23 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अमरेली में देश का पहला लॉयन अंडरपास तैयार, एशियाई शेरों को रेल हादसों से मिलेगी सुरक्षा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अमरेली में देश का पहला लॉयन अंडरपास तैयार, एशियाई शेरों को रेल हादसों से मिलेगी सुरक्षा

सारांश

गुजरात के अमरेली में देश का पहला लॉयन अंडरपास तैयार हो गया है — एशियाई शेरों को रेल हादसों से बचाने की दिशा में यह एक अभूतपूर्व कदम है। ₹9.42 करोड़ की इस परियोजना में पाँच अंडरपास बनेंगे और सफल रहने पर इसे देश के अन्य वन्यजीव गलियारों तक विस्तारित किया जाएगा।

मुख्य बातें

गुजरात के अमरेली जिले में देश का पहला लॉयन अंडरपास बनकर तैयार हुआ।
पश्चिम रेलवे और गुजरात वन विभाग की संयुक्त परियोजना की कुल लागत ₹9.42 करोड़ ।
कुल पाँच अंडरपास बनाए जाने हैं; पहला भेराई क्षेत्र में पूर्ण, शेष चार निर्माणाधीन।
ढसा-राजुला और राजुला-पीपावाव रेलखंडों पर ये अंडरपास बनाए जा रहे हैं।
डीआरएम दिनेश वर्मा के अनुसार, सफलता मिलने पर इस मॉडल को देशभर के वन्यजीव-संवेदनशील रेल गलियारों पर लागू किया जाएगा।
गीर वन्यजीव अभयारण्य दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है।

गुजरात के अमरेली जिले में पश्चिम रेलवे और गुजरात वन विभाग की संयुक्त पहल से देश का पहला लॉयन अंडरपास बनकर तैयार हो गया है, जो एशियाई शेरों को रेलवे ट्रैक पार करते समय होने वाली जानलेवा दुर्घटनाओं से बचाने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। 22 जुलाई 2026 को सामने आई इस खबर को वन्यजीव संरक्षण और रेल अवसंरचना के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

परियोजना का विस्तार और लागत

₹9.42 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना के तहत कुल पाँच लॉयन अंडरपास बनाए जाने हैं। इनमें से पहला अंडरपास भेराई क्षेत्र में पूरी तरह तैयार हो चुका है, जबकि शेष चार पर काम जारी है। ये अंडरपास ढसा-राजुला और राजुला-पीपावाव रेलखंडों पर बनाए जा रहे हैं — वही मार्ग जहाँ शेरों और अन्य वन्यजीवों के ट्रेन की चपेट में आने की घटनाएँ बार-बार दर्ज होती रही हैं।

क्यों ज़रूरी था यह कदम

गुजरात का गीर वन्यजीव अभयारण्य दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है और इसका बड़ा हिस्सा अमरेली जिले में फैला हुआ है। इसी क्षेत्र से पश्चिम रेलवे की व्यस्त रेल लाइन गुजरती है, जिस पर शेर और अन्य वन्यजीव अक्सर ट्रैक पार करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वन्यजीव-रेल टकराव की घटनाएँ संरक्षणवादियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

भावनगर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) दिनेश वर्मा ने कहा, 'यदि अमरेली में यह मॉडल सफल रहता है और वन्यजीव दुर्घटनाओं में कमी आती है तो भविष्य में इसे देश के अन्य वन्यजीव बहुल क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलवे मार्गों पर भी लागू किया जाएगा। यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक रेल अवसंरचना के बीच बेहतर संतुलन का उदाहरण है।' रेलवे ने इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य 'जीरो एक्सीडेंट' के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना बताया है।

स्थानीय समुदाय की राय

अमरेली के किसान महेंद्र खुमान ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, 'जिले में एशियाई शेरों की संख्या काफी अधिक है और रेलवे ट्रैक उनके लिए बड़ा खतरा बन जाता है। भेराई क्षेत्र में बनाया गया यह अंडरपास शेरों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक पहल है।' उन्होंने यह भी कहा कि सभी पाँच अंडरपास पूरे होने पर वन्यजीवों को सुरक्षित मार्ग मिलेगा और दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।

आगे की राह

रेलवे, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयास से शुरू हुई यह पहल न केवल एशियाई शेरों के संरक्षण को मज़बूती देगी, बल्कि देश में वन्यजीव सुरक्षा के लिए एक नए मॉडल के रूप में भी स्थापित हो सकती है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो भारत के अन्य वन्यजीव-संवेदनशील रेल गलियारों पर इसी तर्ज़ पर अंडरपास बनाए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका महत्व कहीं अधिक गहरा है — गीर के शेर दशकों से रेल पटरियों के कारण जान गँवाते रहे हैं और यह परियोजना उस दीर्घकालिक विफलता की स्वीकृति है। असली परीक्षा यह है कि क्या शेर इन अंडरपास का स्वाभाविक रूप से उपयोग करते हैं — वन्यजीव व्यवहार विज्ञान बताता है कि जानवर नई संरचनाओं को अपनाने में समय लेते हैं और बिना निगरानी तंत्र के 'जीरो एक्सीडेंट' का दावा समय से पहले होगा। यदि यह मॉडल देशभर में दोहराया जाना है, तो रेलवे को उपयोग-दर, दुर्घटना में कमी और वन्यजीव व्यवहार पर पारदर्शी डेटा सार्वजनिक करना होगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरेली का लॉयन अंडरपास क्या है और यह क्यों बनाया गया?
यह गुजरात के अमरेली जिले में पश्चिम रेलवे और गुजरात वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया देश का पहला विशेष वन्यजीव अंडरपास है, जिसका उद्देश्य एशियाई शेरों और अन्य वन्यजीवों को रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आने से बचाना है। गीर वन्यजीव अभयारण्य के निकट से गुजरने वाली व्यस्त रेल लाइन पर बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं के कारण यह परियोजना शुरू की गई।
इस परियोजना में कुल कितने अंडरपास बनेंगे और लागत क्या है?
₹9.42 करोड़ की इस परियोजना के तहत कुल पाँच लॉयन अंडरपास बनाए जाने हैं। इनमें से पहला भेराई क्षेत्र में पूरी तरह तैयार हो चुका है, जबकि शेष चार ढसा-राजुला और राजुला-पीपावाव रेलखंडों पर निर्माणाधीन हैं।
क्या यह मॉडल देश के अन्य हिस्सों में भी लागू होगा?
भावनगर मंडल के डीआरएम दिनेश वर्मा के अनुसार, यदि अमरेली में यह प्रयोग सफल रहा और वन्यजीव दुर्घटनाओं में कमी दर्ज हुई, तो भविष्य में देश के अन्य वन्यजीव-संवेदनशील रेल गलियारों पर भी इसी तर्ज़ पर अंडरपास बनाए जाएँगे।
एशियाई शेरों के लिए रेलवे ट्रैक इतना खतरनाक क्यों है?
गीर वन्यजीव अभयारण्य दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है और इसका बड़ा हिस्सा अमरेली जिले में फैला है। इसी क्षेत्र से पश्चिम रेलवे की व्यस्त रेल लाइन गुजरती है, जहाँ शेर और अन्य जंगली जानवर ट्रैक पार करते समय अक्सर ट्रेन की चपेट में आ जाते थे।
इस परियोजना का 'जीरो एक्सीडेंट' लक्ष्य से क्या संबंध है?
रेलवे के अनुसार, इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शेरों और वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना, रेल परिचालन को सुरक्षित बनाना और 'जीरो एक्सीडेंट' के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना है। रेलवे, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस परियोजना को क्रियान्वित कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले