आलोक सिंह बने बिहार राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष, कुशवाहा का ऐलान — 'हम एनडीए में थे, हैं और रहेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने 7 जून 2026 को पटना में आयोजित एक संगठनात्मक अधिवेशन में आलोक सिंह को बिहार राष्ट्रीय लोक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। इस अवसर पर कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ पूरी दृढ़ता से खड़ी है और भविष्य में भी यही स्थिति बनी रहेगी।
संगठनात्मक फेरबदल का ब्यौरा
अधिवेशन में पार्टी ने एक साथ कई नियुक्तियाँ कीं। प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जबकि हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। गौरतलब है कि आलोक सिंह इससे पहले भी प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका निभा चुके हैं — इस बार उनकी पुनर्नियुक्ति को पार्टी की निरंतरता और संगठनात्मक स्थिरता का संकेत माना जा रहा है।
कुशवाहा का NDA पर स्पष्ट रुख
कुशवाहा ने कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा बिहार में सत्ता की मज़बूत हिस्सेदार है और आगे भी सरकार में यह हिस्सेदारी पूरी ताक़त के साथ बनी रहेगी। उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पार्टी का विस्तार करें और अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को जोड़ें। पार्टी के अनुसार, उसकी सदस्य संख्या 22 लाख से अधिक हो चुकी है।
बूथ स्तर तक संगठन मज़बूत करने की रणनीति
कुशवाहा ने बताया कि रालोमो आंतरिक लोकतंत्र, नैतिक राजनीति और पारदर्शिता के सिद्धांतों पर काम कर रही है। पार्टी की रणनीति संगठन को बूथ स्तर तक मज़बूत करने की है और इस दिशा में तेज़ी से काम हो रहा है। अधिवेशन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाने की माँग
कुशवाहा ने अधिवेशन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर भी खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जनता दल (यूनाइटेड) और नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए निशांत कुमार को बहुत पहले ही राजनीति में सक्रिय भूमिका मिलनी चाहिए थी। कुशवाहा ने माँग की कि निशांत कुमार को मात्र कैबिनेट मंत्री नहीं, बल्कि बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए — यह बयान बिहार की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे सकता है।
आगे की राह
यह संगठनात्मक पुनर्गठन ऐसे समय में हुआ है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अपने शुरुआती चरण में हैं और NDA के घटक दल अपनी-अपनी ज़मीन मज़बूत करने में जुटे हैं। रालोमो की बढ़ती सदस्य संख्या और बूथ-स्तरीय विस्तार की योजना यह संकेत देती है कि पार्टी गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी और बढ़ाने के लिए सक्रिय है।