अनिक दत्ता के निधन पर अग्निमित्रा पॉल का TMC पर हमला, ममता बनर्जी की मानसिकता को बताया 'घटिया'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बंगाली फिल्ममेकर अनिक दत्ता के निधन पर कोलकाता में शोक की लहर है। 29 मई को उनका पार्थिव शरीर प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र नंदन लाया गया, जहाँ बंगाली फिल्म जगत के कलाकार, राजनेता और प्रशंसक उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए एकत्रित हुए। इस दुखद अवसर पर राजनीतिक विवाद भी उभरा, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखे आरोप लगाए।
अग्निमित्रा पॉल की श्रद्धांजलि और दुख
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा, 'अनिक दा बहुत ही प्रतिभाशाली निर्देशक थे। उनकी फिल्में न सिर्फ सुपरहिट थीं, बल्कि प्रतिभा और गुणवत्ता के मामले में भी बेहतरीन थीं।' उन्होंने आगे कहा कि दत्ता सिर्फ एक निर्देशक नहीं, बल्कि उनके परिवार के मित्र भी थे। पॉल ने कहा, 'हमारे लिए यह स्वीकार करना बहुत मुश्किल है कि अनिक दा अब हमारे बीच नहीं रहे।'
TMC और ममता बनर्जी पर सीधा हमला
पॉल ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने बदले की राजनीति के तहत अनिक दत्ता की फिल्मों को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने यह भी कहा कि TMC सदस्य सायनी घोष, जो अनिक दत्ता के साथ काम कर चुकी हैं, अंतिम संस्कार में नज़र नहीं आईं। पॉल ने कहा, 'अगर हम अंतिम संस्कार में सम्मान दिखाते, तो इससे क्या फर्क पड़ जाता कि हम किसी भी दल में रहें।'
ममता बनर्जी पर सीधा निशाना साधते हुए मंत्री पॉल ने कहा, 'ममता बनर्जी की मानसिकता बहुत ही घटिया और निंदनीय है। मैं एक मंत्री हूँ, इसलिए इस बारे में बात नहीं करना चाहती, लेकिन मुझे यह कहने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि ऐसी मानसिकता नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि TMC, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का पाखंड अब बेनकाब हो चुका है।
BJP नेता लॉकेट चटर्जी की संवेदनाएँ
BJP नेता लॉकेट चटर्जी ने कहा कि यह बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा, 'वह राष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने फिल्ममेकर और एक बेहतरीन इंसान थे। इस मुश्किल समय में मेरी गहरी संवेदनाएँ उनके परिवार के साथ हैं।' चटर्जी ने यह भी कहा कि वे उम्मीद करती हैं कि अब ऐसी कोई और असमय मृत्यु न देखनी पड़े।
अनिक दत्ता का निधन कैसे हुआ
फिल्म निर्माता अनिक दत्ता की बुधवार को कोलकाता के हिंदुस्तान पार्क इलाके में स्थित अपने घर की छत से गिरने के बाद मौत हो गई थी। वे बंगाली सिनेमा के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक थे, जिनकी फिल्मों ने दर्शकों और आलोचकों दोनों का दिल जीता था। उनके जाने से बंगाली फिल्म जगत में एक अपूरणीय रिक्तता आ गई है।