राष्ट्रीय महिला आयोग की ART-IVF विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक, महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की समीक्षा शुरू
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 21 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) और आईवीएफ सेवाओं की समीक्षा के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने की और इसमें न्यायपालिका, चिकित्सा, कानून, प्रशासन तथा सामाजिक क्षेत्र के दिग्गज विशेषज्ञ शामिल हुए।
बैठक में क्या हुआ
बैठक में ART और आईवीएफ सेवाओं से जुड़े नैतिक, कानूनी, नियामक और चिकित्सा पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने मौजूदा चुनौतियों को रेखांकित करते हुए एक संतुलित, जवाबदेह और अधिकार-आधारित नियामक व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
समिति की संरचना
NCW द्वारा गठित इस विशेषज्ञ समिति में कई प्रतिष्ठित सदस्य शामिल हैं — जस्टिस (सेवानिवृत्त) आशा मेनन, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी सुंदरी नंदा, NCW की पूर्व सदस्य डॉ. अर्चना मजूमदार, आयोग की सलाहकार समिति की सदस्य डॉ. शिप्रा धर, सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी, सफदरजंग अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सर्वेश टंडन, एम्स नई दिल्ली की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीता सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नयना सहस्रबुद्धे, फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत कॉन्ट्रैक्टर और NCW की वरिष्ठ समन्वयक कंचन खट्टर। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) की ART और सरोगेसी डिवीजन की वैज्ञानिक-सी ऋचा सक्सेना ने भी मंत्रालय का प्रतिनिधित्व किया।
तीन विशेषज्ञ उपसमूहों का गठन
विशेषज्ञ समिति ने गहन समीक्षा के लिए तीन अलग उपसमूह बनाए हैं। नैतिकता समूह मरीजों की सहमति, प्रजनन संबंधी निर्णय-स्वतंत्रता, निजता, गोपनीयता, डोनर प्रबंधन, भ्रूण से जुड़े मुद्दों और शोषण की रोकथाम जैसे विषयों की जाँच करेगा।
कानूनी और नियामक समूह ART-IVF सेवाओं को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनों और नियमों की समीक्षा करेगा, अनुपालन में आने वाली खामियों की पहचान करेगा और आवश्यक सुधारों के सुझाव देगा। चिकित्सा और सुरक्षा समूह चिकित्सा प्रक्रियाओं, प्रयोगशाला मानकों, मरीजों की सुरक्षा, रिकॉर्ड प्रबंधन, जैविक पहचान और सर्वोत्तम चिकित्सा पद्धतियों का मूल्यांकन करेगा।
आयोग का उद्देश्य
NCW के अनुसार, इस पहल का मूल लक्ष्य ART और आईवीएफ सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आईवीएफ क्लीनिकों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और नियामक निगरानी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि भारत में ART विनियमन अधिनियम 2021 के बाद भी ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन की चुनौतियाँ बनी हुई हैं। तीनों उपसमूहों की रिपोर्ट के आधार पर समिति अपनी सिफारिशें तैयार करेगी, जो आगे चलकर नीतिगत सुधारों की दिशा तय कर सकती हैं।