अरुणाचल गवर्नर केटी परनाइक ने ईटानगर मेयर लिखा नारी तदार को 'लैंड ऑफ द राइजिंग सन' मेडलियन से नवाज़ा
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने 3 अगस्त 2025 को ईटानगर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (IMC) की मेयर लिखा नारी तदार को प्रतिष्ठित 'लैंड ऑफ द राइजिंग सन' मेडलियन फॉर एक्सीलेंस से सम्मानित किया। यह पुरस्कार उन्हें ईटानगर की शहरी संरचना को सुदृढ़ करने, स्वच्छता को बढ़ावा देने और राजधानी को नागरिकों के लिए अधिक रहने योग्य बनाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
सम्मान समारोह का विवरण
ईटानगर के लोक भवन में आयोजित इस समारोह में राज्यपाल परनाइक ने मेयर तदार की समर्पित नेतृत्व क्षमता की सराहना की। उन्होंने नागरिक सेवाओं को सशक्त बनाने, स्वच्छता अभियानों को गति देने और राजधानी क्षेत्र के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए मेयर द्वारा की गई पहलों को विशेष रूप से रेखांकित किया। राज्यपाल ने IMC की पूरी टीम को उनकी प्रतिबद्धता और दूरदर्शी सोच के लिए बधाई दी।
राज्यपाल का संदेश और शहरी जिम्मेदारी
परनाइक ने इस अवसर पर कहा कि एक स्वच्छ और सुव्यवस्थित शहर नागरिकों और नागरिक प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक होता है, जो शहरी जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। उन्होंने नगर निकाय को जनकेंद्रित पहलों को जारी रखने और शहरी प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक-आधारित समाधान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
'जीरो लिटर ईटानगर मिशन' का प्रस्ताव
राज्यपाल परनाइक ने ईटानगर को एक स्वच्छ, टिकाऊ और पर्यटन-अनुकूल शहर बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए 'जीरो लिटर ईटानगर मिशन' शुरू करने का प्रस्ताव रखा। इस मिशन के तहत सख्त नियमों का क्रियान्वयन, जन-जागरूकता अभियान, सीसीटीवी निगरानी, मौके पर जुर्माना वसूली और नागरिकों द्वारा उल्लंघन की रिपोर्टिंग की व्यवस्था शामिल होगी।
कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक मुक्त शहर की अपील
परनाइक ने कचरे को स्रोत पर ही 100 प्रतिशत अलग-अलग करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने हर घर, संस्थान, होटल, रेस्टोरेंट और बाज़ार की दुकानों से गीले, सूखे और खतरनाक कचरे को अलग-अलग संग्रहित करने की अपील की। राजधानी को प्लास्टिक-मुक्त बनाने की वकालत करते हुए उन्होंने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को समाप्त करने और स्थानीय रूप से उपलब्ध बांस, बेंत तथा अन्य पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने का आह्वान किया। यह पहल ऐसे समय में आई है जब पूर्वोत्तर के कई शहर तेज़ शहरीकरण के बीच पर्यावरणीय दबाव से जूझ रहे हैं।