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विकसित भारत-जी राम जी: असम ने अपनाया 'समुदाय-प्रथम' मॉडल, CM सरमा बोले — गांव से शुरू होगा विकास

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विकसित भारत-जी राम जी: असम ने अपनाया 'समुदाय-प्रथम' मॉडल, CM सरमा बोले — गांव से शुरू होगा विकास

सारांश

असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 'विकसित भारत-जी राम जी' को 'समुदाय-प्रथम' मॉडल के साथ लागू करने का ऐलान किया — जहाँ गाँव सिर्फ लाभार्थी नहीं, विकास के सूत्रधार होंगे। आजीविका, कनेक्टिविटी और सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे पर केंद्रित यह पहल असम के 2047 विकसित भारत विजन की नींव बनेगी।

मुख्य बातें

असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 25 अगस्त को 'विकसित भारत-जी राम जी' पहल के तहत 'समुदाय-प्रथम' दृष्टिकोण की घोषणा की।
योजना में हर गाँव के लिए बेहतर आजीविका, कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सुविधाएँ सुनिश्चित करने का लक्ष्य।
ग्रामीणों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास के सक्रिय साझेदार के रूप में स्थापित करने पर जोर।
कनेक्टिविटी सुधार से ग्रामीणों को बाजारों, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच मिलेगी।
यह पहल केंद्र के 2047 विकसित भारत लक्ष्य से जुड़ी है; असम इसे जमीनी स्तर पर लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 25 अगस्त को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार केंद्र की 'विकसित भारत-जी राम जी' पहल को 'समुदाय-प्रथम' दृष्टिकोण के साथ लागू कर रही है — जिसमें ग्रामीण आजीविका, कनेक्टिविटी और सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता दी जा रही है। सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि 'विकसित असम' का सपना जमीनी स्तर पर लोगों की सक्रिय भागीदारी के बिना साकार नहीं होगा।

पहल का मूल ढाँचा

मुख्यमंत्री सरमा ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा, 'विकसित भारत-जी राम जी के तहत असम 'समुदाय-प्रथम' का दृष्टिकोण अपना रहा है। हर गांव के लिए बेहतर आजीविका, बेहतर कनेक्टिविटी, बेहतर सार्वजनिक स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।' इस मॉडल में ग्रामीणों को केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास प्रक्रिया के सक्रिय साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।

'समुदाय-प्रथम' ढाँचे के तहत स्थानीय समुदायों को विकास की पहलों को आकार देने और उन्हें लागू करने में निर्णायक भूमिका दी जाएगी — यह केंद्र और राज्य की पिछली कल्याण-केंद्रित योजनाओं से एक स्पष्ट वैचारिक बदलाव है।

कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचे पर ज़ोर

राज्य सरकार का विशेष ध्यान गाँवों और निकटवर्ती कस्बों के बीच भौतिक एवं डिजिटल संपर्क सुधारने पर है, ताकि ग्रामीण निवासी बाजारों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकें। सार्वजनिक स्थानों और गाँव-स्तरीय सुविधाओं के उन्नयन से जीवन स्तर में सुधार और सामुदायिक बुनियादी ढाँचे को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सामुदायिक भागीदारी का महत्व

सरमा ने रेखांकित किया कि 'विकसित असम' का विजन गाँव के स्तर से ही शुरू होगा और इसकी बागडोर स्थानीय समुदायों के हाथ में होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार ग्रामीण बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने, बुनियादी सेवाओं की पहुँच बढ़ाने और आजीविका के नए अवसर सृजित करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।

गौरतलब है कि 'विकसित भारत-जी राम जी' पहल केंद्र सरकार के 2047 तक विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य से जुड़ी है, और असम इसे अपनी जमीनी परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है।

आम जनता पर असर

इस पहल का सीधा असर असम के उन लाखों ग्रामीण परिवारों पर पड़ेगा जो अब तक रोज़गार के सीमित अवसरों, कमज़ोर कनेक्टिविटी और अपर्याप्त सार्वजनिक सुविधाओं से जूझते रहे हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से ग्रामीण युवाओं को शिक्षा और रोज़गार के नए रास्ते खुलने की संभावना है।

आगे की राह

सरमा के अनुसार, ग्रामीण विकास और आजीविका सृजन असम के विकास एजेंडे के स्थायी स्तंभ बने रहेंगे। राज्य सरकार इस पहल को समावेशी और टिकाऊ बनाने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जता चुकी है। आने वाले महीनों में इस दृष्टिकोण के क्रियान्वयन की रूपरेखा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा क्रियान्वयन के मापन में होगी — यानी यह कि ग्रामीण भागीदारी को सिर्फ भाषण में नहीं, बजट आवंटन और जवाबदेही तंत्र में भी दर्शाया जाए। असम में ग्रामीण-शहरी विकास की खाई अभी भी गहरी है, और पिछली योजनाओं में 'जमीनी भागीदारी' का दावा अक्सर कागजी साबित हुआ है। सरमा का यह बयान एक्स पोस्ट तक सीमित है — अब देखना यह होगा कि इसे किस ठोस नीतिगत ढाँचे और बजटीय प्रावधान के साथ आगे बढ़ाया जाता है। बिना सत्यापन-योग्य लक्ष्यों के, यह पहल भी राजनीतिक संदेश से अधिक कुछ नहीं बन पाएगी।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'विकसित भारत-जी राम जी' पहल क्या है?
'विकसित भारत-जी राम जी' केंद्र सरकार की एक ग्रामीण विकास पहल है, जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ी है। असम इसे 'समुदाय-प्रथम' दृष्टिकोण के साथ लागू कर रहा है, जिसमें आजीविका, कनेक्टिविटी और सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे पर ध्यान केंद्रित है।
असम का 'समुदाय-प्रथम' दृष्टिकोण अन्य राज्यों से कैसे अलग है?
इस मॉडल में ग्रामीणों को केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की पहलों को आकार देने और लागू करने में सक्रिय भागीदार माना गया है। CM सरमा के अनुसार, 'विकसित असम' का निर्माण गाँव के स्तर से और लोगों के खुद के प्रयासों से होगा।
इस पहल से असम के ग्रामीण निवासियों को क्या फायदा होगा?
बेहतर कनेक्टिविटी से ग्रामीणों को बाजारों, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच मिलेगी। साथ ही, आजीविका के नए अवसर और उन्नत सार्वजनिक सुविधाएँ जीवन स्तर में सुधार लाएंगी।
CM हिमंत बिस्वा सरमा ने यह घोषणा कब और कहाँ की?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 25 अगस्त को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के माध्यम से यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि 'विकसित असम' का विजन गाँव के स्तर से शुरू होगा और स्थानीय समुदाय इसकी बागडोर संभालेंगे।
इस पहल के क्रियान्वयन की रूपरेखा कब स्पष्ट होगी?
अभी तक सरकार ने इस पहल के लिए कोई ठोस समयसीमा या बजटीय आँकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। आने वाले महीनों में इस दृष्टिकोण के क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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