हाफलोंग सीट पर भाजपा की रूपाली लंगथासा ने 50,306 वोटों के अंतर से दर्ज की जीत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार रूपाली लंगथासा ने असम के हाफलोंग विधानसभा क्षेत्र में 50,306 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की है, जिससे इस अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीट पर भाजपा का लगातार तीसरी बार दबदबा कायम हो गया है। 4 मई 2026 को घोषित इस नतीजे में रूपाली को 78,674 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) के डैनियल लैंगथासा को 28,368 वोट हासिल हुए।
मतदान और मतदाता आँकड़े
हाफलोंग विधानसभा क्षेत्र में 9 अप्रैल 2026 को मतदान हुआ, जिसमें 82.48 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया — जो जनता की व्यापक भागीदारी का संकेत है। इस क्षेत्र में कुल 1,58,640 मतदाता हैं, जिनमें 78,514 पुरुष और 80,126 महिला मतदाता शामिल हैं। इस बार मैदान में कुल 3 उम्मीदवार थे — भाजपा से रूपाली लंगथासा, नेशनल पीपल्स पार्टी से डैनियल लैंगथासा, और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) से नंदिता गार्लोसा।
नंदिता गार्लोसा का दलबदल और कांग्रेस से चुनाव
इस चुनाव की सबसे चर्चित कहानी पूर्व विधायक नंदिता गार्लोसा की रही। 2021 में भाजपा के टिकट पर हाफलोंग से विधायक चुनी गई नंदिता को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार में विद्युत और खनिज मंत्री बनाया गया था। हालाँकि, मार्च 2026 में भाजपा से टिकट न मिलने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल होकर इसी सीट से चुनाव लड़ा। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि पार्टी के भीतर असंतोष किस तरह चुनावी समीकरण बदल सकता है।
हाफलोंग सीट का राजनीतिक इतिहास
1967 में स्थापित हाफलोंग विधानसभा सीट पर अब तक 12 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें से 7 चुनावों में कांग्रेस ने जीत हासिल की। 2016 में भाजपा के बीर भद्रा हागजर ने कांग्रेस के निर्मल लांगथासा को हराकर पार्टी की पहली जीत दर्ज की थी। 2021 में नंदिता गार्लोसा ने पूर्व उपमुख्यमंत्री गोबिंदा चरण लांगथासा के बेटे निर्मल लांगथासा को बड़े अंतर से पराजित किया था। अब 2026 में रूपाली लंगथासा की जीत के साथ भाजपा ने इस सीट पर लगातार तीसरी बार कब्जा बरकरार रखा है।
हाफलोंग की भौगोलिक और प्रशासनिक विशेषता
हाफलोंग असम का एकमात्र हिल स्टेशन है और दीमा हसाओ जिले का मुख्यालय भी है। यह दीफू लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित यह सीट जनजातीय राजनीति और पहाड़ी क्षेत्रों की विकास आकांक्षाओं की दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। रूपाली लंगथासा की जीत अब इस क्षेत्र की जनता की उम्मीदों को पूरा करने की कसौटी पर परखी जाएगी।