मध्य प्रदेश कांग्रेस संकट: अरुण यादव ने राहुल गांधी से माँगा कार्यकर्ताओं के मनोबल की रक्षा का आश्वासन
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने 1 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश में पार्टी के भीतर गहराते आंतरिक संघर्ष पर गंभीर चिंता जताई और राष्ट्रीय नेतृत्व से कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की अपील की। यादव ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सीधे संबोधित करते हुए संगठनात्मक एकजुटता की माँग उठाई।
मुख्य घटनाक्रम
अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसकी सरकार आंतरिक संघर्ष तथा असफलताओं से जूझ रही है, ऐसे में पार्टी के वास्तविक निष्ठावान कार्यकर्ता वैचारिक और ज़मीनी स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कतिपय लोग एक 'मिलीजुली साजिश' के तहत इन्हीं कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
यादव की चेतावनी
यादव ने स्पष्ट किया कि युवाओं का जोश और पार्टी के अनुभवी नेताओं का विवेक मिलकर ही फासीवादी विचारधारा का सामना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जवाबदार लोग अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और वैमनस्यता पार्टी के कार्यकर्ताओं की कीमत पर भुनाने की कोशिश करेंगे, तो यह 'समयोचित नहीं होगा।'
संगठनात्मक एकता की माँग
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्रीय नेतृत्व से अपेक्षा की है कि वह सीधे हस्तक्षेप कर संघर्षशील कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटने से बचाएँ और संगठनात्मक एकता को सुदृढ़ करें। यह अपील ऐसे समय में आई है जब राज्य में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की प्रदेश इकाई किसी एक मुद्दे पर सरकार के खिलाफ एकजुट लड़ाई लड़ने में कठिनाई महसूस कर रही है।
उज्जैन भूमि विवाद का संदर्भ
गौरतलब है कि हाल ही में उज्जैन ज़मीन मामले में पार्टी के दिग्गज नेताओं के विवादित बयान सामने आए, जिससे सरकार के खिलाफ चल रही पार्टी की मुहिम कमज़ोर पड़ गई। यह पहली बार नहीं है जब आंतरिक बयानबाज़ी ने प्रदेश कांग्रेस की रणनीति को नुकसान पहुँचाया हो — आलोचकों का कहना है कि यह एक दोहराई जाने वाली प्रवृत्ति बन चुकी है।
आगे की राह
राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मध्य प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनज़र यह आंतरिक कलह पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।