सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी का ऐलान: हर सैनिक को ड्रोन उड़ाना होगा, NDA कैडेटों को भविष्य के युद्ध की ट्रेनिंग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 30 मई 2026 को पुणे में स्पष्ट किया कि भारतीय सशस्त्र बलों के प्रत्येक सैनिक को ड्रोन संचालन में दक्ष होना अनिवार्य है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 150वें बैच की पासिंग आउट परेड (POP) के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह बात कही। कैडेटों और सैन्यकर्मियों को ड्रोन प्रणालियों, सिमुलेटरों और ड्रोन-रोधी प्रौद्योगिकियों का व्यापक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
ईगल ऑन द आर्म: सेना प्रमुख का विज़न
जनरल द्विवेदी ने अपनी 'ईगल ऑन द आर्म' अवधारणा का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "सेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद मैंने 'ईगल ऑन द आर्म' का विचार रखा था। इसका अर्थ है कि प्रत्येक सैनिक के हाथ में एक ईगल होना चाहिए। जब मैं यह कहता हूं तो मेरा तात्पर्य किसी पक्षी से नहीं, बल्कि ड्रोन से होता है। इसका मतलब है कि प्रत्येक सैनिक में ड्रोन संचालित करने की क्षमता होनी चाहिए।" यह विज़न आधुनिक युद्धक्षेत्र की बदलती प्रकृति को रेखांकित करता है, जहाँ मानव रहित प्रणालियाँ निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।
प्रशिक्षण अवसंरचना को किया जा रहा मज़बूत
जनरल द्विवेदी ने बताया कि सैन्य संस्थानों में ड्रोन प्रशिक्षण की बुनियाद तेज़ी से तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा, "हमारी अकादमियों और अन्य प्रशिक्षण केंद्रों पर ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा सिमुलेटर भी उपलब्ध कराए गए हैं। जब मैं दिसंबर में यहां आया था, तब मैंने व्यक्तिगत रूप से कमांडेंट से बात की थी और सेना प्रशिक्षण दल को चार से छह बड़े ड्रोन तथा सिमुलेटर उपलब्ध कराए थे। इसके बाद कमांडेंट ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए और यहां और अधिक ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं।" यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन-रूस संघर्ष और अन्य वैश्विक युद्धों ने सिद्ध किया है कि ड्रोन आधुनिक सैन्य रणनीति की धुरी बन चुके हैं।
ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीक: दोहरी ज़रूरत
सेना प्रमुख ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि सैनिकों को केवल ड्रोन उड़ाना ही नहीं, बल्कि दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा, "प्रत्येक सैनिक के लिए ड्रोन और ड्रोन-रोधी उपकरणों का ज्ञान होना महत्वपूर्ण है। जब कोई सैनिक युद्ध के मैदान में जाता है तो ड्रोन का उपयोग इतने व्यापक स्तर पर किया जाएगा कि उन्हें नियंत्रित करने और उनका मुकाबला करने के लिए विस्तृत जानकारी की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि हम प्रत्येक कैडेट को वास्तविक ड्रोन और सिमुलेटर के माध्यम से प्रशिक्षण दे रहे हैं।" गौरतलब है कि यह भारत की पहली बार इतनी व्यापक स्तर पर ड्रोन-केंद्रित सैन्य प्रशिक्षण नीति है।
थिएटर कमांड: रिपोर्ट रक्षा मंत्री को सौंपी
जनरल द्विवेदी ने सशस्त्र बलों के थिएटराइजेशन पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी में सभी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं और पूरी रिपोर्ट रक्षा मंत्री को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा, "थिएटर कमांड से संबंधित प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है। वर्तमान में विभिन्न हितधारक इसकी समीक्षा कर रहे हैं।" चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने इस प्रस्ताव की गहन समीक्षा की है ताकि तीनों सेनाओं के परिचालन हितों का पूरा ध्यान रखा जा सके।
आगे क्या होगा
जनरल द्विवेदी ने थिएटर कमांड के तहत प्रस्तावित संरचना को स्पष्ट करते हुए कहा कि सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए सभी हितधारकों को कुछ समायोजन करने होंगे, जिससे अंततः परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा, "सेना प्रमुखों की जिम्मेदारी सैनिकों की भर्ती, प्रशिक्षण और रखरखाव सुनिश्चित करने की होगी, जबकि थिएटर कमांडरों की जिम्मेदारी बलों के संचालन और समन्वय की होगी।" नए CDS के नेतृत्व में इस सुधार प्रक्रिया के अगले चरण में और गति आने की उम्मीद जताई गई है।