अमेठी सरकारी धन गबन: CBI ने UP के 5 जिलों में 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, ₹4 करोड़ के घोटाले की जांच
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 18 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े कथित ₹4 करोड़ के सरकारी धन गबन मामले में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी ने एक साथ 5 जिलों — लखनऊ, अयोध्या, कुशीनगर, प्रतापगढ़ और अमेठी — में 14 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मूल रूप से 21 मार्च 2025 को अमेठी जिले के गौरीगंज थाने में दर्ज हुआ था। शिकायत बेसिक शिक्षा विभाग, गौरीगंज के वित्त एवं लेखा अधिकारी ने दर्ज कराई थी, जिसमें सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 25 मई 2026 के आदेश में CBI जांच का निर्देश दिया। यह आदेश श्रवण कुमार द्विवेदी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य शीर्षक वाली याचिका पर आया था। CBI ने इस आदेश के अनुपालन में 8 जून 2026 को औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया।
कौन हैं आरोपी
CBI द्वारा दर्ज मामले में 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग, गौरीगंज का तत्कालीन जूनियर अकाउंट्स क्लर्क, एक ब्लॉक क्वालिटी कोऑर्डिनेटर, एक ब्लॉक एमआईएस कोऑर्डिनेटर, जगदीशपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय बेचूगढ़ के प्रधानाध्यापक तथा गौरीगंज क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पूरे शिवदास गुदुर के एक सहायक शिक्षक शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, मुख्य आरोपी ने अपने सहयोगियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची।
गबन का तरीका
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोप है कि सरकारी योजनाओं और विभागीय मदों के लिए आवंटित धनराशि को नियमों के विपरीत विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। कथित तौर पर यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, जिससे सरकारी खजाने से करीब ₹4 करोड़ का गबन कर निजी लाभ प्राप्त किया जा सके। गौरतलब है कि प्राथमिक शिक्षा विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह के कथित वित्तीय अनियमितता के मामले राज्य के शासन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
तलाशी में क्या मिला
CBI टीमों ने छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए, जो कथित तौर पर गबन की गई राशि के निवेश और उपयोग से जुड़े हैं। इसके अलावा, जांच अधिकारियों ने डिजिटल उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी अपने कब्जे में ली है। इन सभी की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिससे धन के लेन-देन, संबंधित बैंक खातों और संभावित लाभार्थियों की पहचान हो सके।
आगे की जांच
CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित घोटाले में और कितने लोग शामिल थे तथा सरकारी धन को किन माध्यमों से खर्च या निवेश किया गया। डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच से मामले में नए खुलासे होने की संभावना है। यह मामला उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग के वित्तीय प्रबंधन पर निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता को लेकर व्यापक बहस को भी जन्म दे सकता है।