब को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। ये सभी आरोप अभी तक कथित हैं और सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट विवाद क्या है?
अकाली दल का दावा है कि AAP ने एक कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे सार्वजनिक किया और उसी के आधार पर डीजीपी गौरव यादव से जांच माँगी। नेता दलजीत चीमा ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से स्पष्टीकरण माँगा है कि इस रिपोर्ट को सही क्यों बताया गया।
अकाली दल की पाँच सदस्यीय समिति क्या कर रही है?
यह समिति धार्मिक संगठनों और संत समाज से मिलकर मुख्यमंत्री के खिलाफ जनांदोलन खड़ा करने की रणनीति बना रही है। महेशिंदर ग्रेवाल इस समिति के सदस्य हैं।
अकाल तख्त साहिब इस विवाद में कैसे जुड़ा है?
अकाली नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने अकाल तख्त साहिब को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की और उनसे टकराव का रास्ता चुना। अकाल तख्त साहिब सिख धर्म की सर्वोच्च अस्थायी सीट है, इसलिए इसका नाम जुड़ने से यह मामला धार्मिक संवेदनशीलता का विषय बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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